- बात किसी पार्टी, किसी नेता की आलोचना नहीं है , बात मलिहाबाद विधानसभा क्षेत्र की विकास की है , जिसकी जरूरत भी है
- भावी विधायक बनने की लाइन में खड़े लोग किस तरह से अपने उत्तरदायित्व का निर्वहन करते हैं या फिर हम सिर्फ एक मतदाता के रूप में उन्हें वोट देकर अपने कर्तव्य की इति श्री कर लेते हैं.
मलिहाबाद . दुनिया भर में अपने दशहरी आम की मिठास के लिए मशहूर मैंगो बेल्ट के रूप में स्थापित मलिहाबाद क्षेत्र ( Malihabad Assembly constituency ) विकास का रास्ता तय करने में सफल नहीं हो पा रहा है . आजादी के सात दशक बीतने के बाद भी मलिहाबाद क्षेत्र में विकास के पहिये थम से गए हैं , या यूं कहें विकास के काम ठीक प्रकार से शुरू ही नहीं हो पाए हैं . (Malihabad Assembly Election 2027)
मलिहाबाद विधानसभा क्षेत्र ( Malihabad Assembly constituency ) में चुनावी गतिविधियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं .मलिहाबाद चौराहे से लेकर माल , रहीमाबाद, गह्दों , मोहान रोड क्षेत्र के प्रमुख स्थानों पर लगे होर्डिंग्स भावी उम्मीदवारों के नाम को दर्शा रहे हैं, लेकिन उनकी प्राथमिकताएं इन होर्डिंग्स से गायब है . होर्डिंग्स खुद को बड़ा नेता, जन हितैषी, अपनी पार्टी का सिपाही और आपका शुभचिंतक जैसे नारों से सजे हुए हैं , लेकिन इन्हें देख कर जेहन में यह बात जरूरआती है यदि मलिहाबाद विधानसभा क्षेत्र में इतने ही जनहित वाले नेता रहे हैं या हैं तो फिर विकास की धारा रफ्तार क्यों नहीं पकड़ पा रही है?
Malihabad Assembly Election 2027 : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से मात्र 30- 35 किलोमीटर पर बसे मलिहाबाद विधानसभा क्षेत्र( Malihabad Assembly constituency ) में आखिर विकास क्या हुआ है ? सामान्य तौर पर हर विधानसभा क्षेत्र में छोटी-मोटी सड़कें , नाली , खड़ंजा, प्राइमरी विद्यालय, सांसद और विधायक निधि से लगने वाली सोलर लाइट लग ही जाती है .ये रूटीन कार्य होते हैं. विकास की बात तो तब आती है जब स्थानीय लोगों को रोजगार के लिए बड़े उद्योग और बच्चों की बेहतर पढ़ाई के लिए अच्छे शिक्षण संस्थान, सर्व सुलभ सस्ती चिकिसा सुविधा और चलने के लिए सही सड़क , बिजली की निर्वाधआपूर्ति ही विकास के पैमाने को थोड़ा – बहुत तय करते हैं .
मलिहाबाद मैंगों बेल्ट ( Malihabad Assembly constituency ) के नाम से मशहूर है .लेकिन खाद्य प्रसंस्करण या फिर आम उत्पादों पर आधारित उद्योगों की जरूरत होते हुए भी यहां पर उनकी स्थापना क्यों नहीं हो पाई है ? यह सवाल हर उस शख्स के जेहन में है जो रोजगार के लिए दर भटकते हैं . हालांकि मलिहाबाद विधानसभा क्षेत्र के बड़ी संख्या में युवा राजधानी होने के कारण रोजगार के लिए ज्यादा परेशान नहीं होते हैं लेकिन फिर भी मलिहाबाद विधानसभा क्षेत्र में आने वाले कई गांव के सैकड़ो युवा पंजाब जैसे राज्यों में काम करने के लिए मजबूर हैं . यह वहां खेती किसानी तो करते ही हैं विभिन्न प्रकार के उद्योगों में भी काम करते हैं अगर इन्हें यहां रोजगार उपलब्ध होता उनकी स्किल को और निखारा जाता तो संभवत वह अपने गांव शहर में ही काम करते .
