- कार्यपरिषद में हुआ फैसला।
लखनऊ, 19 मई , लखनऊ विश्वविद्यालय के प्राणीशास्त्र (Zoology) विभाग के शिक्षक डॉ. परमजीत सिंह से जुड़े गंभीर प्रकरण में विश्वविद्यालय प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की है। आज दिनांक 19 मई, 2026 को कुलपति प्रोफेसर जे.पी. सैनी की अध्यक्षता में आयोजित कार्यपरिषद (Executive Council) की आपातकालीन बैठक में 3-सदस्यीय उच्चस्तरीय अनुशासन समिति की अंतरिम रिपोर्ट प्रस्तुत की गई।
कार्यपरिषद ने रिपोर्ट के निष्कर्षों को अत्यंत गंभीर मानते हुए आरोपी शिक्षक डॉ. परमजीत सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने की संस्तुति पर अपनी आधिकारिक मुहर लगा दी है।
अनुशासन समिति की अंतरिम रिपोर्ट एवं चार प्रमुख गंभीर आरोप
कुलपति प्रो. जे.पी. सैनी की अध्यक्षता में गठित उच्चस्तरीय अनुशासन समिति ने वायरल ऑडियो क्लिप्स की प्रामाणिकता, लिखित व मौखिक शिकायतों तथा आईसीसी (ICC) द्वारा जुटाए गए तथ्यों का गहन परीक्षण किया।
समिति ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि शिक्षक के विरुद्ध निम्न आरोप प्रथम दृष्ट्या (Prima Facie) बनते पाए गए हैं।
- आरोप (1) – परीक्षा प्रश्न-पत्र लीक करने का प्रलोभन देकर छात्रा के यौन शोषण का प्रयास एवं शिक्षक आचरण नियमावली का उल्लंघन” ।
- आरोप (2) – गोपनीय परीक्षा सूचना (प्रश्न-पत्र लीक) साझा करने की बात करना एवं आई०सी०सी० के समक्ष इसकी आधिकारिक स्वीकारोक्ति” ।
- आरोप (3) अनैतिक एवं अमर्यादित कृत्य द्वारा विश्वविद्यालय की साख, सामाजिक प्रतिष्ठा एवं अकादमिक निष्ठा को गंभीर क्षति” ।
- आरोप (4) “विशाखा गाइडलाइंस एवं यूजीसी विनियम 2015 के अंतर्गत कार्यस्थल पर गंभीर यौन व मानसिक उत्पीड़न और अशोभनीय कदाचार” ।
इस कठोर निर्णय पर मुहर लगाते हुए कार्यपरिषद ने कहा:
“हमारा उद्देश्य केवल तात्कालिक कार्रवाई करना नहीं, बल्कि परिसर में एक ऐसा सुरक्षित माहौल देना है जहां हमारी बेटियां पूरी तरह निडर होकर शिक्षा ग्रहण कर सकें।
अनुशासन समिति की अंतरिम रिपोर्ट में शिक्षक का आचरण शिक्षक की गरिमा के प्रतिकूल पाया गया है।
इसी आधार पर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।
कानून और संस्थागत नियम अपनी पूरी शक्ति से काम कर रहे हैं।
इस त्वरित कार्रवाई से हम यह संदेश स्पष्ट करना चाहते हैं कि पद या प्रभाव चाहे जो भी हो, छात्राओं की गरिमा और परीक्षा की शुचिता से खिलवाड़ करने नहीं दिया जाएगा ।*”
आगामी विधिक प्रक्रिया, जवाबदेही एवं 15 दिन की समय-सीमा:
कार्यपरिषद के निर्णय के अनुसार, अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर तत्काल निलंबन की कार्रवाई के साथ ही आरोपी शिक्षक के खिलाफ एक आरोप-पत्र भी स्वीकृत कर निर्गत कर दिया गया है।
इस आदेश के तहत निलंबित शिक्षक डॉ. परमजीत सिंह को आरोप-पत्र निर्गत होने की तिथि से 15 दिनों के भीतर अपना लिखित स्पष्टीकरण, सफाई और प्रतिवाद साक्ष्यों के साथ अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करना होगा।
आरोपी शिक्षक को अपना यह स्पष्टीकरण कुलसचिव के माध्यम से जांच समिति के अध्यक्ष को संबोधित करते हुए जमा करना होगा। यदि वे इस निर्धारित 15 दिनों की समय-सीमा के भीतर अपना संतोषजनक उत्तर प्रस्तुत करने में विफल रहते हैं,
तो विश्वविद्यालय प्रशासन इसे उनकी मूक स्वीकारोक्ति मानते हुए नियमानुसार उनकी सेवा-समाप्ति जैसी कठोरतम दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने हेतु पूर्णतः स्वतंत्र होगा। लखनऊ विश्वविद्यालय द्वारा रिकॉर्ड समय में की गई यह पारदर्शी कार्रवाई यह स्पष्ट करती है कि विश्वविद्यालय परिसर में महिला सुरक्षा और अकादमिक शुचिता के साथ कोई भी समझौता नहीं किया जाएगा।
