नई दिल्ली, 24 जुलाई , नई दिल्ली में जंतर मंतर पर चल रहे आंदोलन में अब एक नया बदलाव आ गया है . अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक ने अनशन खत्म ( Sonam Wangchuk Breaks Hunger Strike) कर दिया है और कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दीपके ने उन्हें धन्यवाद ज्ञापित किया है. सवाल यही है कि धर्मेन्द्र प्रधान का त्यागपत्र होगा या नहीं ?
अब केंद्र सरकार द्वारा दिए गए आश्वासन के बाद सोनम वांगचुक का आमरण अनशन खत्म होने से आंदोलन की दिशा और दशा को लेकर चर्चा होने लगी है . पहला सवाल यह है कि क्या सोनू वांगचुक और अभिजीत दीपके एक साथ मिलकर पुरानी मांगों को लेकर एकता दिखाते रहेंगे , उनकी मांगों में धर्मेंद्र प्रधान का त्यागपत्र सबसे अहम है,
कितना कारगर होगा प्रधान का त्यागपत्र
पहली मांग धर्मेंद्र प्रधान का त्यागपत्र, इसके बाद ही आगे की मांगों पर कोई चर्चा हो सकती है, अभिजीत दीपके के समर्थन में विपक्ष भी इसी मांग को हथियार के रूप में आंदोलन को समर्थन दे रहा है, आज 24 जुलाई को अभिजीत दीपके की पार्टी के नेता केंद्र सरकार के मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात करेंगे और पूर्व में दिए गए अपने ज्ञापन को लेकर केंद्र सरकार द्वारा अब तक की गई कार्रवाई की चर्चा करेंगे.
अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अभिजीत दीपके और सोनम वांगचुक के साथ-साथ आंदोलन करने और उसे किसी परिणाम तक पहुंचाने के लिए आगे का रास्ता क्या होने वाला है ? सबसे अहम बात यह है कि यह आंदोलन करने का श्रेय अलग-अलग दलों के नेता लेने की कोशिश कर रहे हैं . इनमें पहला नाम कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दीपके का है और दूसरा आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल और संजय सिंह का , तीसरा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष लोकसभा राहुल गांधी का .
दलों की नजरे उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 पर
इसके अलावा धरना स्थल पर पहुंचकर अपना समर्थन देने वाले समाजवादी पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी सहित तमाम वे नेता शामिल है, जो धरना स्थल पर पहुंचकर अपनी एकजुटता और समर्थन का भाव प्रदर्शित कर चुके हैं . इन सब दलों की नजरे उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 और 2 साल बाद 2029 में होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर के हैं, सब जानते हैं उत्तर प्रदेश विधानसभा 2027 का चुनाव समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के लिए करो मरो जैसा है क्योंकि दो बार चुनाव से शिकस्त खा चुकी समाजवादी पार्टी अब अपने अस्तित्व को लेकर जूझ रही है और 2027 में अगर उसे अपेक्षित सफलता नहीं मिली तो न केवल पार्टी चलाना मुश्किल होगा बल्कि उत्तर प्रदेश में उसको लेकर के भी तरह-तरह की बातें आएंगे,
ऐसे में अखिलेश यादव पूरी ताकत के साथ इस आंदोलन में जुटे हुए हैं और न केवल वे खुद अपितु सांसद पत्नी और अधिकांश सांसद धरना स्थल पर पहुंचकर, संसद के अंदर संसद के बाहर से लेकर हर जगह नजर आ रहे हैं . वह राहुल गांधी के साथ कदमताल करते हुए इस आंदोलन को अपनी ताकत दे रहे हैं, ऐसे में महत्व समझना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि क्या इस आंदोलन के सहारे भारतीय जनता पार्टी कमजोर होगी या फिर यह आंदोलन भी अन्य आंदोलन की तरह भविष्य के गर्भ में समा जाएगा .
