लखनऊ | राजधानी लखनऊ के महिला विद्यालय डिग्री कॉलेज ( Mahila Vidyalaya Degree College Lucknow ) की संस्कृत विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर अनुपम सिंह को बैंकॉक में पांचवें ग्लोबल संस्कृत सम्मेलन में ‘अंतरराष्ट्रीय संस्कृत रत्न सम्मान’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें संस्कृत भाषा एवं वाङ्मय के संरक्षण-संवर्धन, भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा के प्रचार-प्रसार तथा दीर्घकालीन संस्कृत सेवा के लिए दिया गया।
सम्मेलन का विषय ‘संस्कृति : ब्रिजिंग कल्चर्स एंड नॉलेज ट्रेडिशन्स’ रहा। इसमें भारत समेत विभिन्न देशों के विशेषज्ञों ने भाग लिया। सम्मेलन में करीब 475 शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए।
संस्कृत ग्रंथ भारतीय ज्ञान परंपरा का आधार
अनुपम सिंह ने अपने व्याख्यान में कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा का मूल आधार संस्कृत ग्रंथ हैं। इनमें वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत, भगवद्गीता, पुराण, अर्थशास्त्र, नाट्यशास्त्र और योग दर्शन प्रमुख हैं। इन ग्रंथों में केवल धार्मिक और आध्यात्मिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि दर्शन, विज्ञान, शिक्षा, राजनीति, चिकित्सा, पर्यावरण, नैतिकता और सामाजिक जीवन से जुड़े विभिन्न आयाम भी शामिल हैं।
AI और डिजिटल तकनीक से पुनर्पाठ जरूरी
उन्होंने कहा कि वैश्वीकरण, तकनीकी विकास और नई शिक्षा नीति (NEP-2020) के दौर में इन ग्रंथों का पुनर्परीक्षण जरूरी है। आधुनिक शोध पद्धतियों, डिजिटल तकनीक और AI के माध्यम से इन ग्रंथों का पुनर्पाठ कर भारतीय ज्ञान परंपरा की वैज्ञानिकता और सार्वभौमिकता को दुनिया के सामने रखा जा सकता है।

उन्होंने अपने शोध-पत्र में संस्कृत ग्रंथों की समकालीन प्रासंगिकता, वैश्विक स्वीकार्यता और आधुनिक शिक्षा एवं अनुसंधान में उनकी उपयोगिता का विश्लेषण किया। उन्होंने कहा कि संस्कृत साहित्य केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए ज्ञान, नैतिकता और सतत विकास का आधार है।
देश-विदेश के विद्वानों की मौजूदगी में सम्मान
थाईलैंड में भारत के राजदूत पुनीत अग्रवाल, सम्मेलनाध्यक्ष पद्मश्री प्रो. डॉ. चिरापत प्रपंडविद्या और अंतरराष्ट्रीय सचिव डॉ. राजेश कुमार मिश्र समेत देश-विदेश के विशेषज्ञों के मौजूदगी में अनुपम सिंह को सम्मान प्रदान किया गया। उनकी इस उपलब्धि से महिला विद्यालय डिग्री कॉलेज के साथ लखनऊ का भी गौरव बढ़ा है।
