लखनऊ, 09 अप्रेल , अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की लखनऊ विश्वविद्यालय इकाई गठन के समय आपसी वार्तालाप और विचार विमर्श को संगठन के खिलाफ बताने की अफवाहें फैलाई जा रहे हैं. इस राष्ट्रवादी संगठन के खिलाफ विरोधी विचारधारा के लोग प्रायोजित तरीके से विवाद पैदा कर रहे हैं.
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कुछ वरिष्ठ और संवेदनशील पदाधिकारियों के बारे में की जा रही टिप्पणियां विरोधी संगठनों की इसी प्रायोजित रणनीति का हिस्सा है. विरोधियों को लग रहा है कि वे विद्यार्थी परिषद के संवेदनशील, कर्मठ नेताओं पर आरोप प्रत्यारोप लगाकर खुद को विश्वविद्यालय परिसर में मजबूत कर पाएंगे, लेकिन ये उनको सिर्फ सोच ही रह जायेगी .
लखनऊ विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति की बात करें तो यहां से हमेशा से विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता और संगठन मजबूत स्थिति में हैं. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद लखनऊ विश्वविद्यालय सहित सभी शिक्षण संस्थानों में छात्रों और उनके हितों में लगातार न केवल रचनात्मक शैक्षिक आंदोलन करता रहा है बल्कि श्री रामस्वरूप यूनिवर्सिटी जैसे विश्वविद्यालय में सड़क पर उतरकर लाठी खाने का कार्य भी विद्यार्थी परिषद के ऊर्जावान कार्यकर्ताओं ने किया है . इसी प्रकार लखनऊ की ही बात करें तो अंबेडकर विश्वविद्यालय से लेकर अन्य महाविद्यालय में भी विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता हर समय छात्र समस्याओं की निराकरण के लिए तैयार रहते हैं और उन्होंने समय-समय पर आंदोलन करके दिखाया भी है .
ऐसे में विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं और नेताओं के बारे में इस तरह की टिप्पणी करना कहीं से भी उचित प्रतीत नहीं हो रहा है. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद लखनऊ विश्वविद्यालय के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि यह विवाद जानबूझकर ऐसे समय में किया गया है , जब संगठन को विस्तार देने की रणनीति बनाई जा रही है. विद्यार्थी परिषद विश्वविद्यालय और कॉलेज की इकाई गठन के मामले में हमेशा संवेदनशील और सतर्कता पूर्वक कार्यकर्ता है. इसलिएकोशिश है कि स्वच्छ छवि और ईमानदार कर्मकार राष्ट्रवादी विचारों से ओत प्रोत कार्यकर्ता महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर सके.
