लखनऊ , 10 जून , लखनऊ विश्वविद्यालय में 169 शिक्षकों प्रमोशन करने के बाद लखनऊ विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (LUTA ) द्वारा कुलपति प्रोफेसर जेपी सैनी के स्वागत -सम्मान में किए गए कार्यक्रम ने उन सभी आरोपों को झुठला दिया है कि LUTA सत्ता समर्थक है. पूर्व कुलपति प्रोफेसर आलोक कुमार राय के कार्यकाल में भी LUTA के पदाधिकारियों पर ऐसे ही आरोप लगाकर न केवल उन्हें अपमानित करने की कोशिश की गई थी, बल्कि उनके द्वारा शुरू किए गए शिक्षक हितों के कार्यक्रमों में भी बाधा उत्पन्न की गई ,
यही सिलसिला कुलपति प्रोफेसर जेपी सैनी के शुरुआती दिनों में भी हुआ लेकिन LUTA के अध्यक्ष प्रोफेसर अनित्य गौरव और महामंत्री प्रोफेसर राम मिलन ने इन आरोपों की परवाह किए बिना शिक्षक हितों के प्रति अपने समर्पण और संवेदनशीलता के साथ काम करना जारी रखा. LUTA के प्रयास का ही परिणाम है कि 169 शिक्षकों का प्रमोशन हुआ है . इनमें भी वे शिक्षक भी शामिल हैं जिन्हें लंबे समय से अपनी प्रमोशन का इंतजार था और इनमें LUTA के पूर्व पदाधिकारी भी शामिल हैं,
कुलपति प्रोफेसर जेपी सैनी के इस निर्णय से उन शिक्षकों को भी गौरव की अनुभूति हुई है , जिसके वे हकदार थे . दरअसल सेवाकाल में प्रमोशन , वेतन ही व्यक्ति को मानसिक सुख और संतुष्टि प्रदान करती हैं . इसलिए उन शिक्षकों को भी अपना हक मिला और वह अब मानसिक रूप से संतुष्ट होकर आत्मीयता के साथ अपने शोध और जिम्मेदारी वाले कार्य करेंगे . LUTA के इस कार्यक्रम ने विश्वविद्यालय में सकारात्मक राजनीति का भी संदेश दिया है कि हर कार्य को केवल लड़कर , विरोध करके या फिर नकारात्मक राजनीति करके आगे नहीं किया जा सकता है . खास तौर पर शैक्षिक परिसरों में जहां पठन-पाठन , अनुशासन और संयम का पाठ पढ़ा जाता है , वहां पर नकारात्मक राजनीति के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए और सुखद है विश्वविद्यालय शिक्षक संघ( LUTA ) ने यह काम किया है.
विश्वविद्यालय शिक्षक संघ ( LUTA ) का मुख्य कार्य शिक्षकों के हित के लिए आवाज उठाना, उनके हक दिलाना उनके मान सम्मान , प्रतिष्ठित पद को बनाए रखना ही है लेकिन कई बार ऐसी भी घटनाएं- दुर्घटनाएं होती हैं जिनमें LUTA की भूमिका सीमित हो जाती है. वास्तव में लखनऊ विश्वविद्यालय शिक्षक संघ ( LUTA ) द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम न केवल विश्वविद्यालय की गरिमा व मान सम्मान को स्थापित करने वाला है, बल्कि प्रोफेसर जेपी सैनी द्वारा शिक्षकों के प्रमोशन से जुड़े फैसले लेकर शिक्षकों के मान सम्मान को बनाए रखने का भी है, उम्मीद की जानी चाहिए कि लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर में न केवल शिक्षकों की सकारात्मक राजनीति होगी बल्कि छात्रों के हितों में भी ठीक उसी प्रकार से सकारात्मक फैसला लिए जा सकेंगे जिससे छात्रों के मान – सम्मान और स्वाभिमान के साथ-साथ उनके उज्जवल भविष्य की सीमाएं बढ़े ,
वर्तमान में लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्रों के आंदोलन को समर्थन देने वालों की भीड़ है . छात्र आंदोलन में भी विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए अपना एक कदम बढ़ाकर छात्रों से जुड़ी समस्याओं के हल करने का समय है , छात्रों का भविष्य, उनकी मांगों से जु जुडा है , इसलिए नकारात्मक राजनीति या फिर अनुशासनहीनता के स्थान को जगह न देकर के सकारात्मक राजनीति की ओर विश्वविद्यालय को कदम बढ़ाए जाने चाहिए , ऐसा होने से विश्वविद्यालय अपने उद्देश्यों की पूर्ति कर सकेगा और राजधानी के इस विश्वविद्यालय के नाम को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी. विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रोफेसर अनित्य गौरव और महामंत्री प्रोफेसर राम मिलन के नेतृत्व और प्रयास से विश्वविद्यालय के शिक्षकों को एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है , इसे बनाए रखना, संभालना और पुनः अपने हक और अधिकार के लिए आगे बढ़ते रहना ही इस कार्यक्रम का निहितार्थ है.
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