लखनऊ . बालिका विद्यालय इंटरमीडिएट कॉलेज, मोती नगर, लखनऊ ( Balika Vidyalaya Inter College Moti Nagar,Lucknow ) में आज छात्राओं के लिए एक प्रभावशाली एकल नाटक ‘सूरज’ का मंचन किया गया। युवा रंगकर्मी एवं कलाकार कोलकाता के फुलेंद्र पंडित ने लगभग एक घंटे की इस एकल नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से छात्राओं के समक्ष संघर्ष, विपरीत परिस्थितियों, बाल शोषण, शिक्षा, मानवीय संवेदना और आत्मविश्वास की एक अत्यंत मार्मिक कथा प्रस्तुत की। नाटक का केंद्रीय संदेश था कि जीवन में परिस्थितियां कितनी ही कठिन क्यों न हों, मनुष्य को कभी हार नहीं माननी चाहिए। दृढ़ इच्छाशक्ति, शिक्षा, संवेदनशील मार्गदर्शन और अपनी प्रतिभा पर विश्वास के माध्यम से कठिन से कठिन परिस्थितियों को बदला जा सकता है।
कार्यक्रम के प्रारंभ में विद्यालय ( Balika Vidyalaya Inter College Moti Nagar,Lucknow ) की प्रधानाचार्य डॉ. लीना मिश्र ने युवा कलाकार फुलेंद्र पंडित का स्वागत करते हुए उन्हें स्मृति-चिह्न प्रदान किया। उन्होंने कहा कि विद्यालय में इस प्रकार की सांस्कृतिक और रचनात्मक गतिविधियां छात्राओं के व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। रंगमंच केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, वह जीवन को समझने, संवेदनाओं को अनुभव करने और सामाजिक वास्तविकताओं के प्रति जागरूक होने का सशक्त माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के सामने ऐसी प्रस्तुतियां आनी चाहिए जो उन्हें जीवन की चुनौतियों का सामना करने का साहस प्रदान करें और उनके भीतर मानवीय संवेदना तथा आत्मविश्वास को विकसित करें।
इसके पश्चात फुलेंद्र पंडित ने ‘सूरज’ एकल नाटक प्रस्तुत किया। नाटक का मुख्य पात्र सूरज एक अनाथ बालक है, जो सड़क किनारे फुटपाथ पर बोतलें और कबाड़ बीनकर किसी प्रकार अपना जीवनयापन करता है। अभावों और असुरक्षा से घिरे उसके जीवन का लाभ एक गिरोह उठाता है। उसे नशीला भोजन खिलाकर ईंट-भट्ठे पर बंधुआ मजदूर के रूप में काम करने के लिए विवश कर दिया जाता है। वहां उसे शारीरिक और मानसिक यातनाओं का सामना करना पड़ता है। उसके सामने जीवन जैसे एक अंधेरी सुरंग में बदल जाता है, जहां भविष्य की कोई स्पष्ट संभावना दिखाई नहीं देती। नाटक की कथा उस समय निर्णायक मोड़ लेती है जब सूरज एक अवसर पाकर ईंट-भट्ठे से भाग निकलता है। यह पल केवल उसके स्थान परिवर्तन का नहीं, बल्कि उसके जीवन में स्वतंत्रता और आशा के पुनर्जन्म का प्रतीक बन जाता है। भागते हुए सूरज की मुलाकात एक ऐसे संवेदनशील व्यक्ति से होती है, जो उसके भीतर छिपी प्रतिभा को पहचानता है। वह उसे केवल पढ़ना-लिखना ही नहीं सिखाता, बल्कि उसके भीतर दबे कलाकार बनने के स्वप्न को भी जीवित करता है।

