लखनऊ, 03 मार्च प्रदेश के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह के मार्गदर्शन में उ० प्र० राजकीय अभिलेखागार (State Archives, U.P.) में चल रही भारत में जनगणना का डाक इतिहास प्रदर्शनी के चतुर्थ दिन 27 फरवरी 2026 को पूर्वाह्न 10:30 बजे उ० प्र० राजकीय अभिलेखागार ,शशि भूषण बालिका डिग्री कालेज, लखनऊ तथा करामत हुसैन मुस्लिम गर्ल्स पी०जी० कालेज के संयुक्त तत्वावधान में ‘मौलिक शोध में अभिलेखागार की भूमिका’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
State Archives, U.P.: संगोष्ठी के मुख्य अतिथि एवं वक्ता प्रो० एस० एन० कपूर, पूर्व विभागाध्यक्ष, प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ तथा संगोष्ठी की अध्यक्षता प्रो० प्रमोद कुमार श्रीवास्तव, पूर्व विभागाध्यक्ष, पाश्चात्य इतिहास विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ द्वारा की गयी।

प्रो० एस० एन० कपूर ने अपने वक्तव्य में बताया कि साहित्य संस्कृति की प्रयोगशाला है। उ० प्र० राजकीय अभिलेखागार में संरक्षित 1857 कान्ति से संबंधित अभिलेखों के विषय में अनेक शोध कार्य किए जाने चाहिए, जिससे नये तथ्यों की जानकारी प्राप्त हो सकेगी।
प्रो० पंकज सिंह, प्राचार्य,सी०जी०एन० पी०जी० कालेज, गोला, लखीमपुर खीरी ने बताया कि लखीमपुर खीरी के गुमनाम कान्तिकारियों का जिक्र किया और बच्चों से लखीमपुर खीरी के इतिहास और स्वतंत्रता आन्दोलन में योगदान विषय पर शोध कार्य किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। प्रो० सुमन मिश्रा, राजनीति विज्ञान विभाग, नारी शिक्षा निकेतन गर्ल्स पी०जी० कालेज, लखनऊ ने क्वीन्सलैण्ड, आस्ट्रेलिया तथा उत्तर प्रदेश विधान सभा के तुलनात्मक अध्ययन से संबंधित अपने शोध कार्य की जानकारी प्रदान की, जो प्राथमिक श्रोत पर आधारित है।

प्रो० दीपक कुमार सिंह, डी०ए०वी० पी०जी० कालेज, लखनऊ ने कहा कि शोधार्थियों को गुणवत्तायुक्त शोध कार्य के लिए अभिलेखागार अवश्य आना चाहिए और शोधार्थियों को प्राथमिक श्रोतों पर उपलब्ध अभिलेखों का विश्लेषण कर वास्तविकता को अपने शोध में लाना चाहिए।
डॉ० रितु तिवारी, असिस्टेंट प्रोफेसर, राजनीति विज्ञान विभाग,करामत हुसैन मुस्लिम गर्ल्स पी०जी० कालेज, लखनऊ ने अपने वक्तव्य में कहा कि अभिलेखागार सभ्यता और ज्ञान के संवाहक हैं। डिजिटल युग में इतिहास का संकलन : अभिलेखागार की बदलती भूमिका” विषय पर व्याख्यान देते हुए वक्ता ने कहा कि वर्तमान एआई के दौर में शोध की मौलिकता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। अभिलेखागार न केवल दस्तावेज़ों के संरक्षण और प्रमाणीकरण की जिम्मेदारी निभा रहे हैं, बल्कि डिजिटाइजेशन और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से उन्हें अधिक सुलभ और विश्वसनीय भी बना रहे हैं। इस परिवर्तित परिदृश्य में अभिलेखागार की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

प्रो० अमिता डेविड, इतिहास विभाग, आई०टी० कालेज, लखनऊ ने कहा कि अभिलेखागार सांस्कृतिक, ऐतिहासिक एवं वैज्ञानिक ज्ञान के महत्वपूर्ण संरक्षक के रूप में कार्य करते हैं, जो मूर्त और अमूर्त विरासत को एकत्रित, संरक्षित, अनुकमित और सुलभ बनाते हैं. जिससे समाज अपने अतीत को समझ सके और अपने भविष्य को संवार सके।
प्रो० मोनिका श्रीवास्तव, ए०पी०सेन गर्ल्स पी०जी० कालेज ने अपने उद्बोधन में कहा कि इतिहास में भी मौलिक शोध सम्भव है। व्याख्या विश्लेषण और नवीन समझ के आधार पर नवीन तथ्यों को अपने शोध में लाने का प्रयास करना चाहिए। डॉ० प्रेम कुमार, नर्वदेश्वर लॉ कालेज, लखनऊ ने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के विषय में किए गये शोध कार्य में यूरोपियन अभिलेखागार में रखी एनी फेंक की डायरी, जो 624 पृष्ठ की है, के द्वारा महत्वपूर्ण साक्ष्य शोधार्थियों को उपलब्ध होता है। इस डायरी के आधार पर एक डाक्यूमेन्ट्री (Shoah) भी तैयार की गयी, जो 9:30 घण्टे की है। उक्त डाक्यूमेन्ट्री को यूनेस्को ने अन्तर्राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया है।

उक्त संगोष्ठी में शशि भूषण बालिका डिग्री कालेज, लखनऊ , करामत हुसैन गर्ल्स पी०जी० कालेज सहित विभिन्न विद्यालयों के लगभग 300 छात्र/छात्राओं ने प्रतिभाग किया। सफल राष्ट्रीय संगोष्ठी के संयोजक डाॅ.सौरभ कुमार मिश्र, असिस्टेंट प्रोफेसर, शशिभूषण बालिका विद्यालय डिग्री कॉलेज.लखनऊ रहें और कार्यक्रम का कुशल संचालन डाॅ. अंशुल सिंह द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अन्त में अमित कुमार अग्निहोत्री, निदेशक,उ. प्र. राज्य अभिलेखागार द्वारा सभी का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया गया।