Sonam Wangchuk Breaks Hunger Strike: यह कोई पहला आंदोलन नहीं है जब पेपर लीक मामले को लेकर के छात्र युवा सड़कों पर उतरे हों , लेकिन इस बार समूचा विपक्ष धरना प्रदर्शन में जिस तरह से सड़क पर उतरा है , न केवल कानून व्यवस्था के लिए सीधे-सीधे चुनौती है, बल्कि इस आंदोलन को संभालना भी केंद्र सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है.
फास्ट ट्रैक कोर्ट का कितना असर होगा ?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक मामले में से जुड़े सभी प्रकरणों को लेकर फास्ट्रेक कोर्ट बनाने की बात कही है . मतलब पेपर लीक मामले के आरोपितों और इससे जुड़े प्रकरणों को न्यायिक जांच के दायरे में लाया जाएगा और संबंधित व्यक्तियों आरोपितों को दंडित किया जाएगा, लेकिन विपक्षी से एक टोटका मान रहा है ताकि आंदोलन को खत्म किया जा सके . यह भी एक देखने की बात होगी कि फास्ट ट्रैक कोर्ट का स्वरूप क्या होगा> इसका दायरा क्या होगा ? इस जांच के लिए कितने अधिकार मिलेंगे और आरोपितों को किस प्रकार से दंडित किया जा सकेगा ?
इन सब सवालों के बीच आज 24 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी का प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय कैबिनेट मंत्री जगत प्रकाश नड्डा से मुलाकात करेगा और अपने पूर्व में दिए गए ज्ञापन को लेकर केंद्र सरकार द्वारा अब तक की गई कार्रवाही की जानकारी हासिल करेगा. साथ ही काकरोच जनता पार्टी के आंदोलन और उसके रूप से भी अवगत कराएगा. राहुल गांधी का आंदोलन इस पूरे प्रकरण में चर्चा का विषय बना हुआ है वह अभिजीत दीपके से हटकर आंदोलन का एक नया केंद्र तैयार कर रहे हैं . इसी के तहत उन्होंने प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना प्रदर्शन किया और उसके बाद 23 जुलाई की शाम को गांधी स्मृति भवन पहुंचकर महात्मा गांधी जी को याद किया उनके सिद्धांत तो आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया और केंद्र सरकार के खिलाफ देश के संविधान को तोड़ने का आरोप लगाया.
राहुल गांधी ने सार्वजनिक रूप से कहा कि मोदी सरकार युवाओं छात्रों की बातें नहीं सुन रही है . महात्मा गांधी जी के विचारों और संविधान की आत्मा को ताक पर रख दिया गया है . अब आने वाले दिन कॉकरोच जनता पार्टी, राहुल गांधी के आंदोलन के लिए तो महत्वपूर्ण होंगे ही होंगे , केंद्र सरकार के लिए भी अग्नि परीक्षा से कम नहीं है कि वह इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती हैं धर्मेंद्र प्रधान का त्यागपत्र होता है या नहीं ? केंद्र सरकार को यह भी डर भी सता रहा है कि अगर धर्मेंद्र प्रधान का त्यागपत्र लिया जाता है तो यह विपक्ष की बड़ी जीत होगी. लेकिन यह सिलसिला यहीं पर रुकने वाला नहीं है बल्कि विपक्ष के बाद एक और नई मांगे रखेगा और मांगों का एक ऐसा अंतहीन सिलसिला शुरू हो जाएगा कि केंद्र सरकार की साख और भरोसा लोगों पर टूटने लगेगा .
विपक्ष क्या चाहता है
विपक्ष यही चाहता है कि यह माहौल 2029 तक बना रहे और वह आसानी से चुनाव में वापसी कर सकें लेकिन राजनीतिक परिस्थितियों हमेशा एक जैसी नहीं रहती हैं. संभव है दिल्ली में चल रहा आंदोलन आज विपक्ष को बढ़त दे रहा हो लेकिन कल राजनीतिक परिस्थितियों कैसी होगी ? यह समझना राजनीतिक पंडितों के लिए भी थोड़ा मुश्किल होता है अन्यथा 2014, 2019 और 2024 में मोदी सरकार भारी बहुमत से तो नहीं आ पाती?
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