

- कार्यक्रम को संचालित करते हुए जयंत सिंह क्षत्रिय ने कहा कि जीवन में सपने तो सारे युवा देखते हैं लेकिन कुछ युवा ही सपनों को साकार कर सकते हैं.
- शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय अमौरा के प्राचार्य आशीष मिश्रा ने बताया कि विवेकंदजी के गुरु रामकृष्ण परमहंस ने बताया कि भगवान सभी जगह होते है और जैसा हम सभी को देखते है.
अकलतरा, 15 सितम्बर , विवेकानंद केन्द्र कन्याकुमारी शाखा जांजगीर चांपा मध्य प्रांत द्वारा शासकीय डॉ इंद्रजीत सिंह महाविद्यालय अकलतरा ( Government Dr.Indrajeet Singh College Janjgir Champa ) में संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमे महाविद्यालय के छात्र छात्राओं को चर्चा करते हुए कार्यक्रम के प्रमुख वक्त एवं राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के तीन जिले के सह विभाग कार्यवाह ,कोरबा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ माननीय लक्ष्मीनारायण सोनी जी ने बताया कि भारतीय संस्कृति और सभ्यता को हमारे सनातन धर्म के बारे में शिकागो के धर्म सम्मेलन में शामिल होकर भारत का प्रतिनिधित्व किया था और 1893 में बताया कि मैं ऐसे देश से आया हूं जहां पेड़ पौधे की पूजा करते है क्योंकि वो जानते है कि जो हम स्वास लेते है ये ऑक्सीजन इन्हीं पेड़ पौधे के पत्तों के द्वारा निकलती है।हम अपने माता पिता और गुरुओं के सम्मान उनके इजाजद लेकर सनातन धर्म में भगवान राम जैसे शिक्षा प्राप्त करने की आवश्यकता है।भारत का भाग्योदय भारत के असली भाग्यविधाता विवेकानंद ही है जो जन जन के हृदय में बसे थे और जन जन को चेतना प्रदान करने के लिए विश्व का भ्रमण किया और भारत के धार्मिक आध्यात्मिक और गुरुकुल परंपरा को पूरे विश्व को बताया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय अमौरा के प्राचार्य आशीष मिश्रा ने बताया कि विवेकंदजी के गुरु रामकृष्ण परमहंस ने बताया कि भगवान सभी जगह होते है और जैसा हम सभी को देखते है वैसे ही मुझे भी भगवान साक्षात् दिखाई पड़ता है सभी दिन दुखियों दिन हीन और दलित सभी लोगों में समाहित है उस दिन से विवेकानंदजी ने भी भारत के सभी दिन दुखियों दलितों की सेवा करने में अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया और जनमानस की सेवा करने में लगा दिया।
कार्यक्रम को संचालित करते हुए जयंत सिंह क्षत्रिय ने कहा कि जीवन में सपने तो सारे युवा देखते हैं लेकिन कुछ युवा ही सपनों को साकार कर सकते हैं देखे हुए सपनों को साकार करने का उपाय क्या है जीवन की समस्या से कैसे जूझना चाहिए सपने भी कैसे देखते हैं स्वामी विवेकानंद की विदेशी शिष्य जो भारत में मार्केट नोबल भगिनी निवेदिता के नाम से प्रसिद्ध हुई जिसे हम प्रेरणा लेते हैं कि उनकी जो सोच थी भारतीय युवा जीवन के हर क्षेत्र में जिस भी क्षेत्र में वह जाना चाहता है चमक उठाना है उसने अपना योगदान करना है युवाओं को हर क्षेत्र में राष्ट्रीयता और उत्कृष्टता का पाठ पढ़ने है।उन्होंने विवेकानंद केन्द्र के बारे में बताया कि विवेकानंदजी ने कन्याकुमारी में जाकर तीन समुद्र के संगम में तीन दिन तक ध्यान लगाकर बोधिस्थली कन्याकुमारी केंद्र की स्थापना का विचार आया और जिसको एकनाथ रानाडे जी ने उसको साकार किया था। उन्होंने बताया कि कठोपनिषद का मूल मंत्र – “उतिष्ठत जागृत प्राप्य करानी बोधन “अर्थात उठो जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य ना मिल जाए ।स्वामी विवेकानंद जी ने इस देश की युवाओं को यह मंत्र दिया था।
अंत में महाविद्यालय ( Government Dr.Indrajeet Singh College Janjgir Champa ) के प्राध्यापक उपेन्द्र वर्मा जी ने सभी अतिथियों का आभार प्रकट किया।कार्यक्रम में अमित गौराहा जी जिला प्रमुख राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ जांजगीर चांपा ओमप्रकाश साहूजी राहुल सिंह दामोदर चौधरी रमेश नामदेव शिवेश मिश्रा सहित एन एस एस के समस्त छात्र छात्राओं सहित महाविद्यालय के प्राध्यापक उपस्थित रहे।
