लखनऊ , 30 अप्रेल, दिव्यांगजन के लिए उच्च शिक्षा के अवसरों को सुदृढ़ करने, समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने तथा डॉ शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय, लखनऊ (Dr Shakuntala Misra National Rehabilitation University lucknow ) की गतिविधियों की व्यापक दृश्यता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विकास भवन, आजमगढ़ ( Latest Azamgarh news ) में एक विस्तृत एवं सार्थक बैठक आयोजित की गई। इस महत्वपूर्ण अवसर पर प्रो. संजय सिंह (कुलपति), डॉ. अमित कुमार राय (उप निदेशक, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग एवं परीक्षा नियंत्रक), डॉ. विजय शंकर शर्मा, डॉ. दुष्यंत त्यागी, श्रीमती मीनू सिंह (उप निदेशक, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग) एवं शान्त प्रकाश श्रीवास्तव (जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी) सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग एवं सामान्य दोनों वर्गों के विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा तक पहुंच को आसान बनाना तथा विश्वविद्यालय में उनके नामांकन में उल्लेखनीय वृद्धि करना था। इस दौरान विश्वविद्यालय (Dr Shakuntala Misra National Rehabilitation University lucknow ) के प्रतिनिधिमंडल ने स्थानीय प्रशासन से विशेष आग्रह किया कि वे विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं सामुदायिक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाकर विद्यार्थियों—विशेषकर दिव्यांगजनों—को उच्च शिक्षा की ओर प्रेरित करें। अधिकारियों ने यह भी सुझाव दिया कि काउंसलिंग सत्र, कैरियर मार्गदर्शन कार्यक्रम, तथा प्रवेश संबंधी सहायता शिविर आयोजित कर विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय से जोड़ने की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए।
Latest Azamgarh news : बैठक में शिक्षा विभाग, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, समाज कल्याण विभाग,अल्पसंख्यक विभाग से जुड़े अधिकारी, विभिन्न महाविद्यालयों, पॉलिटेक्निक संस्थानों, आईटीआई, तथा डी.एड. स्पेशल एजुकेशन एवं बी.एड. स्पेशल एजुकेशन संस्थानों के प्राचार्यगण एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे। सभी प्रतिभागियों ने समावेशी शिक्षा के लिए संस्थागत समन्वय को और मजबूत करने, संसाधनों के बेहतर उपयोग तथा दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए आवश्यक सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया।

कुलपति प्रो. संजय सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि विश्वविद्यालय समावेशी शिक्षा को व्यवहारिक रूप से सफल बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय परिसर में दिव्यांग अनुकूल संरचना (रैम्प, लिफ्ट, ब्रेल संकेत, सुलभ शौचालय आदि), विशेष शिक्षण संसाधन, सहायक उपकरण तथा प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय का लक्ष्य केवल नामांकन बढ़ाना नहीं, बल्कि दिव्यांग विद्यार्थियों के समग्र शैक्षिक, सामाजिक एवं व्यावसायिक विकास को सुनिश्चित करना है।
बैठक के दौरान यह भी रेखांकित किया गया कि के नेतृत्व में राज्य सरकार दिव्यांगजनों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास एवं पुनर्वास पर विशेष ध्यान दे रही है। इसी क्रम में विभिन्न योजनाओं एवं नीतियों के माध्यम से दिव्यांग विद्यार्थियों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं, जिनका लाभ विश्वविद्यालय स्तर तक पहुंचाया जा रहा है।
अधिकारियों ने यह भी सुझाव दिया कि जिला स्तर पर एक समन्वित तंत्र विकसित किया जाए, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय एवं कौशल विकास से जुड़े विभाग मिलकर कार्य करें, ताकि दिव्यांग विद्यार्थियों को शिक्षा से लेकर रोजगार तक निरंतर समर्थन मिल सके। इसके अतिरिक्त, डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से ऑनलाइन परामर्श, ई-लर्निंग सामग्री एवं सुलभ सूचना प्रणाली विकसित करने पर भी बल दिया गया।
कार्यक्रम के अंत में सभी अधिकारियों, शिक्षाविदों एवं प्रतिनिधियों ने दिव्यांगजन सशक्तिकरण के इस अभियान को सफल बनाने हेतु संयुक्त रूप से कार्य करने का संकल्प लिया तथा यह विश्वास व्यक्त किया कि समन्वित प्रयासों से अधिकाधिक विद्यार्थी उच्च शिक्षा से जुड़ेंगे और समाज में समान अवसरों की स्थापना होगी।
कार्यक्रम के अंत में सभी अधिकारियों, शिक्षाविदों एवं प्रतिनिधियों ने दिव्यांगजन सशक्तिकरण के इस अभियान को सफल बनाने हेतु संयुक्त रूप से कार्य करने का संकल्प लिया तथा यह विश्वास व्यक्त किया कि समन्वित प्रयासों से अधिकाधिक विद्यार्थी उच्च शिक्षा से जुड़ेंगे और समाज में समान अवसरों की स्थापना होगी।
