
लखनऊ, 03 सितम्बर, उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों और योजनाओं को लागू करने में कई अफसर और कर्मचारी लगातार लापरवाही बरत रहे हैं . विभागीय कामकाज की समीक्षा में ऐसी लापरवाही और गड़बड़ी पकड़े जाने पर अधिकारी लगातार दंडित भी किया जा रहे हैं , लेकिन इसका ज्यादा जमीनी असर दिखाई नहीं पड़ रहा है .
कुछ ऐसा ही हाल छात्रों को दी जाने वाली विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति से जुड़ा हुआ है. प्रदेश के कई विश्वविद्यालयों, विद्यालयों और निजी शिक्षण संस्थाओं ने पात्र विद्यार्थियों के फॉर्म को आगे अग्रसारित ही नहीं किया और कई ने तो इस योजना को लाभान्वित करने के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित ही नहीं किया . इनमें समाज कल्याण विभाग के कई जिला स्तर के अधिकारी भी शामिल हैं तो औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के मंडलीय संयुक्त निदेशक तक के अधिकारियों की लापरवाही सामने आई है .
मामला उजागर होने के बाद योगी सरकार ने ऐसे लापरवाह अधिकारियों – कर्मचारियों के खिलाफ शक्ति से पेश आना शुरू कर दिया है. इनमें कई अधिकारियों को न केवल प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई है , बल्कि उनके कामकाज को भी नए सिरे से खंगाला जा रहा है कि आखिर यह लापरवाही किसी स्तर पर की गई है . अधिकारियों के साथ-साथ उनके मातहत कर्मचारियों ने भी लापरवाही में कोई कसर नहीं छोड़ी . रिश्वतखोरी से लबरेज कई संस्थानों ने तो विद्यार्थियों को योजना से जुड़ी कई चीज बताई ही नहीं और ना ही उनके फार्मो को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया ही पूरी की.
ऐसे में परिणाम यह रहा कि वर्ष 2024-25 में प्रदेश के लगभग 6 लाख से अधिक विद्यार्थियों को इस योजना का लाभ ही नहीं मिल सका. अब योगी सरकार ने इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए डेढ़ दर्जन अधिकारियों कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर संदेश दिया है कि उन्हें जनकल्याणकारी योजनाओं और कार्यक्रमों को उच्च प्राथमिकता के आधार पर जमीन पर उतरना होगा.
बरेली के 40 संस्थानों के 1600 विद्यार्थी प्रभावित
बरेली में सबसे ज्यादा 40 शिक्षण संस्थानों के 1600 पात्र विद्यार्थियों को योजना का लाभ नहीं मिला। इसलिए वहां के बाबू प्रमोद जोशी को सस्पेंड करने का निर्णय लिया गया। बाराबंकी के समाज कल्याण बाबू प्रभात सिंह, हापुड़ के दीपक, झांसी के मनोज वर्मा और प्रयागराज के रामचंद्र यादव को कठोर चेतावनी जारी की गई है।
समाज कल्याण बाबुओं को भी प्रतिकूल प्रविष्टि
विपिन कुमार व प्रवीन माहेश्वरी (अलीगढ़), विष्णु चंद्र वर्मा व भूपेंद्र सिंह (औरेया), विकास श्रीवास्तव (अयोध्या), मसीह उल्लाह अंसारी व नवनीत आर्या (बहराइच), विकास पाठक (बलिया), अंकित कुमार (बिजनौर), सारांश श्रीवास्तव (गौतमबुद्धनगर), संजीव शर्मा (गाजियाबाद), जितेंद्र कुमार (कन्नौज), मनोज कुमार व अनूप कुमार (प्रतापगढ़), आशीष पांडे (रायबरेली), सुरेश गौतम व अरुण वर्मा (सीतापुर), उत्तम कुमार (वाराणसी)।
ये भी आए कार्रवाई के दायरे में
सीएम ने इस मामले में लापरवाही करने वाले राज्य विश्वविद्यालयों, केंद्रीय विवि, संबद्धता देने वाली एजेंसियों और निजी विश्वविद्यालयों के 66 नोडल अधिकारियों पर कार्रवाई के लिए सक्षम स्तर से कार्रवाई कराने के भी निर्देश दिए हैं। 14 राज्य विश्वविद्यालयों और 19 निजी विश्वविद्यालयों को कठोर चेतावनी जारी की जा रही है। आयुष विभाग के दो नोडल अधिकारियों पर भी कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
ये भी लापरवाह
अटल बिहारी वाजपेयी यूनिवर्सिटी, राम मनोहर लोहिया संस्थान, एपीजे अब्दुल कलाम टेक्नीकल यूनिवर्सिटी, मदन मोहन मालवीय प्राविधिक विवि ,आयुष विवि गोरखपुर, स्टेट मेडिकल फैकल्टी के छात्रवृत्ति के नोडल अधिकारियों पर भी कार्रवाई के निर्देश दे दिए हैं। गोरखपुर, आगरा, वाराणसी, अलीगढ़, लखनऊ, चित्रकूट, अयोध्या और सहारनपुर के आईटीआई के संयुक्त निदेशकों पर भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
