

लखनऊ , 31 मई ,campussamachar.com, लखनऊ विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (LUTA ) के नवनिर्वाचित अध्यक्ष डॉ अनित्य गौरव और महामंत्री प्रो. राम मिलन यादव एवं कोषाध्यक्ष डॉ दिनेश यादव सहित सभी पदाधिकारियों को हार्दिक बधाइयाँ-शुभकामनाएं मिल रही हैं .ऐसा कहने वाले टीचर्स सभी नवनिर्वाचित लुटा पदाधिकारियों से अपेक्षा कर रहे है कि पदाधिकारी विश्वविद्यालय की गरिमा के साथ ही शिक्षकों के मान सम्मान-स्वाभिमान को बनाये रखतें हुए विश्वविद्यालय के गौरव को नई ऊंचाइयां प्रदान करेंगे।
लखनऊ विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (LUTA ) के आज हुए चुनाव में अध्यक्ष पद पर डॉ अनित्य गौरव और महामंत्री पद पर प्रोफेसर राममिलन ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। इनमें प्रोफेसर डॉ अनित्य गौरव निवर्तमान LUTA कार्यसमिति में महामंत्री थे , जबकि प्रोफेसर राम मिलन LUTA कार्यसमिति में विभिन्न पदों पर लंबे अरसे तक काम कर चुके हैं .
आज के घोषित नतीजे में सब की नजरे शिक्षक संघ के अध्यक्ष और महामंत्री पद पर लगी थी , लेकिन मतदान के ठीक पहले बदले समीकरण में यह तय हो गया था कि डॉ अनित्य गौरव और राममिलन की जोड़ी ही शिक्षकों की रहनुमाई करेगी और अंततः बची खुची कसर सुबह शुरू हुए मतदान की रंगत बढ़ते ही पूरी हो गई . शिक्षक संघ के चुनाव में कथित रूप से एक लाबी कुलपति के विरोध की हवा बनाते हुए खुद को शिक्षक हितों का सबसे बड़ा हितेषी बता रही थी, जबकि खुद को हितैषी बताने वाले प्रत्याशी कभी न कभी किसी ने किसी रूप में LUTA से जुड़े रहे हैं और विश्वविद्यालय में उनका अपना भी रसूख भी है .

आज चुनाव परिणाम में निवर्तमान LUTA अध्यक्ष प्रोफेसर आरबी सिंह मून की सक्रियता ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है . शायद यह बहुत कम लोगों को जानकारी होगी कि प्रोफेसर आरबी सिंह मून लखनऊ विश्वविद्यालय में अरसे से पदस्थ हैं और उनके व्यक्तिगत रिश्ते विश्वविद्यालय के बड़ी संख्या में शिक्षकों से हैं . एक तरह से वरिष्ठ प्रोफेसर मून को अपने परिवार का ही सदस्य मानते हैं . शायद यही कारण है कि मतदान से 24 घंटे पहले सक्रिय हुए प्रोफेसर आरबी सिंह मून के प्रयास से LUTA के चुनाव परिणाम शिक्षक हितों की लड़ाई लड़ने वाले शिक्षकों के अनुकूल आए हैं .
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विश्वविद्यालय की LUTA की नई कार्य समिति विश्वविद्यालय के शिक्षकों की लंबित समस्याओं का समाधान किस प्रकार करते हैं ? शिक्षकों की वर्तमान में प्रमुख समस्याओं में वेतन विसंगति, समय से प्रमोशन, समय से नियमितीकरण , स्थायीकरण , उनके विभागीय में जरूरी सुविधाओं की उपलब्धता के साथ-साथ क्लास रूम में भी शिक्षण से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध करानी है . विश्वविद्यालय में किसी भी शिक्षक से यह बात छुपी नहीं है कि लंबे अरसे से शिक्षकों की मूलभूत समस्याओं को अनदेखा किया जाता रहा है .
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LUTA की पिछली कार्य समिति ने भी कई समस्याओं को अनदेखा किया और जब पिछली कार्य समिति को LUTA की अंतिम आम सभा में एहसास हुआ तब तक बहुत देर हो चुकी थी . हालांकि अब शिक्षकों ने अनित्य गोरव पर फिर से भरोसा जताते हुए उन्हें अपना रहनुमा चुना है लेकिन सच ये भी है कि प्रोफ़ेसर राम मिलन शिक्षक हितों की लड़ाई लड़ने में अधिक सक्षम है. शायद यही कारण है कि शिक्षकों ने उन्हें समर्थन और मतदान देकर महामंत्री चुना है .
इसलिए वर्तमान शिक्षक संघ के पदाधिकारियों की यह जिम्मेदारी है कि वे चुनाव खत्म होने के बाद विश्वविद्यालय परिसर के सभी शिक्षकों की एक-एक समस्याओं के समाधान के लिए भरपूर प्रयास करें और LUTA की पिछली कार्य समिति की प्रवृत्ति को दोहराने से बचेंगे. यह शिक्षक संघ का चुनाव साख और उनके नेतृत्व क्षमता को लेकर किया गया है . उम्मीद की जानी चाहिए कि प्रोफेसर अनित्य गौरव और प्रोफेसर राममिलन इशिक्षकों की इन अपेक्षाओं पर खरे उतरेंगे. लखनऊ विश्वविद्यालय के एक वरिष्ठ विभाग अध्यक्ष ने कहा कि चुनाव ऊपरी तौर पर कुलपति विरोधी और कुलपति समर्थक प्रत्याशियों के बीच दिख रहा था , लेकिन वास्तव में हालात यह है कि विश्वविद्यालय में कुलपति विरोधी और कुलपति समर्थक कोई लाबी ही नहीं है , सभी शिक्षक हैं और सभी को अपने मान सम्मान की रक्षा करने का अधिकार है . अगर कभी किसी ने किसी मुद्दे पर प्रशासन के खिलाफ अपनी आवाज उठाई है , तो सिर्फ सम्मान और अपने हक के लिए. ऐसे शिक्षकों को कुलपति का विरोधी बताने के बजाय उनकी समस्याओं को हल करने की दिशा में सकारात्मक पहल करनी चाहिए . उल्लेखनीय है कि LUTA के लिए आज 31 मई को मतदान हुआ और फिर मतगणना करने के बाद रिजल्ट घोषित किये गए.

