लखनऊ , 12 मई , प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में आज जन भवन में बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की समीक्षा बैठक एवं प्रस्तुतीकरण संपन्न हुआ।
बैठक में राज्यपाल जी ने प्रस्तुतीकरण हेतु लगाए गए फोटोग्राफ्स को उचित कैप्शन सहित प्रदर्शित किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में किए जा रहे नवाचारों, केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं तथा प्राप्त बजट के सदुपयोग के निर्देश दिये। इस अवसर पर उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा बीज उत्पादन एवं किसानों में उसके वितरण की व्यवस्था की भी समीक्षा की।

उन्होंने स्थानीय स्तर पर निर्मित कृषि उत्पादों एवं तकनीकों को स्थानीय किसानों के लिए सुलभ बनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि बजट एवं आवश्यकताओं के अनुरूप उत्पादन की कार्यसंस्कृति विकसित किए जाने की आवश्यकता है।
राज्यपाल जी ने विशेष रूप से बुंदेलखंड क्षेत्र में कृषि उत्पादन बढ़ाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए योजनाएं तैयार की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों की वास्तविक समस्याओं एवं आवश्यकताओं की पहचान कर उसी के अनुरूप योजनाओं का निर्माण किया जाए तथा उन्हें समयबद्ध सरकारी सहायता एवं वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराया जाए।
बैठक में केंद्र सरकार की धन-धान्य योजना एवं दलहन-तिलहन योजना पर भी चर्चा की गई। राज्यपाल जी ने कृषि उत्पादन एवं कृषि सहायता हेतु छोटे-छोटे यंत्रों के निर्माण, उनके उपयोग तथा उत्पादन वृद्धि में उनकी भूमिका की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन के लिए लघु उपकरणों एवं तकनीकों के विकास पर बल दिया।
राज्यपाल जी ने ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताते हुए विद्यार्थियों एवं कृषकों को इससे जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत ऐसे विद्यार्थी जिनके पास कृषि भूमि उपलब्ध है, वे ऑर्गेनिक खेती के माध्यम से नवाचार एवं आय सृजन के मॉडल विकसित करें।
उन्होंने कहा कि परिवर्तन एक क्रमिक प्रक्रिया है तथा उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए आय सृजन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालयों एवं कृषि संस्थानों द्वारा अनेक नवाचार किए जा रहे हैं, किंतु उनकी प्रभावी ब्रांडिंग एवं प्रचार-प्रसार आवश्यक है। राज्यपाल जी ने कृषि यंत्र निर्माण करने वाली कंपनियों के साथ समन्वय स्थापित कर तकनीकी नवाचारों को व्यापक स्तर पर किसानों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया।
बैठक में कृषि विकास, किसानों के मार्गदर्शन, अनुसंधान तथा नवाचार को बढ़ावा देने के विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में राज्यपाल जी ने कुछ पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों के न्यूनतम नामांकन पर चिंता व्यक्त करते हुए विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय प्रशासन को नामांकन बढ़ाने हेतु प्रभावी प्रयास किए जाने के निर्देश दिए। राज्यपाल जी ने अनुसंधान गतिविधियों पर विशेष जोर देते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों में किए जा रहे शोध कार्यों के सकारात्मक परिणाम समाज एवं कृषकों तक पहुंचने चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन अनुसंधानों से उपयोगी एवं प्रभावी परिणाम प्राप्त हो रहे हैं, उन्हें आगे बढ़ाते हुए व्यवहारिक स्तर पर लागू किया जाए।
उन्होंने कहा कि राज्य कृषि विश्वविद्यालयों, भारत सरकार एवं नीति आयोग की सहभागिता से एक कार्यशाला आयोजित की जाएगी, जिसमें विश्वविद्यालयों की समस्याओं, चुनौतियों एवं उनके समाधान पर विस्तार से विचार-विमर्श किया जाएगा।
बैठक में राज्यपाल जी ने माननीय प्रधानमंत्री जी की अपील के प्रमुख बिंदुओं का उल्लेख करते हुए उपस्थित विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय प्रतिनिधियों से पेट्रोल एवं डीजल की खपत कम करने, एक वर्ष तक सोना न खरीदने, अनावश्यक विदेश यात्राओं से बचने, वर्क फ्रॉम होम को प्रोत्साहित करने, खाद्य तेल की खपत कम करने तथा स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की अपील की।