धीरे-धीरे सूरज अपनी प्रतिभा को पहचानता है, स्वयं पर विश्वास करना सीखता है और जीवन की कठिन परिस्थितियों से निकलकर अपने लिए एक नई राह बनाने की दिशा में आगे बढ़ता है। ‘सूरज’ मूलतः एक ऐसे बालक की कहानी है जिसकी जिंदगी अभाव, शोषण और पीड़ा से होकर आशा, शिक्षा और आत्मविश्वास की ओर बढ़ती है। नाटक यह संदेश देता है कि किसी बच्चे का वर्तमान उसकी अंतिम नियति नहीं होता। यदि उसे शिक्षा, संरक्षण, अवसर और संवेदनशील मार्गदर्शन मिल जाए तो उसके भीतर छिपी प्रतिभा को नई दिशा दी जा सकती है। हर बच्चे के भीतर एक संभावित ‘सूरज’ होता है, जिसे केवल परिस्थितियों की धूल से ढक जाने के कारण अपनी चमक खोनी पड़ती है। आवश्यकता इस बात की है कि समाज उस प्रतिभा को पहचानने और उसे प्रकाश में आने का अवसर देने के लिए आगे आए।
फुलेंद्र पंडित ने इस एकल प्रस्तुति में बिना किसी अतिरिक्त तामझाम, अनावश्यक मंच-सज्जा अथवा दिखावे के अपने अभिनय-कौशल के माध्यम से विभिन्न पात्रों और परिस्थितियों को जीवंत कर दिया। उनकी आवाज के उतार-चढ़ाव, चेहरे के भाव, शारीरिक मुद्राएं, संवाद-अभिनय और भाव-भंगिमाओं ने नाटक को प्रभावशाली और संवेदनात्मक बना दिया। एक ही कलाकार द्वारा विभिन्न चरित्रों और मनःस्थितियों को मंच पर साकार करना अपने आप में चुनौतीपूर्ण था, जिसे उन्होंने अत्यंत सहजता और प्रभावशीलता के साथ प्रस्तुत किया। लगभग एक घंटे तक दर्शक छात्राएं पूरी तन्मयता के साथ प्रस्तुति से जुड़ी रहीं। नाटक के दौरान छात्राओं ने न केवल प्रस्तुति का आनंद लिया, बल्कि उसके सामाजिक और मानवीय संदेश को भी गंभीरता से ग्रहण किया।

कई प्रसंगों में सभागार में गहरी संवेदना और मौन दिखाई दिया, जबकि संघर्ष के बीच सूरज के आत्मविश्वास और आगे बढ़ने के प्रसंगों ने छात्राओं में उत्साह का भाव उत्पन्न किया। प्रस्तुति समाप्त होने के बाद छात्राओं ने कलाकार के अभिनय और नाटक की विषयवस्तु की मुक्त कंठ से सराहना की। कार्यक्रम के अवसर पर सीमा आलोक वार्ष्णेय, माधवी सिंह, मंजुला यादव, मीनाक्षी गौतम, प्रतिभा रानी एवं रितु सिंह सहित विद्यालय की शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं। सभी ने फुलेंद्र पंडित की अभिनय प्रतिभा, उनकी प्रस्तुति की सादगी और नाटक के सामाजिक सरोकार की विशेष प्रशंसा की।
विद्यालय ( Balika Vidyalaya Inter College Moti Nagar,Lucknow ) की प्रधानाचार्य डॉ. लीना मिश्र ने कलाकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ‘सूरज’ जैसी प्रस्तुतियां विद्यार्थियों को केवल कला से परिचित नहीं करातीं, वे उन्हें जीवन की वास्तविकताओं से भी जोड़ती हैं। उन्होंने कहा कि छात्राओं के भीतर संवेदनशीलता, साहस, आत्मविश्वास और रचनात्मक दृष्टि का विकास शिक्षा का महत्वपूर्ण उद्देश्य है और ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रम इस उद्देश्य को सार्थक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम का समापन कलाकार फुलेंद्र पंडित के प्रति आभार एवं उनकी प्रस्तुति की सराहना के साथ हुआ। ‘सूरज’ की कहानी ने छात्राओं के बीच यह संदेश गहराई से स्थापित किया कि परिस्थितियां मनुष्य की राह को कठिन अवश्य बना सकती हैं, उसकी संभावनाओं को समाप्त नहीं कर सकतीं। जीवन में अंधेरा कितना भी गहरा हो, संघर्ष, शिक्षा, संवेदना और आत्मविश्वास के सहारे अपने भीतर के सूरज को जगाया जा सकता है।
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