

- मुख्य अतिथि प्रो. सतीश चंद्र द्विवेदी जी ने कहा कि हिंदी केवल भाषा ही नहीं अपितु संस्कारों की जननी है।
- प्रो. पवन अग्रवाल ने सभा का मार्गदर्शन किया और सर्वप्रथम उन्होंने सभी को हिंदी दिवस की शुभकामनाएं दी।
- ‘हिंदी पखवाड़ा उत्सव 2025’ (16 सितंबर 2025 से 30 सितंबर 2025) कार्यक्रम में निबंध, कविता,सुलेख, टंकण प्रतियोगिता व हिंदी के विविध उपविषयों ‘हिंदी कार्यशाला’ का आयोजन होना सुनिश्चित हुआ है।
लखनऊ, 17 सितम्बर , बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में हिंदी प्रकोष्ठ, द्वारा ‘हिंदी दिवस’ के उपलक्ष्य पर ‘हिंदी पखवाड़ा उत्सव 2025’ का शुभारंभ ,16 सितम्बर,2025 को पुराना प्रशासनिक भवन(सभागार), बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ परिसर में किया गया। आज उद्घाटन के कार्यक्रम का विषय राजभाषा हिंदी: एक पहचान रहा जिस पर सभी वक्ताओं ने अपने अपने विचार प्रस्तुत किए.
कार्यक्रम में मुख्यअतिथि के रूप में प्रोफेसर सतीश चंद्र द्विवेदी( पूर्व बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री,स्वतंत्र प्रभार,उत्तर प्रदेश सरकार )और बीज वक्ता के रूप में सभापति,भारतीय हिंदी परिषद्,प्रयाग व विभागाध्यक्ष हिंदी विभाग लखनऊ विश्वविद्यालय प्रो.पवन अग्रवाल व सारस्वत अतिथि के रूप में राष्ट्रीय सह -संगठन मंत्री, अखिल भारतीय इतिहास संकलन श्री संजय जी उपस्थित रहे।कार्यक्रम की अध्यक्षता माननीय कुलपति बी.बी.ए.यू,प्रोफेसर राजकुमार मित्तल ने की।अतिथियों का स्वागत वक्तव्य कुलसचिव बी.बी.ए.यू ,व कार्यक्रम सह- संरक्षक डॉ अश्विनी कुमार सिंह जी ने किया।

कार्यक्रम का संयोजन सहायक निदेशक (राजभाषा) बी.बी.ए.यू, डॉ.बलजीत कुमार श्रीवास्तव द्वारा किया गया। बीज वक्ता प्रो. पवन अग्रवाल ने सभा का मार्गदर्शन किया और सर्वप्रथम उन्होंने सभी को हिंदी दिवस की शुभकामनाएं दी। उन्होंने आजादी के 75 वर्ष बीत जाने पर भी हिंदी के पूर्णतः राजभाषा पद पर प्रतिष्ठित ना होने पर चिंता व्यक्त की! प्रो.अग्रवाल जी ने हिंदी को भारत की राष्ट्रीय एकता की संवाहिका कहा,भारतीय बोलियों का समुच्चय हिंदी को सशक्त करती है, उनके अनुसार क्षेत्रीय भाषाएं ही भाषा का संबल है! उन्होंने हिंदी को स्वतन्त्रता आंदोलन की भाषा बताया और कहा कि आज हिंदी रोजगार की भाषा बन रही है,अंत में उन्होंने कहा आज हिंदी राजभाषा से वैश्विक भाषा की ओर जा रही है।

मुख्य अतिथि प्रो. सतीश चंद्र द्विवेदी जी ने कहा कि हिंदी केवल भाषा ही नहीं अपितु संस्कारों की जननी है। उन्होंने कहा हिंदी भारत की पहचान है,हिंदी भारत की आत्मा है ! हिंदी का शब्दकोश सम्पन्न है और सरकार हिंदी के साथ क्षेत्रीय भाषाओं को लगातार बढ़ावा देने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि हिंदी को राष्ट्र भाषा बनाने का सपना गांधी जी का था और आने वाले दिनों में यह अवश्य पूर्ण होगा।

सारस्वत अतिथि वक्ता संजय जी ने कहाँ विश्व के जो संपन्न देश है वो अपनी मातृभाषा में बात करते हैं काम करते हैं ,इसलिए आज अगर भारत को आर्थिक संपन्न करना है तो अपनी भाषा व मातृभाषा में काम करने की जरूरत है! उन्होंने कहा हमारी कल्पना की भाषा मातृभाषा की होती है, तो अगर हम उसी भाषा में काम करते हैं तो वह अधिक मौलिक व उत्तम रहेगा! आज हमें अपने परिवारों में हिंदी भाषा की प्रयोग की अधिक आवश्यकता है, क्योंकि अगर हम घर से कटेंगे तो संस्कृति से दूर होते जाएंगे!
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजकुमार मित्तल जी ने हिंदी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए हिंदी को देश की पहचान बताते हुए कहा कि राष्ट्र भाषा राष्ट्रीय एकता की द्योतक। उन्होंने कहाँ हिंदी आज आर्थिक विकास की भाषा भी बन गई है, जो देश व विश्व की प्रगति में महत्पूर्ण योगदान दे रहा है!

‘हिंदी पखवाड़ा उत्सव 2025’ (16 सितंबर 2025 से 30 सितंबर 2025) कार्यक्रम में निबंध, कविता,सुलेख, टंकण प्रतियोगिता व हिंदी के विविध उपविषयों ‘हिंदी कार्यशाला’ का आयोजन होना सुनिश्चित हुआ है। व साथ ही एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘भारतीय ज्ञान परम्परा और हिंदी साहित्य’ विषय पर व कवि सम्मेलन कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा! 30 सितंबर 2025 को समापन समारोह व पुरस्कार वितरण का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा ! मंच पर उपस्थित अतिथियों द्वारा ‘हिंदी पखवाड़ा उत्सव- 2025’ कार्यक्रम की रूपरेखा की विवरणिका का लोकार्पण भी किया गया।

इस समारोह का कुशल संचालन डॉ लता बाजपेई सिंह द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अंत में सहायक आचार्य ,हिंदी विभाग, बी.बी.ए.यू. शिवशंकर यादव जी द्वारा सम्माननीय शिक्षाविदो ,साहित्यकारों एवं शोधार्थियों व विद्यार्थियों का आभार ज्ञापन किया गया.
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