- डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के मानवतावादी दर्शन पर किया महत्वपूर्ण शोध
रायपुर, 27 जून , बिलासपुर निवासी एवं गजानन राठोड़ की धर्मपत्नी श्रीमती श्रावंती श्रीराम चव्हाण ने मात्र 28 वर्ष की आयु में दर्शनशास्त्र विषय में पीएच.डी. (डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी) की उपाधि प्राप्त कर एक उल्लेखनीय शैक्षणिक उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने स्वामी रामानंद तीर्थ मराठवाड़ा विश्वविद्यालय, नांदेड़ ( Swami Ramanand Teerth Marathwada University Nanded ) से “डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का मानवतावादी दर्शन : एक समीक्षात्मक अध्ययन” विषय पर अपना शोधकार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किया।
अपने शोध में श्रावंती चव्हाण ने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के मानवतावादी चिंतन, सामाजिक समता, स्वतंत्रता, बंधुत्व तथा सामाजिक न्याय के सिद्धांतों का गहन एवं विश्लेषणात्मक अध्ययन किया है। शोध में यह प्रतिपादित किया गया है कि डॉ. आंबेडकर का मानवतावादी दर्शन आज भी सामाजिक समरसता, समान अवसर तथा मानव गरिमा की स्थापना के लिए अत्यंत प्रासंगिक है। साथ ही उनके विचार वर्तमान समाज में व्याप्त भेदभाव, असमानता और सामाजिक विषमताओं को दूर करने की दिशा में मार्गदर्शक सिद्ध हो सकते हैं।

Swami Ramanand Teerth Marathwada University Nanded : इस शोधकार्य का मार्गदर्शन शारदा महाविद्यालय, परभणी की दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष एवं शोध-निर्देशक डॉ. स्वाती नागोराव कुलकर्णी ने किया। शोध प्रबंध का मूल्यांकन अहमदनगर के प्रख्यात शिक्षाविद् एवं बाह्य परीक्षक प्रो. डॉ. अमन बगाडे द्वारा किया गया। वहीं पीएच.डी. की मौखिक परीक्षा एवं मूल्यांकन प्रक्रिया स्वामी रामानंद तीर्थ मराठवाड़ा विश्वविद्यालय ( Swami Ramanand Teerth Marathwada University Nanded ) के सामाजिक विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता (डीन) डॉ. प्रमोद लोणगकर की अध्यक्षता में संपन्न हुई।
श्रावंती चव्हाण की यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष मानी जा रही है क्योंकि उन्होंने कम आयु में ही उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में महत्वपूर्ण मुकाम हासिल किया है। उनकी इस सफलता से न केवल उनके परिवार बल्कि गंगाखेड़ क्षेत्र, शिक्षण संस्थानों और समाज में भी हर्ष का वातावरण है।
इस उपलब्धि पर ऑल इंडिया पीएनबी पेंशनर्स एसोसिएशन के चेयरमैन ललित अग्रवाल,
गजानन राठोड़, परिवारजनों, मित्रों, शिक्षकों तथा विभिन्न सामाजिक एवं शैक्षणिक क्षेत्रों के गणमान्य व्यक्तियों ने उन्हें हार्दिक बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं। उनकी सफलता युवा पीढ़ी, विशेषकर छात्राओं और शोधार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।
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