लखनऊ , लखनऊ विश्वविद्यालय कर्मचारी परिषद के अध्यक्ष राकेश यादव और महामंत्री डाक्टर संजय शुक्ल ने परिषद को भंग करने संबंधी आदेश पर पदाधिकारियों के साथ कुलपति से मिलने के बाद अपनी प्रतिक्रया देते हुए कहा कि कुलसचिव और उनके पिट्ठू कर्मचारी नेताओं ने कल जितना बड़ा गुब्बारा फुलाया था। कुलपति जी ने कर्मचारी परिषद के पदाधिकारी को बुलाकर उनके साथ बैठक करके गुब्बारे की पूरी हवा निकाल दिया। इस पूरे प्रकरण में यह पटाक्षेप हो गया की कौन-कौन कर्मचारी नेता प्रशासन की गोद में बैठकर कर्मचारी हितों की बलि चढ़ा रहे थे।
दोनों नेताओं ने कहा आखिरकार कुलपति जी ने तथाकथित स्वार्थी कर्मचारी नेताओं और कुलसचिव के गठबंधन को बेनकाब कर दिया और उनके तमाम साजिशें करने और परिषद के साथ बैठक स्थगित कराने का कुत्सित प्रयास किया था. मंगलवार को सब नाकाम हो गया. लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन और कर्मचारियों में समन्वय स्थापित हो इसके लिए आवश्यक हो गया है कि यहां निष्पक्ष प्रशासनिक अधिकारी तैनात हो। पिछले तीन दिनों में कुलसचिव के व्यावहार और कृत्य से यह स्पष्ट हो गया कि वह कर्मचारियों में भेदभाव करती हैं। वह अपने पराये की भावना से काम कर रही हैं।

लखनऊ विश्वविद्यालय कर्मचारी परिषद के महामंत्री डाक्टर संजय शुक्ल ने कहा एक तरफ उनके द्वारा निर्देश दिया जाता है कि आउटसोर्सिंग के कर्मचारी किसी अधिकारी के घर में काम नहीं करेंगे दूसरे तरफ उनके ख़ास अधिकारियों के घर में आउटसोर्सिंग के कर्मचारी लगातार जा रहे हैं, जिसे नजरअंदाज किया जा रहा है, इसके अलावा उनके द्वारा यह स्पष्ट आदेश जारी किया गया कि सेवा निवृत कर्मचारियों से आउटसोर्सिंग में काम नहीं लिया जाएगा लेकिन उनके खुद के कार्यालय में ही सेवानिवृत कर्मचारियों से आउटसोर्सिंग का काम लिया जा रहा है , जिसमें कुछ उनके बहुत ही चहेते है। ऐसे में कर्मचारी हितों की रक्षा होना मुश्किल होगा . इन सभी मुद्दों को लेकर लेकर शीघ्र ही लखनऊ विश्वविद्यालय कर्मचारी परिषद प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री, प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा से मिलेगा और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी स्थानांतरण नीति के अनुरोध अनुरूप विश्वविद्यालय में निष्पक्ष प्रशासनिक अधिकारी की तैनाती की मांग करेगा और अगर आवश्यकता हुई तो इसके लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री तथा राज्यपाल को भी ज्ञापन दिया जाएगा।
उन्होंने कथित नेताओं को चुनौती देते हुए कहा कि कुलसचिव के साथ मिलकर कर्मचारी परिषद के संविधान के विपरीत निर्वाचित कार्यकारिणी को भंग करने का फर्जी आदेश निकलवा है तो वैसे ही अपने मनोनयन का भी आदेश निकलवा लें इससे दोनों लोगों का भला हो जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन को चहेता कर्मचारी परिषद मिल जाएगा जो उनकी हाँ में हाँ करने वाला परिषद मिल जाएगा और चुनाव में शिकस्त पाने वाले नेताओं को पद मिल जाएगा।
कर्मचारी परिषद के पदाधिकारियों का स्पष्ट मानना है कि कुलसचिव ने कुलपति के नाम पर कर्मचारी परिषद कार्यकारिणी को भंग करने कुत्सित प्रयास कर घोर अपराध और लोकतंत्र की हत्या का प्रयास किया है। जिससे लखनऊ विश्वविद्यालय कार्यकारिणी परिषद के सभी पदाधिकारी ने एक मत से शून्य घोषित करते हुए निंदा प्रस्ताव पारित किया और कुलपति को उपलब्ध कराया। इस दौरान कुलपति ने स्पष्ट कहा कि उनका काम कर्मचारी परिषद का चुनाव करना नहीं अपितु पठन पाठन और विश्वविद्यालय में शैक्षिक वातावरण बनाना है।
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