नेता जी फंस गए..शिक्षा भवन में चर्चा है
लखनऊ में माध्यमिक शिक्षकों की राजनीति करने वाले एक शिक्षक नेता के किस्से शिक्षा भवन में गूंज रहे हैं . दरअसल यह शिक्षक नेता शिक्षकों के एरियर भुगतान से जुड़े एक क्लर्क के पास पहुंचे और उससे प्रति शिक्षक ₹5000 की मांग कर दी लेकिन महिला क्लर्क ने यह राशि देने से इनकार कर दिया. साथ ही चेतावनी भी दे दी कि वे इस तरह की गतिविधि में शामिल नहीं होती हैं लेकिन शिक्षक नेता को वसूली करनी ही थी तो उन्होंने दो शिक्षकों को महिला क्लर्क के खिलाफ खड़ा कर दिया और मीडिया में बयान भी दिलवा दिए. अब यहीं से मामला बिगड़ गया क्योंकि महिला शिक्षिका के पति भी रूतबेदार पद पर हैं . उन्होंने सीधे शिक्षक नेता और मीडिया में खबर चलाने वालों को असलियत बता दी तो मीडिया में मामला हल्का पड़ा और शिक्षक नेता भी हाथ जोड़ने लगे. वैसे यह शिक्षक नेता पहले एक अन्य संगठन में थे और अब खुलेआम जाति के आधार पर अपना संगठन बनाने की कोशिश में है.
यह भी दीदी कांटे से काँटा निकालते फंस गयी
राजनीति में तो दीदी के नाम से ममता बनर्जी चर्चित हैं लेकिन विश्वविद्यालय की दीदी भी कम चर्चित नहीं है . उन्हें किसी ने कांटे से कांटा निकालने की सलाह दे दी और उन्होंने बिना देरी किए उसे पर अमल करना शुरू कर दिया . आदेश निकलवा दिया कि यह संगठन के कार्यकारिणी कालातीत हो चुकी है और अब नए चुनाव कराए जाएंगे . सलाह देने वाले तो चुपके से निकल गए लेकिन फंस गई दीदी . मुखिया की भी समझ में नहीं आ रहा कि आखिर दीदी ने किन कारणों से ऐसा कार्य कर दिया है . खैर दीदी भी कहां मानने वाली थी. दीदी ने आप अपने एक और मातहत को आगे करके दूसरे चरण का काम शुरू कर दिया है , लेकिन दीदी यह भूल रही हैं कि जैसे ममता बनर्जी के 15 साल का समापन हो चुका है वैसे ही विश्वविद्यालय में भी उनकी लंबी यात्रा का कहीं वैसा ही समापन हो जाए
अब इंडी गठबंधन की राजनीति करेंगे गुरु जी
एक डिग्री कॉलेज में कर्मचारियों की नियुक्ति में मोटी रकम चलने का की चर्चा है . नियुक्तियां लगभग डेढ़ दर्जन हुई है और यह अशासकीय महाविद्यालय के तत्कालीन प्राचार्य और उनके सगे रिश्तेदार की मिलीभगत मानी जा रही है, लेकिन लेनदेन के मामले में कुछ ऐसा बिगड़ आया कि उन्हें अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ी और दूसरे सज्जन प्राचार्य बन बैठे . अब हालात यह है कि पुराने प्राचार्य महोदय विद्यालय की गतिविधियों में पहले की तरह सक्रिय नहीं होते हैं. अब तो उनके साथियों ने इंडी गठबंधन में सक्रिय करने का मन बनाया है और उन्हें एक पद भी दे दिया गया है. अब उसे कॉलेज में इंडी गठबंधन के कई पदाधिकारी शिक्षक के रूप में कार्य कर रहे हैं. आगे देखिए कॉलेज के राजग नेता कुछ करते भी हैं या खुद को रचनात्मक कार्यों में लगाते हैं.
मोर्चा खोल कर गलती तो नहीं कर दी
लखनऊ विश्वविद्यालय संयुक्त महाविद्यालय शिक्षक संघ के चुनाव में धांधली, अनियमितता के कई और आरोप लगे और उन आरोपों को लगाने वाले प्रत्याशी उनके समर्थक मैदान में आ गए . कई दिन तक लिखा पढ़ी होती रही. मोर्चा भी खोल दिया गया और दूसरे संगठन को बनाने की कवायद भी शुरू हो गई लेकिन बीच में कुछ ऐसी बातें हो गई हैं कि मोर्चा खोलने वाले संगठन के नेता और उनके समर्थक अपने कदम पीछे खींच रहे हैं तो वहीं विजेता बने पदाधिकारी लगातार अपनी उपस्थिति दर्ज कर रहे हैं. मुश्किल उन शिक्षकों की है जो मोर्चा खोलने वालों के साथ खुलकर मैदान में आ गए थे लेकिन अब उनको कहीं आसरा मिलता नहीं दिखाई दे रहा है . इसलिए घूम फिर कर एक रिटायर्ड प्रोफेसर से गुहार लगा रहे हैं कि वह तो बहकावे में आ गए थे असली में तो वे संगठन के ही साथ हैं अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राजनीति में यह शिक्षक कहां फिट बैठते हैं.
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