

- नाटककार, समीक्षक एवं कवि प्रो. रवींद्र प्रताप सिंह ने हिंदी के राजभाषा के रूप में विकास हेतु “अविरल” मॉडल प्रस्तुत किया।
लखनऊ, 27 ,सितंबर , क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय एवं भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हिंदी संगोष्ठी, हिन्दी पखवाड़ा समापन समारोह एवं पुरस्कार वितरण कार्यक्रम में मुख्य वक्त के रूप में बोलते हुए नाटककार, समीक्षक एवं कवि प्रो. रवींद्र प्रताप सिंह ने हिंदी के राजभाषा के रूप में विकास हेतु “अविरल” मॉडल प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर प्रो. रवींद्र प्रताप सिंह ने कहा कि हिंदी अत्यंत सशक्त एवं वैज्ञानिक भाषा है। महाकाव्य शक्ति से संपन्न यह भाषा भाषा न केवल हमारी सांस्कृतिक धरोहर है, बल्कि यह हमें एक सूत्र में भी बांधती है। उन्होंने कहा कि “अविरल” मॉडल के माध्यम से हम हिंदी भाषा को और अधिक समृद्ध बना सकते हैं और इसके विकास के लिए नए अवसर प्रदान कर सकते हैं। अविरल में उन्होंने पारिवेशिक अवलोकन , विकास एवं विमर्श रचनाकर्म एवं लयबद्ध विकास पर बल दिया । उन्होंने बताया कि साहित्य ,कार्यालय प्रयोग , पत्रकारिता से लेकर राजनीति ,राजनय ,विज्ञान आदि क्षेत्रों में हिंदी के विभिन्न नवाचारी प्रयोग हो रहे है ।

कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों और प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए प्रो. रवींद्र प्रताप ने कहा कि हिंदी भाषा का विकास हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है और हमें इसके लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए। कार्यक्रम में पोलैंड , श्रीलंका , तजाकिस्तान आदि देशों के हिंदी अध्येता , क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के क्षेत्रीय निदेशक एवं अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
