
- श्री तिवारी ने कहा, “वैमनिकॉम सदैव सहकारी शिक्षा व प्रबंधन के क्षेत्र में अग्रणी रहा है। यह नया पाठ्यक्रम आज की बदलती सामाजिक-आर्थिक आवश्यकताओं के अनुरूप युवाओं को प्रशिक्षित करेगा।”
पुणे/रायपुर,01 जून, campus samachar.com, सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन ‘वैकुंठ मेहता राष्ट्रीय सहकारी प्रबंधन संस्थान (वैमनिकॉम), पुणे’ द्वारा हाल ही में सहकारी क्षेत्र में नेतृत्व निर्माण हेतु दो वर्षीय पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन मैनेजमेंट (पीजीडीएम) पाठ्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस अभिनव पहल का स्वागत करते हुए घनश्याम तिवारी, प्रदेश संयोजक, पैक्स प्रकोष्ठ, सहकार भारती छत्तीसगढ़ एवं वैमनिकॉम के पूर्व छात्र (45वीं बैच, 2012) ने इसे सहकारी आंदोलन की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम बताया।
भविष्य के सहकारी नेतृत्व के लिए मजबूत नींव
श्री तिवारी ने कहा, “वैमनिकॉम सदैव सहकारी शिक्षा व प्रबंधन के क्षेत्र में अग्रणी रहा है। यह नया पाठ्यक्रम आज की बदलती सामाजिक-आर्थिक आवश्यकताओं के अनुरूप युवाओं को प्रशिक्षित करेगा।” उन्होंने यह भी कहा कि इस कोर्स के माध्यम से सहकारी संस्थाओं को ऐसे नवोन्मेषी व नैतिक नेतृत्वकर्ता प्राप्त होंगे, जो पैक्स से लेकर मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव्स तक के संचालन को आधुनिक व पारदर्शी बनाएंगे।
उद्घाटन समारोह में वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति
इस पाठ्यक्रम के उद्घाटन समारोह में सहकारिता मंत्रालय के सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी, अपर सचिव पंकज कुमार बंसल, वैमनिकॉम एवं सिक्टेब के निदेशक डॉ. सुवाकंता मोहंती सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी एवं सहकारी क्षेत्र के विशेषज्ञ उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि यह कोर्स एआईसीटीई से अनुमोदित है और सहकारी वित्त, शासन, समावेशी विकास, ग्रामीण प्रबंधन आदि विषयों को समाहित करता है।
वैमनिकॉम का योगदान और घनश्याम तिवारी का अनुभव
घनश्याम तिवारी ने स्वयं 2012 में पीजीडीसीबीएम (पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन कोऑपरेटिव बिजनेस मैनेजमेंट) की शिक्षा वैमनिकॉम से प्राप्त की थी। उन्होंने बताया, “वह एक ऐसा अनुभव था जिसने मेरी सोच, नेतृत्व और सेवा के मूल्यों को परिष्कृत किया। आज मैं छत्तीसगढ़ में सहकार भारती के माध्यम से सैकड़ों पैक्स समितियों व सहकारी कार्यकर्ताओं से जुड़ा हूं, और इसका श्रेय वैमनिकॉम में मिली शिक्षाओं को जाता है।”
सहकारी संस्थानों में नवाचार और तकनीकी समावेश
वैमनिकॉम द्वारा इस नए पाठ्यक्रम में एआई और एमआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड मशीन लर्निंग) जैसे आधुनिक तकनीकी ज्ञान को भी जोड़ा गया है, जिससे छात्र सहकारी और कृषि व्यवसायों में डिजिटल नवाचार ला सकें। यह पहल भारत सरकार की पैक्स को कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) में बदलने की रणनीति के अनुरूप है।
छत्तीसगढ़ के युवाओं को आमंत्रण
श्री तिवारी ने विशेष रूप से छत्तीसगढ़ के ग्रामीण व सहकारी पृष्ठभूमि से आने वाले युवाओं से आह्वान किया कि वे इस पाठ्यक्रम का लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि, “आज सहकारिता केवल एक सेवा नहीं, बल्कि एक करियर विकल्प भी है। वैमनिकॉम जैसे संस्थान युवाओं को सहकारी क्षेत्र में नेतृत्व, नवाचार व राष्ट्रनिर्माण के लिए तैयार कर रहे हैं।”
वैमनिकॉम का यह नया दो वर्षीय पीजीडीएम कोर्स सहकारी क्षेत्र में पेशेवर नेतृत्व को जन्म देने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। घनश्याम तिवारी जैसे पूर्व छात्रों की सक्रिय भूमिका और प्रोत्साहन से यह विश्वास और प्रबल होता है कि आने वाला समय सहकारिता के नवयुग का साक्षी बनेगा।
