नई दिल्ली . प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स (X) पर एक संस्कृत श्लोक साझा किया है।
श्लोक और उसका अर्थ –
श्लोक: “ज्ञानवांश्च तथा वाग्मी कर्मस्वपि च निष्ठितः। एवं युक्तोऽपि न श्रेयान् यदि शीलविवर्जितः॥”
अर्थ: मनुष्य चाहे कितना भी ज्ञानी हो, अच्छा वक्ता (वाग्मी) हो और अपने कर्मों में पूरी तरह निष्ठित (दक्ष या समर्पित) हो, फिर भी यदि वह अच्छे चरित्र या शील (नैतिकता) से रहित है, तो इन सब गुणों के होने के बावजूद वह श्रेष्ठ नहीं माना जा सकता है।
इस श्लोक के माध्यम से प्रधानमंत्री ने जीवन में ज्ञान, कर्म और वाणी के साथ-साथ उच्च चरित्र और सदाचार (शील) की अनिवार्यता पर जोर दिया है।
