बिलासपुर, 06 जून । आज के आधुनिक युग में जहाँ कंक्रीट के जंगल बढ़ते जा रहे हैं और हरियाली सिमटती जा रही है, वहीं छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति को बचाने के लिए एक बेहद अनोखा, भावुक और प्रेरणादायक जन जागरूकता अभियान देखने को मिला। जनपद प्राथमिक शाला बिल्हा के सजग एवं संवेदनशील शिक्षक कलेश्वर साहू ने पर्यावरण चेतना का संदेश देने के लिए एक ऐसी अनूठी पहल की, जिसने न केवल राहगीरों को ठहरने पर मजबूर कर दिया बल्कि पूरे प्रदेश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
शिक्षक कलेश्वर साहू ने अपने बच्चे अंकित साहू को साक्षात एक ‘जीवंत वृक्ष’ का रूप देकर सरगांव से लेकर न्यायधानी बिलासपुर तक एक विशाल और संदेशपरक जागरूकता यात्रा निकाली। इस अनोखे अभियान के दौरान ‘वृक्ष’ बने बालक अंकित के हाथों में पर्यावरण बचाने, पेड़ों की कटाई रोकने और नए पौधे लगाने की भावुक अपील करता हुआ एक पोस्टर था। इस जीवंत रूप में बच्चे ने पूरे बिलासपुर शहर का भ्रमण कर आम जनता को ‘पेड़ लगाओ, जीवन बचाओ’ का सबसे प्रभावी संदेश दिया।

इस अभूतपूर्व और संवेदनशील जन जागरूकता अभियान की शुरुआत गरिमामय माहौल में नगर पंचायत सरगांव से हुई। वहाँ नगर अध्यक्ष परमानंद साहू, वरिष्ठ पत्रकार शिवम पाण्डेय और स्थानीय नगरवासियों की गरिमामयी उपस्थिति में यात्रा को हरी झंडी दिखाकर बिलासपुर के लिए रवाना किया गया। सरगांव से प्रस्थान करने के बाद यह अनूठा अभियान दल नगर पंचायत बिल्हा पहुंचा, जहाँ पहुँचने पर इस पर्यावरण यात्रा का भव्य स्वागत हुआ। बिल्हा नगर पंचायत अध्यक्ष वंदना जेंड्रे, उपाध्यक्ष सतीश शर्मा, सभापति मोहन ढोरिया सहित स्थानीय पार्षदों और बड़ी संख्या में उपस्थित पर्यावरण प्रेमियों ने शिक्षक कलेश्वर साहू और उनके बच्चे अंकित का अत्यंत आत्मीय स्वागत किया। सभी जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने शिक्षक के इस अभिनव प्रयास की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए इसे समाज की आँखें खोलने वाली पहल बताया।
बिल्हा से पर्यावरण चेतना के इस पावन संदेश को आगे बढ़ाते हुए यह यात्रा चकरभाठा पहुँची, जहाँ शिक्षा जगत से जुड़े प्रबुद्ध जनों ने इस मिशन की अगवानी की। चकरभाठा में केशव वर्मा (सीएसी कन्या बिल्हा) सहित विभिन्न शिक्षकों और शिक्षाविदों ने पूरे उत्साह के साथ इस यात्रा का स्वागत किया और समाज में पर्यावरण के प्रति जागृति लाने के इस प्रयास को हर नागरिक के लिए अनुकरणीय और अनुकरणीय बताया। इसके पश्चात, यह अभियान दल राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 130 से होते हुए बिलासपुर शहर की ओर आगे बढ़ा। जैसे ही यह यात्रा न्यायधानी बिलासपुर शहर की सीमा में प्रविष्ट हुई, वैसे ही सड़क के दोनों ओर लोगों का हुजूम इस अनोखे दृश्य को देखने के लिए उमड़ पड़ा। बिलासपुर के विभिन्न प्रमुख चौक-चौराहों पर भ्रमण करते हुए इस अभियान ने राहगीरों, वाहन चालकों और स्थानीय निवासियों का ध्यान अपनी ओर मजबूती से खींचा।

इस यात्रा का सबसे विहंगम और अद्भुत नजारा बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर देखने को मिला, जहाँ देश के कोने-कोने से आए यात्रियों की भीड़ जमा हो गई। रेलवे स्टेशन परिसर में इस अनूठे ‘बाल वृक्ष’ के साथ फोटो और सेल्फी लेने के लिए विभिन्न राज्यों के यात्रियों का तांता लग गया। लोगों ने न केवल इस पल को अपने कैमरों में कैद किया, बल्कि इस अनूठे अभियान की खुलकर तारीफ की और कहा कि पर्यावरण बचाने का इससे सीधा और प्रभावी तरीका उन्होंने पहले कभी नहीं देखा। स्टेशन पर मौजूद सैकड़ों यात्रियों ने बच्चे अंकित और उनके मार्गदर्शक पिता शिक्षक कलेश्वर साहू से मुलाकात की, उनके इस शानदार और साहसिक कदम के लिए बधाई दी और बच्चे के उज्ज्वल भविष्य के लिए अपनी शुभकामनाएं प्रेषित कीं।

इस पूरी लंबी यात्रा के मार्ग को सुगम बनाने और जन जागरूकता अभियान को जमीनी स्तर पर पूरी तरह सफल बनाने में राजेश यादव, देव प्रधान, कुंजल साहू और तुकाराम ने अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराते हुए बेहद महत्वपूर्ण और सराहनीय सहयोग प्रदान किया। वर्तमान में शिक्षक कलेश्वर साहू और उनके बच्चें अंकित साहू का यह अनूठा अभियान पूरे छत्तीसगढ़ राज्य में चर्चा और प्रशंसा का मुख्य विषय बना हुआ है। यह यात्रा न केवल बिलासपुर बल्कि पूरे प्रदेश के लोगों को प्रकृति से जुड़ने, अधिक से अधिक पेड़ लगाने और आने वाली पीढ़ियों के लिए धरती को सुरक्षित व हरी-भरी बनाने के लिए गहराई से प्रेरित कर रही है।
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