- सिर्फ आश्वासनों के सहारे शिक्षक नेता कर रहें हैं राजनीति , आम शिक्षकों का दर्द कोई नहीं सुन रहा
- शिक्षकों को वेतन नहीं मिलेगा तो घर कहाँ से चलेगा
- होली बीत गयी लेकिन कई विद्यालयों को वेतन नहीं मिला किसकी जिम्मेदारी ?
लखनऊ , 22 मार्च , माध्यमिक शिक्षा निदेशालय द्वारा शिक्षकों और कर्मचारियों से जुड़ी समस्याओं के त्वरित निराकरण के समय-समय पर निर्देश दिए जाते रहे हैं . राज्य सरकार की भी मंशा यही है कि समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाए शिक्षा विभाग में मॉनिटरिंग की भी सख्त व्यवस्था है ताकि शिक्षकों और कर्मचारियों को किसी भी प्रकार की समस्याएं न होने पाए लेकिन इसके बावजूद शासन के निर्देशों और माध्यमिक शिक्षा निदेशालय के निर्देशों की अनदेखी करने की परंपरा तेजी से चल निकली है.
अगर प्रदेश के दूर दराज के जिलों की बात छोड़ दे तो राजधानी लखनऊ में ही शिक्षकों की अनगिनत समस्याएं हैं . विद्यालयों में शिक्षकों को समय से वेतन न मिलना, उनके देयों के भुगतान में अनावश्यक विलंब करना, तरह तरह की आपत्तियों लगाकर वेतन बिल रोकना , विद्यालयों में शिक्षकों और कर्मचारियों के उत्पीड़न के लिए उन्हें त्वरित न्याय प्रदान न कर पाना और प्रमोशन और वेतनमान जैसे अनगिनत मुद्दे शिक्षा विभाग के अधिकारियों की टेबल पर रखे हुए हैं .
पीड़ित शिक्षक न्याय पाने के लिए शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ-साथ शिक्षक संगठनों के भी नेताओं के आगे गुहार लगा रहे हैं और यह सिलसिला अभी जारी है . शिक्षक की मनोस्थिति का अंदाजा आप सहज भाव से लगा सकते हैं कि जब उनको होली जैसे पर्व पर वेतन भी नहीं मिल पाता है .राजधानी लखनऊ की कई विद्यालयों के शिक्षकों को होली पर वेतन नहीं मिल पाया. इनमें चुटकी भंडार गर्ल्स इंटर कॉलेज , इंडस्ट्रियल इंटर कॉलेज और रामभरोसे मैकूगुलाल इंटर कॉलेज मुख्य रूप से शामिल है. यह बानगी सिर्फ वेतन को लेकर है जबकि जिला विद्यालय निरीक्षक लखनऊ,मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक लखनऊ, उप मंडलीय शिक्षा निदेशक लखनऊ जैसे वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी वाले शिक्षा भवन में शिक्षकों की समस्याओं को सुनने और निराकरण करने की व्यवस्था इतनी लापरवाह है कि शिक्षकों को न्याय नहीं मिल पा रहा है.
माध्यमिक शिक्षक ( शर्मा गुट ) , माध्यमिक शिक्षक संघ ( पांडे गुट ) के आलावा कई नए नवेले शिक्षक संगठनों की नेतागिरी शिक्षकों की समस्याओं के समाधान तक है, लेकिन हैरत की बात है कि बड़ी संख्या में शिक्षक संगठनों और उनकी नेताओं की सक्रियता के बावजूद भी शिक्षा भवन में शिक्षकों से जुड़ी फाइलों का निराकरण नहीं हो पा रहा है . शिक्षक संगठनों के नेता शिक्षा विभाग के अधिकारियों से लगातार शिक्षकों की समस्याओं के समाधान की बातें करते हैं और शिक्षा विभाग के अधिकारी नियमित रूप से उन्हें आश्वासन भी देते हैं कि समस्या का निराकरण किया जा रहा है. इसके बावजूद समस्या का निराकरण नहीं हो रहा है .
सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जब शिक्षा विभाग के अधिकारी नियमित रूप से आश्वासन दे रहे हैं कि समस्याओं का समाधान करेंगे तो फिर वह क्यों नहीं कर रहे हैं ? इस सवाल का जवाब शिक्षक संगठन के नेता नहीं मांगते हैं ? और अधिकारी देना उचित भी नहीं समझते हैं . इसके बावजूद शिक्षकों को वेतन न मिलना हैरत में डालने वाला है.शिक्षा विभाग के सिस्टम में यह कमी कहां से आ रही है. इसे बताने के लिए भी शिक्षा विभाग के अधिकारी तैयार नहीं है . पिछले माह राज्य सरकार की ओर से यह आदेश जारी किए गए थे कि होली पर्व के पूर्व सभी शिक्षकों का वेतन भुगतान सुनिश्चित किया जाना चाहिए लेकिन हैरत की बात है कि इस शासनादेश का अमल लखनऊ के सभी शिक्षकों के लिए नहीं हो पाया. कई विद्यालयों के शिक्षकों को वेतन ही नहीं मिला .उन्होंने बिना वेतन के ही होली मनायी.
बिना वेतन घर कैसे चलेगा -फीस, किराया , दवा और गृहस्थी
आप सहज अंदाजा लगा सकते हैं कि जब एक शिक्षक को वेतन न मिले तो होली तो दूर घर के सामान्य खर्च कैसे चल रहा होगा ? एक शिक्षक पिता अपने बेटे- बेटी की फीस कहां से जमा करेगा? एक शिक्षक पुत्र अपने माता-पिता की सेवा के लिए जरूरी दवाएं कहां से लेगा ? और अगर किराए पर रहता है तो किराया कहां से देगा ? घर चलाने के लिए राशन जैसी जरूरी सुविधाएं भी कहां से जुटाएगा ? लेकिन यह लखनऊ में हो रहा है . माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को समय से वेतन नहीं मिलता , उनके प्रमोशन से जुड़े मामले सालों साल लंबित रहते हैं . अगर शिक्षकों की बात करें तो उनका भी दर्द यही है उनकी दौड़ भाग कहां तक और कब तक जारी रहेगी . उनके प्रमोशन और उनके वेतन से जुड़े मामले हल होने चाहिए
लेकिन ताजुब है कि शिक्षा विभाग के अधिकारी इस मुद्दे पर शिक्षकों के हित में कोई फैसला करें वे तो सिर्फ आश्वासन देते हैं और उन आश्वासनों के सहारे न तो शिक्षक का घर परिवार चलता है और होली जैसा पर्व मनाना संभव हो पता है . हालत यह हो गई है कि शिक्षक संगठनों के दर्जनों ज्ञापन शिक्षा विभाग के अधिकारियों के टेबल पर रखें हैं , उनकी फाइलें रखी हैं लेकिन उनकी तरफ देखने उन्हें निराकरण करने की प्रवृत्ति नहीं दिखती . शिक्षा विभाग के अधिकारी और दर्जन भर शिक्षक संगठन के नेताओं के सहारे शिक्षक इंतजार कर रहे हैं कि उनके मामलों का समाधान हो और शिक्षा विभाग के अधिकारी शिक्षक संगठनों को आश्वासन दे रहे हैं कि शिक्षकों की समस्याओं का तत्काल निराकरण होगा . अब देखना यह है कि शिक्षकों को समय से वेतन भुगतान, प्रमोशन और वेतनमान की सुविधा उनके हक और अधिकार कब तक मिल पायेंगे ?
