लखनऊ , 06 मई , उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में आज 06 मई को जन भवन के गांधी सभागार में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ वाराणसी से संबद्ध शासकीय एवं वित्तपोषित महाविद्यालयों की समीक्षा बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में संबंधित महाविद्यालयों द्वारा प्रस्तुतीकरण भी दिया गया।
राज्यपाल जी की निरंतर प्रेरणा एवं मार्गदर्शन से प्रदेश के विश्वविद्यालय गुणवत्ता एवं उत्कृष्टता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं तथा नैक एवं एनआईआरएफ रैंकिंग में भी बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी क्रम में महाविद्यालयों में भी समान स्तर की गुणवत्ता एवं उत्कृष्टता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इस प्रकार की समीक्षा बैठकों का नियमित आयोजन किया जा रहा है, ताकि महाविद्यालयों की शैक्षणिक एवं संस्थागत गुणवत्ता में निरंतर सुधार किया जा सके।

बैठक में महाविद्यालयों में विद्यार्थियों की कम संख्या, शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात, महाविद्यालयों को उत्कृष्टता की दिशा में आगे ले जाने में विश्वविद्यालय की भूमिका, पाठ्यक्रमों की प्रासंगिकता, भविष्य की शैक्षणिक योजनाएं तथा विद्यार्थियों को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके अतिरिक्त पुस्तकालय एवं प्रयोगशालाओं की स्थिति, स्वीकृत पदों के सापेक्ष भरे एवं रिक्त पद, कार्यशालाएं, सेमिनार, शोध कार्य, पेटेंट, प्रकाशन, संयुक्त शोध एवं संयुक्त प्रकाशनों से संबंधित विषयों की भी विस्तृत समीक्षा की गई।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल जी ने महाविद्यालयों की गुणवत्ता सुधार एवं समग्र विकास के लिए अनेक महत्वपूर्ण निर्देश प्रदान किए। उन्होंने कहा कि महाविद्यालयों में नैक एवं एनआईआरएफ की तैयारी में जो भी कमियां हैं, उनकी विस्तृत सूची विश्वविद्यालय स्तर पर तैयार की जाए तथा उन्हें दूर करने हेतु नियमित रूप से ऑनलाइन कार्यशालाएं एवं समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएं। उन्होंने विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय के बीच समन्वय बढ़ाने पर बल देते हुए कहा कि जहां विश्वविद्यालय में अच्छी शैक्षणिक प्रवृत्तियां हों, वहां महाविद्यालयों को आमंत्रित किया जाए तथा जहां महाविद्यालयों में उत्कृष्ट कार्य हो रहे हों, वहां विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राएं जाकर उनसे सीखें।
राज्यपाल जी ने निर्देश दिया कि विश्वविद्यालय महाविद्यालयों को हर संभव सहयोग प्रदान करें, ताकि वे गुणवत्ता एवं उत्कृष्टता की दिशा में आगे बढ़ सकें। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय स्वयं भी विश्वविद्यालय से संपर्क कर मार्गदर्शन प्राप्त करें। जहां अध्यापकों की कमी है, वहां उनकी संख्या बढ़ाने तथा जहां आधारभूत संरचना एवं मूलभूत सुविधाओं का अभाव है, उन्हें सुदृढ़ करने हेतु शासन स्तर पर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
राज्यपाल जी ने निर्देश दिया कि एलुमनाई फंड एवं विद्यार्थियों से संबंधित अन्य निधियों का उपयोग पूर्ण पारदर्शिता के साथ केवल विद्यार्थियों के हित में किया जाए। उन्होंने समय के अनुरूप पुरानी नीतियों एवं नियमों की समीक्षा कर उन्हें परिवर्तित करने तथा वर्तमान आवश्यकताओं के अनुसार नई नीतियां एवं शासनादेश बनाने पर बल दिया और कहा कि निरंतर परिवर्तन ही विकास का आधार है। उन्होंने निर्देश दिया कि प्रत्येक विभाग में प्रतिवर्ष बैठक आयोजित कर वैश्विक एवं राष्ट्रीय स्तर पर हो रहे परिवर्तनों की समीक्षा की जाए तथा उसी के अनुरूप नीतियों में सुधार किया जाए।
राज्यपाल जी ने कहा कि भारत सरकार और राज्य सरकार के सहयोग से फंडिंग एजेंसियां शिक्षा एवं शोध के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती हैं। महाविद्यालय गुणवत्तापूर्ण परियोजनाएं तैयार कर राज्य एवं केंद्र सरकार को भेजें, जिससे अधिकाधिक फंड प्राप्त कर विद्यार्थियों के हित में उसका उपयोग किया जा सके।
उन्होंने दीक्षांत समारोह से संबंधित पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए गांवों के विद्यार्थियों के बीच प्रतियोगिताएं आयोजित कर विजेताओं को सम्मानित किया जाता है तथा प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों को विश्वविद्यालय परिसर में आमंत्रित कर प्रेरित किया जाता है। उन्होंने निर्देश दिया कि महाविद्यालय भी कम से कम दो गांव गोद लेकर वहां गतिविधियां आयोजित करें तथा विजेताओं को दीक्षांत समारोह में सम्मानित करें। इससे नामांकन बढ़ेगा एवं शिक्षा का प्रचार-प्रसार होगा। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि महाविद्यालय को उत्कृष्ट बनाने में योगदान देने वाले शिक्षकों को भी दीक्षांत समारोह में सम्मानित किया जाए।

