- आईआईटी खड़गपुर के 75वें स्थापना दिवस पर लखनऊ में लेक्चर सीरीज का शुभारंभ,‘एआई, ट्रस्ट एवं सिक्योरिटी’ पर हुई चर्चा
लखनऊ, आईआईटी खड़गपुर के 75वें स्थापना दिवस (प्लेटिनम जुबली) के अवसर पर आईआईटी खड़गपुर एलुमनाई एसोसिएशन, लखनऊ चैप्टर द्वारा विशेष लेक्चर सीरीज का शुभारंभ किया गया। इस लेक्चर सीरीज के प्रथम व्याख्यान का विषय “एआई, ट्रस्ट एवं सिक्योरिटी: नेक्स्ट जेनरेशन ऑफ टेक्नोलॉजी की ओर बढ़ते कदम” रहा।
ऐतिहासिक हिजली डिटेंशन कैंप में 18 अगस्त 1951 को स्थापित आईआईटी खड़गपुर देश का पहला भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान है। संस्थान इस वर्ष अपनी स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर प्लेटिनम जुबली मना रहा है। इस अवसर पर उच्चस्तरीय नेतृत्व संवाद, तकनीकी प्रदर्शनियों और विशेष अकादमिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।
लखनऊ चैप्टर की इस लेक्चर सीरीज के प्रथम सत्र को श्री आशीष तिवारी, आईपीएस ने संबोधित किया। श्री तिवारी वर्तमान में उप महानिरीक्षक (डीआईजी), तकनीकी सेवाएं, उत्तर प्रदेश पुलिस, लखनऊ के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, तकनीक और डिजिटल ट्रस्ट के तेजी से बदलते परिदृश्य पर अत्यंत रोचक एवं विचारोत्तेजक प्रस्तुति दी।

अपने व्याख्यान में श्री तिवारी ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस किस प्रकार विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से बदलाव ला रहा है तथा इसके बढ़ते उपयोग से उत्पन्न अवसरों और चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने विशेष रूप से पुलिसिंग एवं कानून-व्यवस्था में एआई की बढ़ती भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि एआई अपराध की रोकथाम, जांच, सुरक्षा, डेटा विश्लेषण तथा पुलिस सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

श्री तिवारी ने बताया कि “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब केवल एक तकनीकी उपकरण नहीं रह गया है, बल्कि यह हमारे काम करने, सोचने और निर्णय लेने के तरीकों को व्यापक रूप से प्रभावित कर रहा है। इसका प्रभाव केवल ऑटोमेशन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानव क्षमताओं को नए स्तर तक ले जाने की क्षमता रखता है। जैसे-जैसे AI अधिक सक्षम होता जाएगा, मनुष्य की भूमिका केवल कार्य करने तक सीमित न रहकर इन बुद्धिमान प्रणालियों को दिशा देने और उनके साथ काम करने की होगी। हालांकि, इसके साथ साइबर सुरक्षा, रोजगार, मानवीय नियंत्रण और जिम्मेदारी से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न भी सामने आते हैं। इसलिए चर्चा केवल इस बात पर नहीं होनी चाहिए कि AI क्या कर सकता है, बल्कि इस बात पर भी होनी चाहिए कि हमें उसे क्या करने की अनुमति देनी चाहिए।”

व्याख्यान को उपस्थित श्रोताओं ने बेहद सराहा और इसे तकनीक के भविष्य की दिशा को समझने वाला एक ज्ञानवर्धक एवं आंखें खोल देने वाला सत्र बताया। व्याख्यान के बाद श्री तिवारी ने प्रतिभागियों के साथ संवाद किया तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सुरक्षा, डिजिटल ट्रस्ट, तकनीक और पुलिसिंग में इसके उपयोग से जुड़े विभिन्न प्रश्नों एवं जिज्ञासाओं का विस्तार से उत्तर दिया।

कार्यक्रम के आयोजन में आईआईटी खड़गपुर एलुमनाई एसोसिएशन, लखनऊ चैप्टर के पदाधिकारियों एवं सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। चैप्टर के अध्यक्ष प्रो. विनोद चंद्र, उपाध्यक्ष डॉ. सुजीत प्रताप सिंह, श्री राहुल मिश्रा, प्रो. ए. जे. अंसारी तथा कमोडोर अशोक भाल ने कार्यक्रम के आयोजन एवं समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कार्यक्रम का आयोजन द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स, कैसरबाग, लखनऊ में किया गया। इसमें आईआईटी खड़गपुर एलुमनाई एसोसिएशन, लखनऊ चैप्टर के बड़ी संख्या में पूर्व छात्र-छात्राओं के साथ-साथ विभिन्न संस्थानों के शिक्षाविदों, पेशेवरों एवं अन्य गणमान्य लोगों ने भाग लिया।

कार्यक्रम के अंत में आईआईटी खड़गपुर एलुमनाई एसोसिएशन, लखनऊ चैप्टर के सचिव महेंद्र शुक्ला ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए मुख्य वक्ता, आयोजन से जुड़े सभी पदाधिकारियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। लेक्चर सीरीज का यह सफल शुभारंभ लखनऊ में आईआईटी खड़गपुर के पूर्व छात्रों द्वारा ज्ञान के आदान-प्रदान, पेशेवर संवाद तथा उभरती तकनीकों के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह आयोजन देश के प्रथम आईआईटी की समृद्ध विरासत और 75 वर्षों की गौरवशाली यात्रा को भी रेखांकित करता है।
यह भी पढ़ें
