
- नव नालंदा महाविहार के कुलपति प्रोफेसर सिद्धार्थ सिंह ने विजेताओं को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया।
- कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन प्रोफेसर विजय कुमार कर्ण ने किया तथा स्वागत वक्तव्य प्रोफेसर रूबी कुमारी (रजिस्ट्रार, नव नालंदा महाविहार) द्वारा दिया गया।
नालंदा/पटना , 27 सितम्बर , campus samachar.com, भारत सरकार के देशव्यापी सेवा पर्व कार्यक्रम “विकसित भारत के रंग, कला के संग” की परिकल्पना को साकार करने हेतु संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के अधीनस्थ सम विश्वविद्यालय नव नालंदा महाविहार, नालंदा ( Nava Nalanda Mahavihara Nalanda ) में राज्य स्तरीय पेंटिंग प्रतियोगिता का सफल आयोजन ह्वेनसांग स्मारक परिसर में किया गया।
इस प्रतियोगिता में लगभग 172 प्रतिभागियों ने भाग लेकर विकसित भारत की परिकल्पना को अपने रंगों एवं चित्रकला के माध्यम से जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।
प्रतियोगिता को तीन वर्गों में विभाजित किया गया था—
1. स्कूली बच्चों का वर्ग :
प्रथम स्थान – अनोखी कुमारी (सदर आलम मेमोरियल सेकेंडरी स्कूल, सोहसराय, बिहारशरीफ)
द्वितीय स्थान – जज़्बा परवीन (सदर आलम मेमोरियल स्कूल, बिहारशरीफ)
तृतीय स्थान – अतिया फिरोज़ (सदर आलम मेमोरियल स्कूल, नालंदा)
सांत्वना पुरस्कार – आयुषी राज (सदर आलम मेमोर…

2. महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय स्तर :
प्रथम स्थान – नीरज यादव (महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी)
द्वितीय स्थान – निधि जायसवाल (महाबोधि महाविद्यालय, नालंदा)
तृतीय स्थान – स्वाति कुमारी (कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड क्राफ्ट्स, बाढ़) को मिला।

3. पेशेवर कलाकारों का वर्ग :
प्रथम स्थान – आदित्य कुमार (पटना)
द्वितीय स्थान – दुर्गेश पांडेय (पटना)
तृतीय स्थान – गोपाल शर्मा (लखीसराय) को मिला।

कुलपति प्रोफेसर सिद्धार्थ सिंह ने विजेताओं को दिए पुरस्कार
नव नालंदा महाविहार के कुलपति प्रोफेसर सिद्धार्थ सिंह ने विजेताओं को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया। इस अवसर पर अपने उद्बोधन में कुलपति महोदय ने कहा कि भारत की समृद्ध कला परंपरा हमारे सांस्कृतिक उत्थान और राष्ट्रीय विकास की आधारशिला है। बच्चों और युवाओं के इन रंगों में विकसित भारत की झलक दिख रही है, जो आने वाले समय में राष्ट्र की दिशा और दशा को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगी।

उन्होंने विशेष रूप से इस बात का उल्लेख किया कि भारतीय संविधान की प्रस्तावना पर उकेरी गई कलाकृतियाँ हमारी विशाल संस्कृति का अद्वितीय प्रतिरूप हैं। स्वतंत्रता संग्राम की विकट परिस्थितियों में भी इन अद्भुत कलाकृतियों का सृजन करने का श्रेय हमारे महान कलाकारों को जाता है, जिन्होंने भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपरा को संविधान में अमर कर दिया।

Nava Nalanda Mahavihara Nalanda: सभी प्रतिभागियों को बधाई देते हुए उन्होंने आगे कहा कि नालंदा की धरा सदा से ज्ञान, कला और संस्कृति की धरोहर रही है। आज की प्रतियोगिता इस परंपरा को और मजबूत करती है तथा नए कलाकारों को प्रेरणा देती है। नव नालंदा महाविहार सदैव कला, संस्कृति और शिक्षा के समन्वय को प्रोत्साहित करता रहा है। ‘विकसित भारत’ की अवधारणा को रंगों में ढालना वास्तव में युवाओं की सृजनात्मक ऊर्जा और राष्ट्रीय प्रतिबद्धता का परिचायक है।
प्रोफेसर विजय कुमार कर्ण ने दिया धन्यवाद
कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन प्रोफेसर विजय कुमार कर्ण ने किया तथा स्वागत वक्तव्य प्रोफेसर रूबी कुमारी (रजिस्ट्रार, नव नालंदा महाविहार) द्वारा दिया गया। इस कार्यक्रम में नव नालंदा महाविहार के सभी शिक्षक, एवं गैर शैक्षणिक कर्मचारीयों की सहभागिता रही।
क्या बोले नोडल आफिसर
कार्यक्रम में 200 प्रतिभागियों ने विकसित भारत के विभिन्न आयामों पर अपनी पेंटिंग बनायी. सभी प्रतिभागियों को पेंटिंग की सामग्री निःशुल्क दी गई . कार्यक्रम के नोडल अधिकारी प्रो विजय कर्ण ने प्रतिभागी कलाकारों क संबोधित करते हुए कहा कि कला का क्षेत्र भेद भावों से मुक्त है कलाकार कल्पना को मूर्त रूप देने के साथ ही समाज के इतिहास को भी प्रस्तुत करते है अपनी कलाकृति के माध्यम से समाज को शिक्षित भी करते है .
