लखनऊ . आचार्यशंकर भारतोद्भासक मण्डल एवं नवयुग कन्या महाविद्यालय लखनऊ के संस्कृत एवं हिन्दी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आज 21 अगस्त को पूज्यपाद धर्मसम्राट स्वामी श्री करपात्री जी महाराज एवं कलिपावनावतार पूज्यपाद गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज के पावन प्राकट्योत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित चित्रकारी, निबन्ध एवं भाषण प्रतियोगिता का समारोप एवं पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का प्रारंभ दीप प्रज्जवलन तथा सरस्वती मां की प्रतिमा एवं गोस्वामी तुलसीदास एवं स्वामी करपात्री जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ प्रारंभ हुआ। दीप प्रज्वलन मंत्र तथा सरस्वती वंदना स्नातक द्वितीय वर्ष की छात्रा मुस्कान मिश्रा द्वारा किया गया। कार्यक्रम में आए हुए अतिथियों का स्वागत अंगवस्त्रम, स्मृति चिन्ह, रामचरितमानस तथा पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक पौध देकर किया गया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि माननीय मनोज जी सह क्षेत्र संपर्क पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र उपस्थित रहे।कार्यक्रम की संरक्षिका व शंकर उद्भासक मंडल की मार्गदर्शिका, महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो मंजुला उपाध्याय , शंकर उद्भासक मंडल की मातृ प्रकल्प श्रीप्रकल्प प्रमुख एवं कार्यक्रम की संयोजिका प्रो वन्दना द्विवेदी उपस्थित रहीं। मुख्य अतिथि माननीय मनोज जी ने कहा कि तुलसी की वाणी हमें मर्यादा का मार्ग सिखाती है करपात्री जी की तपस्या हमें धर्म निष्ठा की प्रेरणा देती है विशेष रूप से युवा पीढ़ी के लिए इन दोनों महापुरुषों का जीवन अत्यंत प्रेरणादायक है।आज आवश्यकता है कि हम ज्ञान विज्ञान को स्वीकार करते हुए अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहे और भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण और संवर्धन में अपना योगदान देते रहे । भारतीय संस्कृति का प्रकाश हमारे जीवन तथा आने वाली पीढ़ियों को युगों युगों तक आलोकित करता रहे।
महाविद्यालय की प्राचार्य प्रोफेसर मंजुला उपाध्याय ने अपने उद्बोधन में कहा कि तुलसीदास जी हमें बताते हैं कि महानता केवल ज्ञान में नहीं बल्कि चरित्र ,आचरण में होनी चाहिए स्वामी करपात्री जी हमें यह प्रेरणा देते हैं कि अपनी संस्कृति और शास्त्रों का अध्ययन श्रद्धा के साथ साथ विवेक और तर्क के साथ भी किया जाना चाहिए । तुलसीदास जी की दृष्टि में धर्म का मूल लोकमंगल है “परहित सरिस धर्म नहिं भाई पर पीड़ा सम नहिं अध माई।”

हम सभी इन्हीं महापुरुषों की संतान हैं।शंकर उद्भाशक मंडल के प्रमुख रामबाबू पांडे ने स्वामी करपात्री जी और गोस्वामी तुलसीदास जी के जीवन चरित्र पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए कहा कि तुलसीदास जी ने राम के चरित्र को जन-जन के ह्रदय तक पहुंचाने का कार्य किया स्वामी करपात्री जी ने धर्म एवं शास्त्र के उस महान परंपरा की वैचारिक रूप से रक्षा की जिसके केंद्र में धर्म सत्य मर्यादा एवं लोकमंगल की भावना थी । मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीरामचंद्र जी का जीवन चरित्र ऐसा अद्भुत है जो पांच हजार वर्षों में ऐसा धवल चरित्र हमें पढ़ने को मिलता है जिसके समतुल्य किसी अन्य महापुरुष का प्राप्त नहीं होता है अपितु भूतों न भविष्यत है ।हम सभी को इनके जीवन चरित्र से सीख लेना चाहिए।

कार्यक्रम संयोजिका प्रो वंदना द्विवेदी जी ने संपूर्ण विषय वस्तु की स्थापना तथा कार्यक्रम की रूपरेखा के बारे में अवगत कराया। शंकर उद्भाशक मंडल के महासचिव डॉक्टर विशाल शुक्ला ने धर्मसम्राट स्वामी श्री करपात्री जी के धवल चरित्र, जीवन और उनकी कृतियों पर सारगर्भित शब्दों में विचार रखा।

निबंध, चित्रकारी व भाषण प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय, तृतीय व सांत्वना पुरस्कार पाने वाले प्रतिभागी को ३०००,२०००,१००० व ५०० रुपए नकद, प्रमाण पत्र और स्मृति चिन्ह, माननीय मुख्य अतिथि एवं प्राचार्या के कर कमल द्वारा प्रदान किया गया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से प्रोफेसर संगीता कोतवाल डॉ मेजर मनमीत कौर सोढ़ी, प्रोफेसर संगीता शुक्ला प्रोफेसर सुषमा त्रिवेदी, प्रोफेसर नीतू सिंह,डॉक्टर ऐश्वर्या सिंह,श्रीमती नीलम यादव ,प्रो सीमा पाण्डेय,डॉ अपूर्वा अवस्थी, डॉ अंकिता पांडेय, डॉ मेघना यादव, , योगेश तिवारी, हरि वर्मा सहित लगभग 200 से अधिक छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया। अंत में कार्यक्रम की संरक्षिका प्रो मंजुला उपाध्याय जी ने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ अपूर्वा अवस्थी द्वारा किया गया।
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