पटना.. बिहार के 14 विश्वविद्यालयों में पीएचडी दाखिले और शोध कार्यों की निगरानी के लिए मॉनिटरिंग सेल बनाया जाएगा . इस बाबत राजभवन ने कुलपतियों से सुझाव मांगे हैं। पीएचडी रेगुलेशन-2026 के तहत नामांकन होगा और नेट उत्तीर्ण अभ्यर्थी संबंधित वर्ष के नामांकन चक्र में पात्र होंगे।
बिहार के विश्वविद्यालयों में पीएचडी दाखिले और निर्धारित मानकों के अनुरूप शोध कार्य की प्रगति की सतत निगरानी के लिए जल्द ही विशेष मॉनिटरिंग सेल का गठन किया जाएगा। राज्यपाल सचिवालय की और से इस नई व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों से सुझाव और परामर्श मांगा गया है। कुलपतियों से प्राप्त सुझावों के आधार पर विस्तृत गाइडलाइन तैयार की जाएगी। राज्यपाल एवं कुलाधिपति सैयद अता हसनैन की ओर से उच्च शिक्षा में सुधार और पीएचडी में नामांकन के नए मानक तय किए जाने के बाद यह बड़ी पहल की जा रही है।
पीएचडी प्रवेश की अनियमितताओं की शिकायतों पर राजभवन सख्त
उल्लेखनीय है कि बिहार के कई विश्वविद्यालयों में पीएचडी नामांकन की प्रक्रिया में विभिन्न स्तरों पर अनियमितताओं की शिकायतें राजभवन को मिली थीं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए राजभवन ने सभी विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया है कि आगे पीएचडी ऑर्डिनेंस और पीएचडी रेगुलेशन-2026 के प्रावधानों के अनुसार ही नामांकन प्रक्रिया पूरी की जाए। नई व्यवस्था के माध्यम से नामांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और गुणवत्तापूर्ण शोध को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा।
इन 14 विश्वविद्यालयों में बनेगा मॉनिटरिंग सेल
राज्यपाल सचिवालय के निर्देश पर राज्य के 14 प्रमुख विश्वविद्यालयों में मॉनिटरिंग सेल का गठन किया जाएगा। इनमें मगध विश्वविद्यालय, पटना विश्वविद्यालय, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, मौलाना मजहरूल हक अरबी एवं फारसी विश्वविद्यालय, वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, जय प्रकाश विश्वविद्यालय, आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय, बीआर आंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, कामेश्वर सिंह संस्कृत दरभंगा विश्वविद्यालय, पूर्णिया विश्वविद्यालय, मुंगेर विश्वविद्यालय, बीएन मंडल विश्वविद्यालय और तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय शामिल हैं। ये सेल शोध कार्यों की प्रगति और निर्धारित मानकों के पालन की निगरानी करेंगे।