राज्यपाल जी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग को सीमित एवं संतुलित रखने पर बल देते हुए कहा कि इसके अत्यधिक प्रयोग से विद्यार्थियों की रचनात्मकता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने विद्यार्थियों के लिए प्रतिदिन पुस्तकालय में कम से कम एक घंटा बैठना अनिवार्य करने के निर्देश दिए और कहा कि पुस्तकालय ज्ञान का भंडार है।
उन्होंने संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां 100 से अधिक प्राचीन पांडुलिपियां सुरक्षित हैं, जिनमें हमारा समृद्ध परंपरागत ज्ञान निहित है। विद्यार्थियों को ऐसे स्थलों का भ्रमण कराकर उन्हें भारतीय संस्कृति एवं प्राचीन ज्ञान से अवगत कराया जाए। उन्होंने कहा कि देशभर में लाखों पांडुलिपियां हैं, जिनके संरक्षण एवं संकलन का कार्य माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में किया जा रहा है, तथा इसका वैश्विक स्तर पर भी प्रचार-प्रसार हो रहा है। विद्यार्थियों को ऐसे प्रयासों से परिचित कराना आवश्यक है।
उन्होंने डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां वर्षों पुरानी पुस्तकों में वैश्विक इतिहास एवं विभिन्न देशों के विकास की जानकारी उपलब्ध है, जिससे विद्यार्थियों का दृष्टिकोण व्यापक होता है। उन्होंने कहा कि हमारी प्राचीन पांडुलिपियों में निहित ज्ञान अत्यंत समृद्ध, व्यापक एवं बहुआयामी है, जिसमें हमारी सभ्यता, संस्कृति, दर्शन और वैश्विक दृष्टि का सार समाहित है। उन्होंने इस अमूल्य धरोहर के संरक्षण, अध्ययन एवं प्रसार पर बल देते हुए कहा कि नई पीढ़ी को इस प्राचीन ज्ञान परंपरा से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है, ताकि वे अपनी जड़ों को समझ सकें और उससे प्रेरणा लेकर भविष्य का निर्माण कर सकें। उन्होंने अध्यापकों को निर्देश दिया कि वे अपने व्याख्यान के दौरान पाठ्यक्रम के अतिरिक्त कम से कम पांच मिनट का सामान्य ज्ञान भी विद्यार्थियों को अवश्य प्रदान करें।
राज्यपाल जी ने पर्यावरण संरक्षण पर बल देते हुए विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को अपनी माता के नाम पर पौधे लगाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विद्यार्थियों को सामाजिक गतिविधियों से जोड़ने, सेवा भावना विकसित करने, साइकिल यात्रा एवं पदयात्रा आयोजित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने शैक्षणिक भ्रमण के अंतर्गत विद्यार्थियों को नालंदा विश्वविद्यालय, बिहार का भ्रमण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नालंदा जैसे विश्वविख्यात प्राचीन विश्वविद्यालय के अवशेष हमारे गौरवशाली शैक्षिक इतिहास, उच्च कोटि की ज्ञान परंपरा तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की प्रतिष्ठा के सशक्त प्रमाण हैं। विद्यार्थियों को ऐसे ऐतिहासिक स्थलों का अवलोकन कराकर उन्हें भारतीय शिक्षा प्रणाली की महानता और उसकी वैश्विक पहचान से परिचित कराया जाना चाहिए।
इसी क्रम में उन्होंने विद्यार्थियों को गुजरात भ्रमण पर ले जाने का भी निर्देश दिया, जहां वे स्टैच्यू ऑफ यूनिटी तथा सोमनाथ मंदिर जैसे प्रेरणादायक स्थलों का दर्शन कर सकें। इसके अतिरिक्त उन्होंने सम्राट सम्प्रति संग्रहालय की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए बताया कि यह संग्रहालय प्राचीन जैन मूर्तियों, शिलालेखों एवं दुर्लभ कलाकृतियों का महत्वपूर्ण केंद्र है, जो हमारी समृद्ध सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत को प्रदर्शित करता है।
राज्यपाल जी ने कहा कि विद्यार्थियों को ऐसे स्थलों का शैक्षणिक भ्रमण अवश्य कराना चाहिए, ताकि वे देश की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक विरासत को निकट से समझ सकें और उससे प्रेरणा प्राप्त कर अपने व्यक्तित्व का समग्र विकास कर सकें।
राज्यपाल जी ने विद्यार्थियों को अग्निवीर जैसी प्रशिक्षण योजनाओं की जानकारी देने, लेखन कार्य को बढ़ावा देने तथा विभिन्न कौशल सीखने के लिए प्रेरित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार कौशलयुक्त विद्यार्थियों को रोजगार के अधिक अवसर प्राप्त होंगे। उन्होंने निर्देश दिया कि प्रत्येक प्रतियोगिता में विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाए तथा विभिन्न प्रकार के खेल, सरल एवं चुनौतीपूर्ण, आयोजित किए जाएं, जिससे उनका सर्वांगीण विकास हो सके।
राज्यपाल जी ने सभी को संकल्प लेने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि महाविद्यालयों को आगे बढ़ाने का कार्य पूरी निष्ठा से किया जाए, क्योंकि महाविद्यालयों की प्रगति से ही देश की प्रगति सुनिश्चित होगी। उन्होंने सभी से चिंतन कर ठोस प्रयास करने का आह्वान किया, ताकि शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र को सशक्त बनाया जा सके।
