लखनऊ , 21 मार्च , विश्व गौरैया दिवस ( World Sparrow Day ) के अवसर पर प्रस्तुतअश्वनी कुमार प्रजापति की यह अनोखी कलाकृति आधुनिक जीवनशैली और प्रकृति के बीच बढ़ती दूरी को दर्शाती है। धातु के चम्मचों से निर्मित गौरैया ( World Sparrow Day ) यह संकेत देती है कि इंसान की कृत्रिम दुनिया ने प्रकृति की सहजता को किस तरह प्रभावित किया है। बिखरे हुए दाने और खाली स्थान यह संदेश देते हैं कि हमने उनके घर और भोजन दोनों छीन लिए हैं।
अश्वनी कुमार प्रजापति की ( World Sparrow Day ) कलाकृति आधुनिक समाज और प्रकृति के बीच के संबंध को दर्शाती है। स्टील और ग्लास से निर्मित पिंजरा मानव द्वारा निर्मित सीमाओं और बंधनों का प्रतीक है, जबकि उसके चारों ओर बैठी गौरैया स्वतंत्रता की उस चाह को व्यक्त करती हैं, जो हर जीव के भीतर स्वाभाविक रूप से मौजूद है। चम्मचों से बनी गौरैया यह संकेत देती हैं कि इंसान की भौतिकता और कृत्रिमता ने प्रकृति के सहज स्वरूप को प्रभावित किया है। फिर भी, इन धातु की आकृतियों में जीवन की झलक दिखाई देती है—मानो वे अपने अस्तित्व और आज़ादी के लिए संघर्ष कर रही हों।

