
लखनऊ, 25 मार्च , campussamachar.com, प्रदेश के सहायता प्राप्त गैर सरकारी माध्यमिक विद्यालयों में विगत पच्चीस से भी अधिक वर्षों से ततसमय लागू नियुक्ति प्रक्रिया के अंतर्गत नियुक्त कार्यरत तदर्थ शिक्षकों को नियमित करने मे मंडलीय समितियों द्वारा आदेशों की अवहेलना पर माध्यमिक शिक्षक संघ पांडेय गुट ने गहरी नाराजगी जाहिर की है।
संघ के प्रादेशिक अध्यक्ष डॉ जितेंद्र कुमार सिंह पटेल एवं संगठन प्रवक्ता व उपाध्यक्ष ओम प्रकाश त्रिपाठी ने उक्त मामले की ओर अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा उ प्र शासन दीपक कुमार का व्यक्ति गत ध्यान आकर्षित किया है और उनसे तत्काल हस्तक्षेप करने की माँग की है। शिक्षक नेताओं ने बताया कि विगत 30 दिसंबर 2000 तक नियुक्त कठिनाई निवारण आदेश एवं धारा 18 के अंतर्गत और कार्यरत तदर्थ शिक्षकों को उ प्र माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड अधिनियम, 2016 की धारा 33 छ के अंतर्गत उक्त दोनों विधाओ से नियुक्त तदर्थ शिक्षकों को विनियमित कर मौलिक रूप से नियुक्त कर दिये जाने का स्पष्ट प्रावधान भी कर दिया है। जिसे मंडलीय समितियों द्वारा नजंदाज कर उनका वर्षों से मानसिक और आर्थिक रूप से उत्पीड़न किया जा रहा है। यह उनके साथ घोर अन्याय है।
शिक्षक नेताओ ने बताया कि इन दोनों मामले में न्यायालयों के द्वारा इतनी लंबी सेवाओं को दृष्टिगत रखते हुए केवल पांच विंदुओ को ध्यान में रख कर नियमित करने के स्पष्ट आदेश जारी किया है। इसके तहत केवल नियुक्ति के समय वेकेंसी होने, शिक्षक की अर्हता होने, सीधे अथवा कोर्ट से अनुमोदन व वेतन भुगतान के आदेश, आदेश जारी होने की तिथि तक सेवा में बने रहने, एवं पद की वर्तमान स्थिति को ही विनियमित करते समय मात्र विचारणीय गाइड लाइन के विन्दु जारी किये गए दिशा निर्देश है।

इन सभी बातों को एक सिरे से नजरंदाज कर मंडलीय समितियों द्वारा निस्तारण के नाम पर लंबित प्रकरणों को निरस्त कर शासन को कोई मामले लंबित न होने की सूचना प्रेषित कर खाना पूरी की जा रही है। इस प्रकार मंडलीय समितियों द्वारा शासन के आदेशों की तो अनदेखी की जा रही है वहीं दूसरी ओर शासन को गुमराह भी किया जा रहा है। यह स्थिति अत्यंत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। विदित हो अब मात्र दो हजार तीन सौ मामले विनियमित होने से वंचित रह गए हैं।
शिक्षक नेताओं ने सूबे के योगी आदित्यनाथ सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए विनियमित होने से शेष रह गए सभी वर्षों से कार्यरत तदर्थ शिक्षकों को विना भेद भाव अपनाये विनियमित कर प्रदेश के माध्यमिक शिक्षा जगत से तदर्थवाद को पूरी तौर पर समाप्त करने की पुरजोर माँग को दोहराया है।
गौरतलब हो कि कठिनाई निवारण अध्यादेश एवं धारा 18 को विधिक रूप से पच्चीस जनवरी 1999 को चयन बोर्ड अधिनियम की धारा 33ang के द्वारा निस रित कर प्रबंध तंत्रों से नियुक्ति का अधिकार समाप्त कर दिया गया था। उसके बाद उन्हें नियुक्ति प्रदान करने का संवैधानि क अधिकार नियुक्ति यो का नहीं रह गया।
