- लखनऊ में कलश यात्रा के साथ आरंभ हुई नौ दिवसीय श्रीराम कथा
लखनऊ, 02 जून । जगद्गुरु रामभद्राचार्य (Jagadguru Rambhadracharya Ji ) ने सोमवार को लखनऊ में आरंभ हुई अपनी 1423वीं श्रीराम कथा के प्रथम दिवस में पंचवटी प्रसंग का वर्णन करते हुए लक्ष्मण द्वारा भगवान राम से पूछे गए पांच महत्वपूर्ण प्रश्नों एवं उनके उत्तरों की व्याख्या की। उन्होंने (Jagadguru Rambhadracharya Ji ) नवधा भक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि श्रवण, कीर्तन, स्मरण, पादसेवन सहित भक्ति के नौ स्वरूप मानव हृदय को ईश्वर से जोड़ने का माध्यम हैं।
सीतापुर रोड स्थित बृज की रसोई परिसर में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के पहले दिन सोमवार को उन्होंने (Jagadguru Rambhadracharya Ji ) वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज विश्व अभूतपूर्व तनाव और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। उन्होंने (Jagadguru Rambhadracharya Ji ) कहा कि भारत सुरक्षित और सशक्त है क्योंकि यह भगवान की कृपा और प्रेम से अनुप्राणित राष्ट्र है।

कथा प्रारंभ होने से पूर्व भव्य कलश एवं पोथी यात्रा निकाली गई। बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिलाओं ने सिर पर मंगल कलश धारण कर गाजे-बाजे और जय श्रीराम के उद्घोष के साथ कथा स्थल तक यात्रा की तथा विधिवत कलश स्थापना की। विधायक डा. नीरज बोरा ने सपरिवार गुरुपाद पूजन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
अपने उद्बोधन में रामभद्राचार्य (Jagadguru Rambhadracharya Ji ) ने कहा कि राष्ट्र की संस्कृति और अस्मिता की रक्षा प्रत्येक नागरिक का दायित्व है तथा भारत को राममय बनाना उनका संकल्प है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की सराहना करते हुए बताया कि आगामी 14 जनवरी से एक गुरुकुलम् की स्थापना की जा रही है, जिसका उद्देश्य भारतीय संस्कृति और संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार को नई गति देना है। उन्होंने कहा कि चित्रकूट स्थित इस संस्थान में अध्ययन-अध्यापन के साथ-साथ विश्वभर के लोगों को ऑनलाइन माध्यम से संस्कृत शिक्षा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
रामजन्मभूमि प्रकरण का उल्लेख करते हुए उन्होंने (Jagadguru Rambhadracharya Ji ) कहा कि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान उनके द्वारा प्रस्तुत सात दिनों की गवाही ने अनेक महत्वपूर्ण प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर प्रदान किए। उन्होंने कहा कि श्रीराम मंदिर का निर्माण भारतीय आस्था और सांस्कृतिक चेतना की ऐतिहासिक विजय का प्रतीक है। कथा स्थल पर मौजूद राम जन्मभूमि आदि प्रकरणों से जुड़ी रहीं वरिष्ठ अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री की प्रशंसा करते हुए उन्होंने (Jagadguru Rambhadracharya Ji ) कहा कि भोजशाला का निर्णय हिंदुओं के पक्ष में आना बहुत बड़ी जीत है। मैं भोजशाला तब जाऊंगा जब लंदन से मां सरस्वती की प्रतिमा भारत वापस आ जाएगी।

कथा के दौरान उन्होंने (Jagadguru Rambhadracharya Ji ) देश में घटित हाल की बकरीद वाली घटना पर भी अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए समाज से सजग एवं आत्मरक्षा के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध समाज को संगठित होकर खड़ा होना चाहिए तथा राष्ट्र और संस्कृति की रक्षा के लिए सतत प्रयास करना चाहिए।
कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। इस अवसर पर आयोजक संस्था उत्सव के पदाधिकारी, भारत लोक शिक्षा परिषद के स्वयंसेवक, श्यामप्रेमी संघ, बोरा फाउण्डेशन सहित विभिन्न सामाजिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य व्यक्तियों ने भी सहभागिता की।
