- वेद से लेकर आयुर्वेद, शास्त्र से सिविल सेवा तक संस्कृत विद्यार्थियों के लिए खुल रहे अवसरों के नए द्वार, संस्कृत को जनभाषा बनाना समय की आवश्यकता प्रो. मदन मोहन झा संस्कृतसप्ताहोत्सव-2026 का भव्य शुभारंभ
नई दिल्ली, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जनकपुरी, नई दिल्ली ( Central Sanskrit University) में सोमवार को संस्कृतसप्ताहोत्सव-2026 का भव्य शुभारंभ हुआ। समारोह का शुभारंभ दीपप्रज्वलन एवं वैदिक मंगलाचरण के साथ हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जगद्गुरु रामानन्दाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर के कुलगुरु प्रो.मदन मोहन झा और दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. रंजन त्रिपाठी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के शैक्षणिक अधिष्ठाता प्रो. ललित कुमार त्रिपाठी ने की। विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. आर.जी. मुरलीकृष्ण Murali Krishna भी समारोह में उपस्थित रहे। विश्वविद्यालय की छात्र कल्याण अधिष्ठात्री प्रो. लीना सक्करवाल ने स्वागत भाषण में संस्कृतसप्ताहोत्सव के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। संस्कृत को ज्ञान-विज्ञान की भाषा के रूप में विकसित करना है।

मुख्य अतिथि प्रो. मदन मोहन झा ने कहा कि संस्कृत सप्ताह के आयोजन का प्रमुख उद्देश्य विद्यालयों और महाविद्यालयों में संस्कृत के प्रचार-प्रसार को गति देना तथा विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को संस्कृत से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल एक प्राचीन भाषा नहीं, बल्कि भारत की ज्ञान-परंपरा, दर्शन, विज्ञान, साहित्य और संस्कृति को जोड़ने वाली सशक्त कड़ी है।
प्रो. झा ने केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा संस्कृत के संवर्धन के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा वेदरक्षा के लिए विभिन्न वेद विद्यालयों को अनुदान दिया जा रहा है तथा गुरुकुल विद्यार्थियों को ध्यान में रखकर पाठ्यक्रम एवं अध्ययन के अवसर विकसित किए गए हैं। इससे संस्कृत विद्यार्थियों को वेदाध्ययन के क्षेत्र में आगे बढ़ने के नए अवसर प्राप्त हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि संस्कृत विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति की व्यवस्था, शास्त्र अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों के लिए सेतुबन्ध योजना के माध्यम से आईआईटी एवं आईआईएम जैसे संस्थानों में शोध के अवसर तथा शास्त्र एवं ग्रंथ प्रशिक्षण के माध्यम से आधुनिक क्षेत्रों से जोड़ने के प्रयास महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि संस्कृत विद्यार्थियों को वेद से लेकर आयुर्वेद और भारतीय विधि शास्त्र से सिविल सेवा से आगे बढ़ने के अवसर मिल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि संस्कृत विद्यार्थियों के लिए आयुर्वेद के क्षेत्र में चिकित्सक बनने के अवसर पुनः उपलब्ध हुए हैं। इसी प्रकार बी.ए. सिविल सर्विस स्टडीज जैसे पाठ्यक्रम के माध्यम से संस्कृत के विद्यार्थियों को प्रशासनिक सेवाओं की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय संस्कृत को आधुनिकता के साथ जोड़ते हुए विद्यार्थियों के लिए शिक्षा, शोध और रोजगार के नए मार्ग प्रशस्त कर रहा है। प्रो. झा ने कहा कि आज आवश्यकता है कि संस्कृत को जनभाषा बनाया जाए। आधुनिक समय में संस्कृत के अध्ययन को नई तकनीक, आधुनिक ज्ञान-विज्ञान और समकालीन आवश्यकताओं से जोड़कर इसके वैश्विक विस्तार की दिशा में कार्य किया जाना चाहिए।
विशिष्ट अतिथि प्रो. रंजन त्रिपाठी ने कहा कि संस्कृत की समृद्ध ज्ञान-परंपरा के प्रचार-प्रसार के साथ इसे जनभाषा बनाने के लिए निरंतर प्रयास करने की आवश्यकता है । उन्होंने कहा कि संस्कृत को केवल अध्ययन की भाषा तक सीमित न रखते हुए इसे आम बोलचाल की भाषा बनाने की दिशा में कार्य करना चाहिए।
अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. ललित कुमार त्रिपाठी ने संस्कृत के संरक्षण एवं संवर्धन के साथ इसे आधुनिक ज्ञान-विज्ञान, तकनीक और युवा पीढ़ी से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि संस्कृत की विशाल ज्ञान-संपदा को वर्तमान पीढ़ी तक पहुंचाना विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

- 25 अगस्त तक होंगे संस्कृत के विविध आयोजन
संस्कृतसप्ताहोत्सव के सह-संयोजक डॉ. योगेन्द्र दीक्षित ने बताया कि सप्ताहोत्सव के अंतर्गत विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 18 अगस्त को दिल्ली के विद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए बालमहोत्सव, 19 अगस्त को महाविद्याल विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के लिए संस्कृत युवमहोत्सव तथा 20 अगस्त को गुरुकुल विद्यार्थियों के लिए संस्कृत गुरुकुलमहोत्सव आयोजित होगा। विश्वविद्यालय में कार्यरत कर्मचारियों के लिए संस्कृत कर्मयोगीमहोत्सव तथा शोधार्थियों के लिए संस्कृत शोधार्थीमहोत्सव का आयोजन किया जाएगा। 25 अगस्त को कवि-सपर्या एवं विद्वत्-सपर्या के साथ साहित्योत्सव का आयोजन होगा। सह संयोजिका डॉ. अमृता कौर ने धन्यवाद ज्ञापित किया की। कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रमोद कुमार बुटोलिया ने किया।
इस अवसर पर प्रो. मधुकेश्वर भट्ट, प्रो. अजय मिश्रा, डॉ पीएम गुप्ता डॉ. विजय दाधीच, डॉ. सुनीता, डॉ. देवानंद शुक्ल, डॉ. प्रीति शुक्ला, डॉ. चक्रधर मेहर, रोहतास सिंह सहित विश्वविद्यालय के अधिकारी, कर्मचारी, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
Shrinivasa Varakhedi Shrinivasa Varakhedi
