कानपुर, 26 जुलाई , उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान की प्रेरणादायक “गृहे-गृहे संस्कृतम्” योजना के अंतर्गत पूर्व माध्यमिक विद्यालय, टौंस, कानपुर नगर में आयोजित 12 दिवसीय संस्कृत सम्भाषण शिविर आज दिनांक 25 जुलाई को भव्य रूप से सम्पन्न हुआ। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों के मन से संस्कृत के प्रति भय को दूर कर इसे एक सरल और बोलचाल की भाषा के रूप में स्थापित करना था।
दीप्रज्वलन और वंदना के साथ हुआ समापन समारोह
शिविर के समापन और मुख्य कार्यक्रम का शुभारम्भ विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती शची मिश्रा जी के द्वारा माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर और माला पहनाकर किया गया। इस अवसर पर प्रशिक्षिका प्रांजल ने माँ सरस्वती की वन्दना प्रस्तुत की। कार्यक्रम के दौरान सहायक अध्यापिका, विद्यालय श्रीमती सोमिल पोरवाल, श्रीमती वंदना तथा विद्यालय व अन्य कार्यकर्णगण भी पूरी तल्लीनता और उत्साह के साथ उपस्थित रहे।
खेल और अभिनय के माध्यम से सीखी संस्कृत
प्रशिक्षिका प्रांजल ने पिछले 12 दिवसों में बच्चों को अत्यंत रोचक और सरल विधियों से संस्कृत सम्भाषण का प्रशिक्षण दिया। बच्चों ने पारम्परिक रटने की पद्धति के विपरीत खेलकूद, सामूहिक गीतों और अभिनय (ड्रामा) के माध्यम से संस्कृत के कठिन वाक्यों और शब्दों को बहुत कम समय में सहजता से सीखा। बच्चों की इस शानदार प्रगति और सीखने के उत्साह ने सभी को प्रभावित किया।

शिक्षिकाओं ने की सराहना
विद्यालय की सहायक अध्यापिका श्रीमती वंदना जी ने प्रशिक्षिका के शिक्षण कौशल की भूरी-भूरी प्रशंसा करते हुए कहा, “इन 12 दिवसों में पढ़ाने का तरीका बेहद अद्भुत और सराहनीय रहा है। बच्चों ने खेल-खेल और अभिनय के माध्यम से जिस प्रकार संस्कृत सीखी है, वह वास्तव में प्रेरणादायक है।”इसके साथ ही, उन्होंने उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त की और धन्यवाद अर्पित करते हुए कहा कि बच्चों में देववाणी के संस्कार सींचने वाले ऐसे लाभकारी शिविर निरंतर आयोजित होते रहने चाहिए। उन्होंने यह भी घोषणा की कि ये प्रशिक्षित बच्चे आगामी राष्ट्रीय पर्वों जैसे 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) और हिंदी दिवस आदि के अवसरों पर विद्यालय के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में संस्कृत नाटक और गीतों की शानदार प्रस्तुतियां दें सकेंगे।
शिविर के दौरान बच्चों की सक्रिय भागीदारी और उत्कृष्ट रिस्पॉन्स ने यह सिद्ध कर दिया कि यदि सही मार्गदर्शन मिले, तो देववाणी संस्कृत को जन-जन तक पहुँचाना और बोलना बेहद आसान है। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी शिक्षकों, और कार्यकर्ताओं ने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
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