कबिरा चिंता क्या करु, चिंता से क्या होय ।
मेरी चिंता हरि करै, चिंता मोहि ना कोय ।।
✍ चिंता चिता के समान है, जो सब कुछ जला कर राख देती है।
✍ डॉक्टर कहते हैं कि महामारी की तरह फैल रही ब्लड प्रेशर और शुगर की बीमारी भी, अधिकांश मामलों में अत्यधिक चिंता करने की वजह से है ।
✍ सिर्फ चिंता करने से क्या कार्य हो जाता है या सफलता मिल जाती है ?
✍ हमे तो अपने कार्य को अपने अथक कर्मो से पूरे करने का भरोसा एवं प्रयास करना चाहिए ।
✍ अच्छे मन के साथ श्रेष्ठ प्रयासों से किये गए कार्यों को पूरा करने में ईश्वर अदृश्य रूप से मदद भी करता है, बस भरोसा होना चाहिए ।
