लखनऊ , 18 अप्रेल , बप्पा श्री नारायण वोकेशनल पीo जीo कॉलेज, लखनऊ के संस्कृत विभाग द्वारा एक दिवसीय राष्ट्रीय संवाद/सङ्गोष्ठी का आयोजन महाविद्यालय परिसर में किया गया। कार्यक्रम का मुख्य विषय “वर्तमान संदर्भ में संस्कृत की प्रासंगिकता” था जिसमें विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं विद्वानों की सक्रिय सहभागिता देखने को मिली।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में राजस्थान से पधारे सुप्रसिद्ध विद्वान एवं कई विश्वविद्यालयों के कुलपति रह चुके प्रोफ़ेसर (डॉo) डी.पी. तिवारी जी रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर संजय मिश्र ने की। मुख्य अतिथि का स्वागत एवं सम्मान महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. संजय मिश्र द्वारा अंगवस्त्र एवं स्मृति चिह्न प्रदान कर किया।
अपने मुख्य उद्बोधन में डॉ. डी.पी. तिवारी ने संस्कृत भाषा की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संस्कृत न केवल एक प्राचीन भाषा हैं बल्कि भारतीय संस्कृति, ज्ञान-विज्ञान एवं नैतिक मूल्यों की आधारशिला है।
उन्होंने विद्यार्थियों को संस्कृत के अध्ययन के लिए प्रेरित करते हुए बताया कि वर्तमान समय में भी इसकी उपयोगिता अत्यंत व्यापक है, विशेषकर शोध, दर्शन और तकनीकी क्षेत्रों में। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि संस्कृत के माध्यम से हम अपने गौरवशाली अतीत को समझ सकते हैं और भविष्य को सुदृढ़ बना सकते हैं। उन्होंने भगवद्गीता के श्लोकों के माध्यम से जीवन में अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने का संदेश दिया।
संस्कृत विभाग के आचार्य (डॉ.) अशोक दुबे (कार्यक्रम संयोजक) ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया तथा प्रभारी आचार्या (डॉo) अनीता ओझा ने अपने वक्तव्य में संस्कृत के शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित किया तथा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर महाविद्यालय के वरिष्ठ आचार्यगण प्रोफेसर जेपी सिंह, प्रोफेसर गुंजन पांडेय, प्रोफेसर अनिल कुमार पांडेय प्रोफेसर डीके गुप्ता, डॉo स्नेह प्रताप सिंह,डॉo मञ्जुल त्रिवेदी, डॉo नीतू राय डॉo शुभ्रा त्रिपाठी डॉo ऋचा पांडेय डॉoविजय कुमार डॉo के सी चौरसिया इत्यादि उपस्थित रहे। साथ ही में संस्कृत विभाग द्वारा निबंध / पोस्टर प्रतियोगिता विषय संस्कृत भाषा महत्व एवं विद्या / अयोध्या और पर्यावरण पर छात्र छात्रों ने बढ़ चढ़कर प्रतिभा किया। इस प्रकार यह एकदिवसीय राष्ट्रीय संवाद/संगोष्ठी विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक सिद्ध हुई।
