लखनऊ, 06 मई , डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं को आईआईटी रुड़की के साथ अब वर्चुअल लैब्स के माध्यम से ऑनलाइन प्रायोगिक (प्रैक्टिकल) करने की सुविधा मिलेगी। विश्वविद्यालय को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की की ओर से वर्चुअल लैब्स नोडल सेंटर के रूप में स्वीकृति प्रदान की गई है। यह मान्यता 31 दिसंबर 2026 तक प्रभावी रहेगी। इसके संचालन और समन्वय के लिए विवि की डॉ. विनोदिनी कटियार को नोडल कोऑर्डिनेटर बनाया गया है।
वर्चुअल लैब्स में आईआईटी रुड़की के सॉफ्टवेयर का उपयोग कर उच्च गुणवत्ता वाली तकनीकी शिक्षा उपलब्ध हो सकेगी और छात्र कहीं से भी प्रयोग कर अपनी समझ को मजबूत कर सकेंगे। आईआईटी रुड़की की ओर से जारी पत्र के अनुसार विश्वविद्यालय को आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर (कंप्यूटर और इंटरनेट सुविधा सहित) स्वयं उपलब्ध कराना होगा। प्रत्येक सेमेस्टर में कम से कम एक वर्कशॉप आयोजित करना अनिवार्य होगा और छात्रों से इस सुविधा के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा।
इसके अलावा नोडल कोऑर्डिनेटर को समय-समय पर आईआईटी रुड़की में आयोजित बैठकों में भाग लेना होगा और वर्चुअल लैब्स के उपयोग और फीडबैक की रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। निर्धारित मानकों और साइबर सुरक्षा नियमों का पालन करना भी अनिवार्य रहेगा। वर्चुअल लैब्स के प्रिंसिपल इंस्टीट्यूट कोऑर्डिनेटर व आईआईटी रुड़की के इलेक्ट्रिकल इंजी. विभाग के प्रोफेसर आरएस आनंद ने पत्र जारी कर यह जानकारी दी है।
कुलपति का पक्ष
“वर्चुअल लैब्स नोडल सेंटर बनने से छात्रों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण प्रायोगिक शिक्षा मिलेगी। विशेष रूप से दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए यह पहल सीखने की प्रक्रिया को और अधिक सुलभ और प्रभावी बनाएगी। विश्वविद्यालय भविष्य में भी ऐसी नवाचार आधारित पहल को बढ़ावा देता रहेगा।”
-कुलपति आचार्य संजय सिंह, डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय
