शाहजहाँपुर/लखीमपुर खीरी, 01 अप्रेल , माँ गोमती के संरक्षण, स्वच्छता एवं पुनर्जीवन के उद्देश्य से संचालित गोमती दर्शन पदयात्रा निरंतर जनजागरण का संदेश देते हुए अपने निर्धारित मार्ग पर अग्रसर है। यह पदयात्रा 28 मार्च को पीलीभीत जनपद के माधोटांडा स्थित माँ गोमती के उद्गम स्थल से प्रारंभ होकर विभिन्न क्षेत्रों से होती हुई शाहजहाँपुर होते हुए अब लखीमपुर खीरी की ओर बढ़ रही है।
पदयात्रा का शुभारंभ बंडा स्थित श्री सोनासीरनाथ बाबा मंदिर से प्रातःकाल विधिवत पूजन-अर्चन के साथ किया गया। यात्रा के क्रम में श्रद्धालु मजरिया घाट पहुँचे, जहाँ भगवान भोलेनाथ के दिव्य दर्शन कर माँ गोमती के पावन तट पर विधिवत पूजन सम्पन्न हुआ। माँ गोमती की अविरल जलधारा के साक्षात दर्शन कर सभी श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे तथा महंत जी का आशीर्वाद प्राप्त किया।
इसके पश्चात पदयात्रा गदई सांडा होते हुए पन्ना घाट, शाहजहाँपुर पहुँची, जहाँ विश्व हिंदू परिषद ब्रज प्रांत के उपाध्यक्ष राजीव सिंह द्वारा एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आयोजित सभा में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों एवं गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
सभा को संबोधित करते हुए गोमती दर्शन संस्था के संयोजक अनुराग पांडेय एवं अध्यक्ष श्वेता सिंह ने माँ गोमती यात्रा के अनुभव साझा करते हुए कहा कि माँ गोमती को जल की अत्यंत आवश्यकता है तथा उनके प्राकृतिक वेटलैंड्स (आर्द्रभूमि) का संरक्षण एवं पुनर्जीवन समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने माँ गोमती को राज्य नदी का दर्जा दिए जाने की भी मांग रखी।
उन्होंने यह भी बताया कि गोमती नदी प्रदेश की एकमात्र ऐसी नदी है, जो अपने ही राज्य में उद्गम लेकर उसी प्रदेश में विलीन होती है तथा प्रदेश के प्रथम जिले से अंतिम जिले तक रूहेलखंड, मध्यांचल एवं पूर्वांचल को सिंचित करती है। इस अवसर पर उन्होंने जन-जन से माँ गोमती के संरक्षण, संवर्धन एवं पुनर्जीवन हेतु सक्रिय जनसहभागिता का आह्वान किया।
पदयात्रा में प्रमुख रूप से अमिताभ पांडे राजनारायण (नगर संघचालक, बंडा), देवेश सिंह, विमल वर्मा, बालकार सिंह, हर्षित, आदित्य शुक्ला सहित अरविंद पांडे, अभिनय तिवारी,अंकुर पांडे,रजत तिवारी, अमरीश शर्मा, श्री बाबू भाई, ब्रिजेश शुक्ला, अमित गुप्ता, पुनीत, राज सोनकर , सुजीत मौर्य, संजय यादव सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
पन्ना घाट पर आयोजित कार्यक्रम में भी अम्बिका प्रसाद, प्रेमशंकर बाजपेई, नन्हे लाल, सत्यपाल, अनंगपाल, सरनाम, शेखर अवस्थी, संजय अवस्थी, रामदत्त मिश्रा, रामवपाल, बेचेलाल अनिल कुमार वर्मा, गयादीन, रामभजन, बाबा, सुखराम दास, दिनेश कुमार मिश्रा, राजीव, प्रमोद सिंह, सोवित कुमार सहित अनेक स्थानीय गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही।
इस संपूर्ण पदयात्रा का नेतृत्व गोमती दर्शन संस्था के संयोजक अनुराग पांडेय एवं अध्यक्ष श्वेता सिंह के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। उनके नेतृत्व में यह यात्रा माँ गोमती को स्वच्छ, निर्मल एवं अविरल बनाने, माँ गोमती को पुनः जलसमृद्ध (पानीदार) करने, नदी की भूमि को सुरक्षित कराने तथा माँ गोमती को राज्य नदी का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर निरंतर आगे बढ़ रही है।
यात्रा के अंतर्गत रात्रि विश्राम टेढ़ेनाथ बाबा मंदिर में निर्धारित है, जहाँ प्रातःकाल माँ गोमती स्वच्छता अभियान, पूजन एवं हवन-पूजन का आयोजन किया जाएगा। सायंकालीन कार्यक्रम के अंतर्गत माँ गोमती तट स्थित टेढ़ेनाथ बाबा मंदिर के पीछे भव्य माँ गोमती आरती एवं विचार गोष्ठी आयोजित होगी, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में श्री राजकिशोर जी (प्रांतीय प्रमुख, समरसता विभाग, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) एवं मुख्य वक्ता के रूप में नरेंद्र सिंह जी (पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष) उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, जनप्रतिनिधि, नगर पंचायत अध्यक्ष, विधायक, ग्राम प्रधान एवं सम्मानित नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति अपेक्षित है।
इसी क्रम में पदयात्रा आगे बढ़ते हुए बिलसंडी बुजुर्ग ग्राम पहुँची, जहाँ आयोजित भव्य कथा पंडाल में एक प्रेरणादायक कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर गोमती दर्शन यात्रा के संयोजक एडवोकेट अनुराग पांडेय एवं अध्यक्ष श्वेता सिंह ने कथा आयोजक श्री संजय त्रिपाठी जी एवं कथा वाचक श्री अनिल दीक्षित “मानस दिवाना जी को अंगवस्त्र एवं माँ गोमती का चित्र भेंट कर सम्मानित किया।
कार्यक्रम में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए उन्होंने माँ गोमती के संरक्षण हेतु महत्वपूर्ण संदेश दिए। उन्होंने नदी किनारे प्लास्टिक एवं पन्नी के उपयोग पर पूर्ण रोक लगाने की अपील की, पूजा सामग्री में प्लास्टिक युक्त वस्तुओं का प्रयोग न करने का आग्रह किया तथा पक्के (रासायनिक) दीयों के स्थान पर आटे के दीये एवं पत्तों के दोने के उपयोग को बढ़ावा देने का संदेश दिया। साथ ही धूपबत्ती एवं अन्य पूजन सामग्री को कागज या प्राकृतिक वस्तुओं में ले जाने की प्रेरणा दी।
उन्होंने कहा कि हमें ऐसी पूजन सामग्री का उपयोग करना चाहिए जो प्राकृतिक रूप से गलकर मिट्टी में मिल जाए और माँ गोमती को प्रदूषित न करे।
यह पदयात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने और प्रकृति संरक्षण का संदेश देने वाला एक सशक्त जनआंदोलन बनती जा रही है, जो निरंतर जन-जन को जोड़ते हुए आगे बढ़ रही है। यह जानकारी संयोजक गोमती दर्शन- अनुराग पाण्डेय और अध्यक्ष गोमती दर्शन- श्वेता सिंह ने दी है .
