
छत्तीसगढ़ से सहकार भारती के प्रतिनिधियों ने किया सहभाग
रायपुर, 25 मई 2025,campus samachar.com , गुजरात स्थित राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड एनडीडीबी के भव्य सभागार में 24 एवं 25 मई 2025 को सहकार भारती द्वारा आयोजित डेयरी राष्ट्रीय अधिवेशन सफलता पूर्वक सम्पन्न हुआ। इस महत्वपूर्ण आयोजन में देशभर से सहकारी संगठनों, दुग्ध उत्पादक समितियों और विशेषज्ञों ने भाग लिया। डेयरी सहकारिता की भूमिका, समस्याओं और संभावनाओं पर विस्तृत विमर्श हुआ, जिसमें सहकारी संगठनों के अनुभवों और चुनौतियों को साझा किया गया।
अधिवेशन का प्रमुख आकर्षण अमूल फेडरेशन द्वारा प्रस्तुत सहकारी डेयरी मॉडल रहा, जिसे “ग्रासरूट टू ग्लोबल” दृष्टांत के रूप में बताया गया। अमूल प्रतिनिधियों ने बताया कि किस प्रकार एक छोटे गाँव के किसान से लेकर अंतरराष्ट्रीय बाज़ार तक की यात्रा मजबूत सहकारिता के दम पर संभव हुई। उत्पाद विविधता, गुणवत्ता नियंत्रण, तकनीक के समावेश और महिला सहभागिता जैसे पहलुओं को विस्तार से बताया गया।
अधिवेशन में किसानों और दुग्ध उत्पादकों ने अपनी जमीनी समस्याएं खुलकर सामने रखीं — जैसे दूध का उचित मूल्य न मिलना, पशु चारे की लागत में वृद्धि, पशु चिकित्सकों की कमी, संग्रहण केंद्रों की तकनीकी दिक्कतें और विपणन समस्याएं। विशेषज्ञों ने इन विषयों पर सुझाव देते हुए सहकारी समितियों के डिजिटलीकरण, न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने, पशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की बात कही।
इस राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ से सहकार भारती के प्रतिनिधियों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। घनश्याम तिवारी, प्रदेश संयोजक (पैक्स प्रकोष्ठ), सहकार भारती छत्तीसगढ़ ने अधिवेशन में सम्मिलित प्रदेश प्रतिनिधियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में सहकारिता के क्षेत्र में तेजी से प्रगति हो रही है और अमूल जैसा मॉडल प्रदेश में भी लागू किया जा सकता है, जिसके लिए मिलकर नवाचार और संगठनात्मक मजबूती की आवश्यकता है। रामप्रकाश केशरवानी, प्रदेश कोषाध्यक्ष, नरेश मल्लाह, महावीर नेताम, गणेशराम साहू, रामकुमार श्रीवास, ललित देवांगन, महेश सोनी सहित सहकार भारती ने शुभकामना प्रदर्शित किया।
अधिवेशन का समापन सहकार भारती के केंद्रीय पदाधिकारियों के वक्तव्यों और संकल्प प्रस्तावों के साथ हुआ, जिसमें देश के प्रत्येक कोने में सहकारिता के माध्यम से आत्मनिर्भरता की भावना को सशक्त बनाने का आह्वान किया गया। विशेष जोर महिला स्वावलंबन, युवाओं की भागीदारी और क्षेत्रीय उत्पादों को वैश्विक स्तर पर पहुँचाने पर रहा।
यह अधिवेशन केवल संवाद का मंच नहीं रहा, बल्कि यह नीति निर्माण, अनुभव साझा करने और सहकारी भावना को सशक्त बनाने का अवसर बनकर उभरा। छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों के लिए यह एक प्रेरणास्रोत है, जहाँ अमूल जैसे मॉडलों से सीखकर स्थानीय ज़रूरतों के अनुसार सहकारी व्यवस्था को सशक्त किया जा सकता है।