आजादी से अब तक कांग्रेस पार्टी का लंबे समय तक न केवल प्रदेश में शासन रहा बल्कि मलिहाबादविधानसभा ( Malihabad Assembly constituency ) कांग्रेस के विधायक चुने जाते रहे हैं . इसके बाद जनता दल , समाजवादी पार्टी, निर्दलीय और भारतीय जनता पार्टी के विधायक भी इस क्षेत्र के समय-समय पर प्रतिनिधित्व कर चुके हैं . विधानसभा 2027 के चुनाव (Malihabad Assembly Election 2027) को लेकर के सरगर्मी तेज हो गई है . भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी , कांग्रेस सहित सभी दल के उम्मीदवार अपने-अपने टिकट के लिए जुट गए हैं और क्षेत्र में भी दिखाई ही देने लगे हैं .
बाजारों और नुक्कड़ों पर कभी-कभी चेहरे दिख जाते हैं जिन्हें चुनाव लड़ना है और वे चेहरे भी दिख जाते हैं जो इन भावी उम्मीदवारों को जननेता बताते हुए वोट मांगने के लिए तैयार रहते हैं . मलिहाबाद विधानसभा क्षेत्र ( Malihabad Assembly constituency ) की राजनीतिक सरगर्मियों के बीच विकास का सबसे बड़ा मुद्दा है . हालांकि हाल ही में मलिहाबाद विधानसभा क्षेत्र के एक हिस्से में हैंडीक्राफ्ट पार्क के नाम से एक बड़ा प्रोजेक्ट आया है, लेकिन उसे अमली जामा पहनाने तक न केवल समय लगेगा बल्कि स्थानीय लोगों को इंतजार भी करना पड़ेगा . मैंगो आम के विकास के लिए भी यहां रिसर्च इंस्टीट्यूट तो है लेकिन सवाल यह है कि यहां के लोगों को आम के बागवानी के लिए किस प्रकार और कैसा सहयोग मिलता है ? कृषि विभाग के भी संस्थान हैं लेकिन सवाल उपयोगिता का है ?
Malihabad Assembly constituency : महत्वपूर्ण बात यह है कि आम के उत्पादन को विश्व स्तरीय बनाने ,आम को निर्यात करने के लिए क्या और कैसी सुविधाओं की जरूरत है ? और क्या आजादी के सात दशक में इन सुविधाओं का विस्तार विकास और उपलब्धता उन किसानों तक हुआ है , जिन्हें दरकार है . विदेश में मलिहाबाद के दशहरी आम की मांग है और उसे आपूर्ति करने वाले लोग भी तैयार हैं, लेकिन इसमें सेतु का काम करने के लिए सरकारी एजेंसी ही पर्याप्त होती है लेकिन यहां के ऊर्जावान कुछ व्यापारी अपने स्तर से तो निर्यात करने में सक्षम है लेकिन उन किसानों और आम उत्पादकों के लिए अधिक संसाधनों की जरूरत होती है जो उनके पास उपलब्ध नहीं है ?
ऐसे में 2027 विधानसभा ( Malihabad Assembly constituency ) के चुनाव में दावों और आरोपी के बीच आम मतदाताओं को यह तय करना महत्वपूर्ण होगा कि आखिर आजादी के सात दशक बाद भी आज सड़क चौड़ीकरण की मांग के लिए क्यों मजबूर हैं ? बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भी किस तरह के प्रयास चल रहे हैं . अभी ढांचा गत सुविधायें मलिहाबाद तक पहुंचने में इतना विलंब क्यों हो रहा है ? बात किसी पार्टी, किसी नेता की आलोचना नहीं है , बात मलिहाबाद विधानसभा क्षेत्र की विकास की है , जिसकी जरूरत भी है . अब यह देखना है महत्वपूर्ण होगा कि यहां की राजनीति करने वाले विधायक, बनने वाले , और भावी विधायक बनने की लाइन में खड़े लोग किस तरह से अपने उत्तरदायित्व का निर्वहन करते हैं या फिर हम सिर्फ एक मतदाता के रूप ( Malihabad Assembly constituency ) में उन्हें वोट देकर अपने कर्तव्य की इति श्री कर लेते हैं.
