लखनऊ, 19 मार्च, The English and Foreign Languages University (EFLU) के क्षेत्रीय परिसर, लखनऊ में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला “जेंडर सेंसिटाइजेशन, इन्क्लूजिविटी एवं एंपावरमेंट” में डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविधालय लखनऊ की शिक्षिका डॉ अलका सिंह ने “जेंडर डिस्कोर्सेज इन द इंडियन नॉलेज सिस्टम: टेक्स्ट्स एंड कंटेम्पररी इंटरप्रिटेशनस” पर बतौर मुख्य वक्ता व्याख्यान दिया। अपने वक्तव्य में उन्होंने कहा कि जेंडर केवल जैविक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, सामाजिक और दार्शनिक अवधारणा है, जो भारतीय ज्ञान परंपरा में गहराई से निहित है। उन्होंने G.E.N.D.E.R. रूपरेखा के माध्यम से ग्रंथों, महाकाव्यों, सामाजिक मानदंडों, धर्म, सशक्तिकरण और पुनर्व्याख्या के आयामों को स्पष्ट किया।

The English and Foreign Languages University (EFLU) : डॉ. सिंह ने वैदिक परंपरा की विदुषियों गार्गी और मैत्रीय का उल्लेख करते हुए बताया कि प्राचीन भारत में महिलाओं की बौद्धिक भागीदारी महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा की नींव गढ़ने वाले महाकाव्य रामायण की सीता और महाभारत की द्रौपदी के उदाहरणों के माध्यम से स्त्री शक्ति, संघर्ष और न्याय की अवधारणा को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि कुरु की भरी सभा में द्रौपदी का प्रतिवाद कानूनी चेतना और महिला अधिकारों का संभवतः पहला प्रभावशाली प्रकरण है। जानबूझ कर किसी महिला को निर्वस्त्र करना भारतीय कानून के तहत एक गंभीर गैर जमानती अपराध है। डॉ अलका सिंह ने न केवल धर्मशास्त्रों द्वारा जेंडर डिस्कोर्सेज का निर्देशात्मक रुख अपितु बौद्धिक विद्वता एवं आलोचनात्मक समीक्षा के उत्पादक परिणामों स्वरूप सामाजिक सांस्कृतिक गतिविधियों और कानूनी चेतना और संशोधनों पर भी गहन चर्चा की।
भक्ति और सूफी परंपरा की संत कवयित्रियों मीरा बाई और लाल देद का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि आध्यात्मिकता ने लैंगिक सीमाओं को पार किया है। समकालीन संदर्भ में उन्होंने नारीवादी और उत्तर-औपनिवेशिक दृष्टिकोणों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने अर्धनारीश्वर को स्त्री-पुरुष समन्वय और संतुलन का प्रतीक बताते हुए S.I.T.A. मॉडल (Strength, Identity, Trials, Agency) प्रस्तुत किया। अंत में उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली में लैंगिक विमर्श गतिशील है और निरंतर पुनर्व्याख्या की मांग करता है।
उन्होंने “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः” उद्धृत करते हुए समाज में महिलाओं के सम्मान और समानता की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम का समापन संवादात्मक सत्र के साथ हुआ, जहां अंग्रेजी एवं विदेशी भाषा विश्वविद्यालय (इफ्लू) के निर्देशक प्रोफेसर रजनीश अरोड़ा ने डॉ अलका सिंह को स्मृति चिन्ह से सम्मानित किया। कार्यशाला में विश्वविद्यालय के शिक्षक समेत छात्र एवं अन्य शोध विचारक प्रतिभागियों ने अपने विचार साझा किए।
