- विजय कुमार सिंह
संरक्षक
उ 0प्र0 माध्यमिक शिक्षक संघ
23 अक्टूबर को विधान परिषद के 06 शिक्षक निर्वाचन तथा 05 स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में विधान परिषद का चुनाव होने जा रहा है।संप्रति यह चुनाव उ प्र माध्यमिक शिक्षक संघ के अस्तित्व से जुड़ा हुआ है।जब शिक्षक संगठन का निर्माण हुआ तो विधान परिषद के 09 शिक्षक तथा 09 स्नातक विधान परिषद सदस्य उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ पाण्डेय गुट थे, जबकि वर्तमान में केवल एक शिक्षक एम एल सी कानपुर -उन्नाव राज बहादुर सिंह चंदेल हैं, शेष राजनैतिक दल भाजपा और सपा के हैं। वर्तमान 2026 में शर्मा गुट का भाजपा में विलय सा हो गया है ।वास्तव में शर्मा गुट प्रारम्भ से ही (1972 में संगठन के विघटन से ही सत्ता परस्त है )
आइये हम उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ की स्थापना वर्ष 1956 में हमारे शिखर पुरुषों पंडित विद्या सागर दीक्षित मेरठ , हरिहर पांडे वाराणसी ,हृदयनारायण सिंह जौनपुर ,कन्हैया लाल गुप्ता अलीगढ़ ,महेश्वर पांडेय लखनऊ ने अपने संघर्षों और त्याग के परिणाम स्वरूप सेवासुरक्षा 1959 ,वेतन वितरण अधिनियम 1971 ,पेंशन जैसी महत्त्वपूर्ण उपलब्धियां प्राप्त हुई। 1968–69 के जेल भरो आंदोलन में जब प्रदेश के हजारों हज़ारों शिक्षकों ने जेल को भर दिया। सरकार को विवश होकर सरकार को उ0प्र0मा0 शिक्षक संघ पाण्डेय गुट से समझौता करना पड़ा।
समझौते में सरकार ने सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय शिक्षकों को राजकीय विद्यालय के शिक्षकों के बराबर मंहगाई भत्ता तथा वेतन का बैंक से भुगतान करने पर सहमत हुई ,महंगाई भत्ता तो मिल गया किंतु बैंक से वेतन देने पर सरकार मुकरने लगी। तब उत्तर प्रदेश माध्यमिक संघ की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक संगठन के केंद्रीय कार्यालय 40 विधान सभा मार्ग पर हुई जिसमें ये निर्णय लिया गया कि होने वाले विधान सभा चुनाव में तत्कालीन मुख्यमंत्री को हराया जाएगा . तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिभुवन नारायण सिंह गोरखपुर के मनी राम विधान सभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे थे। संगठन ने कार्यसमिति के सदस्यों को उनके क्षेत्र में उनके विरुद्ध मत मांगने के लिए दायित्व दिया गया,फलतः त्रिभुवन नारायण सिंह चुनाव हार गए,तत्पश्चात कमलापति त्रिपाठी मुख्यमंत्री हुए. उन्होंने मार्च 1971 में वेतन वितरण अधिनियम लागू करके वेतन कोषागार से देने का आदेश सरकार को दिये। शिक्षकों के संघर्ष एवं बलिदान के परिणाम स्वरूप प्रदेश के शिक्षकों को बैंक से वेतन मिलने लगा,जब इसके बाद हेमवंती नन्दन बहुगुणा मुख्यमंत्री हुए तो उन्होंने कहा कि यह तो अत्यंत ही सशक्त संगठन हैं, जो किसी भी मुख्यमंत्री को हरा सकता है।उस समय के माननीय मुख्यमंत्री जी ने डिवाइड एंड रूल का फॉर्मूला लगाते हुए उन्होंने ओम प्रकाश शर्मा को बुलाकर कहा कि कब तक इन बूढ़ों के पीछे रहोगे।
अलग संगठन बनाओ सरकार आपको सारी सुविधाएं देगी
1972 में प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव था ओम प्रकाश शर्मा ने बिना निर्वाचन के अपने आप को प्रदेश अध्यक्ष घोषित करते हुए संगठन का बंटवारा कर के शर्मा गुट बना लिया। उ0प्र0मा0 शिक्षक संघ पाण्डेय गुट एक शक्तिशाली संगठन जिसने हमें सेवा सुरक्षा ,वेतन वितरण अधिनियम तथा पेंशन दिलवाया,वह संगठन कुछ पल लोलुप व्यक्तियों के कारण दो भागों में विभाजित हो गया।शर्मा गुट और पांडे गुट , एक के प्रदेश अध्यक्ष महेश्वर पाण्डेय जी और शमां गुट के ओम प्रकाश प्रदेश अध्यक्ष हुए।उसके बाद भी दोनों संगठनों के अलग अलग कार्यक्रमों से पेंशन का भुगतान कोषागार से प्रबंधकों का नियुक्ति का अधिकार छीनकर उ प्र माध्यमिक शिक्षक सेवा आयोग का गठन आदि प्राप्त किया।
वर्ष 1995 में पंचम वेतनमान जो 01–01–1996 से प्रभावी होने वाला था ,के संदर्भ में तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह वर्ष 2000 में मुख्यमंत्री आवास पर एक शिक्षक पंचायत बुलाया जिसमें प्रदेश के सभी संगठनों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया था सौभाग्य से मुझे भी उस पंचायत में भाग्य लेने का अवसर मिला था ।प्रतिनिधियों के पंजीकरण के पश्चात विशाल सभा कक्ष में नाश्ता के बाद पंचायत प्रारंभ हुआ ,महेश्वर पांडे दिवंगत हो गए थे ओम प्रकाश शर्मा ही ततसमय वरिष्ठ थे के अध्यक्षता में पंचायत प्रारंभ हुई ।सभी संगठनों के प्रतिनिधियों ने एक स्वर से उसी क्षण पंचम वेतन मान दिए जाने की घोषणा किए । मुख्यमंत्री जी ने छह माह का समय दिए जाने का अनुरोध किया इसका विरोध सभी प्रतिनिधियों ने किया तब ओम प्रकाश शर्मा ने कहा जब मुख्यमंत्री जी छह माह का समय मांग रहे हैं तो उन्हें दिया जाना उचित है ।यह किसी को नहीं मालूम था कि सरकार तथा शर्मा जी का गुप्त समझौता पहले ही हो चुका है कि आप छह माह का समय दिलवा दीजिए तथा हम आपको विधान परिषद का कार्यकारी अध्यक्ष बना देते हैं।अन्ततः यही हुआ शर्मा जी विधान परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष हो गए जिसका खामियाजा प्रदेश के अध्यापकों को भुगतना पड़ा।
पंचम वेतन मान जो 01–01–1996 से लागू होना चाहिए था वह दिसंबर 2001 से लागू हुआ इससे इस बीच के सेवानिवृत अध्यापक पंचम वेतन मान से वंचित हो गए आजीवन पेंशन में भी इसका घाटा उठाना पड़ा ।सत्ता परस्त होते हुए भी शर्मा जी मुखौटा लगाए हुए थे, जो उनके न रहने पर शर्मा गुट छिन्न भिन्न हो गया।उनके सभी एम एल सी एवं प्रदेश पदाधिकारी सत्ता की मलाई खाने के लिए भाजपा के गोद में बैठ गए। वहीं भाजपा जो हमारे बुढ़ापे की लाठी छीन ली ,नियमित नियुक्ति के स्थान पर अंशकालिक नियुक्ति एवं तदर्थ शिक्षकों की सेवा समाप्ति, 2023 के उ0प्र0शिक्षा सेवा चयन आयोग में पूर्व चयन आयोग 1982 के धारा –12,18 तथा 21 निरषित करके हमें प्रबन्धकों के दया का मोहताज कर दिया गया. विधान परिषद में जब यह कानून पास हो रहा था एक वर्तमान शिक्षक सदन में थे जब इसपर उन्होंने कुछ नहीं बोला तब सभापति महोदय ने पूछा कि आप शिक्षक एम एल सी है धारा 12,18 तथा 21 पर कुछ नहीं कहना है तब उन्होंने कह की इससे हमें कोई मतलब नहीं है हमें बनने वाले शिक्षा चयन आयोग में आरक्षण के हिसाब से हमें भागीदारी चाहिए ।
सब शिक्षक अच्छी तरह से जानते हैं प्रमोद मिश्रा जो कल तक भाजपा की शिकायत करते थे ,भाजपा से टिकट मिलते ही उसका यशोगान करने लगे।एक प्रत्याशी चेतनारायण सिंह ने जिन्हें 2008 में पांडेय गुट में टिकट देकर विजयी बनाया था . चुनाव जीतते ही माध्यमिक शिक्षक संघ का चौथा विघटन कर दिए उन्हें सेवानिवृत हुए भी वर्षों बीत गए, वे अपना लोभ संभरण नहीं कर पा रहे हैं।
उ प्र माध्यमिक शिक्षक संघ पाण्डेय गुट जो मूल संगठन है . संगठन प्रत्याशी डॉ जितेंद्र कुमार सिंह पटेल जो शिक्षक हितों के प्रति समर्पित रह कर आपके समस्याओं के लिए संघर्ष करते हैं जिन्हें 2023 में हमने अपना प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में आशीष कुमार सिंह प्रदेश महामंत्री प्रत्याशी लखनऊ शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र , पंकज कुमार सिंह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र,डॉ भोज कुमार शर्मा प्रत्याशी आगरा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र, हरि सिंह ढीलो प्रत्याशी बरेली मुरादाबाद तथा मेरठ शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से चंद्र शर्मा को समर्थन दिया है. इनके अतिरिक्त सुशील कुमार सिंह को प्रत्याशी वाराणसी स्नातक क्षेत्र बनाया गया। हमारे सभी प्रत्याशी युवा संघर्षशील प्रत्याशी है जिन्हें आप अपना प्रथम वरीयता का मत देकर विजयी बनवाएं ताकि शिक्षक समस्याओं का समाधान हो सके।
(*लेखक के अपने विचार हैं )
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