
- आयोग की लचर कार्य प्रणाली से शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण कार्य बाधित – डॉ जितेंद्र सिंह पटेल
- उ प्र शिक्षा सेवा आयोग में हो शिक्षकों की सेवा सुरक्षा, पदोन्नति एवं कार्यवाहक संस्था प्रधानों को पद का वेतन भुगतान करने का पूर्ववत प्रविधान
- शिक्षण संस्थानों में वर्षो से खाली पड़े पदों हो स्थायी रूप से नियुक्ति यां, मुख्यमंत्री जी करें तत्काल हस्तक्षेप -ओम प्रकाश त्रिपाठी
लखनऊ, 27 सितम्बर , : वर्षों से इंतजार कर रहा बेसिक से हाईयर एजुकेशन विभा गों में रिक्त पदों की भर्ती प्रक्रिया के लिए गठित शिक्षा सेवा आयोग की अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ कीर्ति पांडेय जी का अचानक दिया गया इस्तीफा से भर्ती प्रक्रिया में फिर एक प्रश्नचिन्ह लगता प्रतीत होरहा है। इस्तीफे के लिए व्यक्तिगत कारण की बात सामने आई है, लेकिन इसके पीछे कुछ और बातों से भी इंकार नहीं किया जा सकता है।
इस मामले में अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उ प्र माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रादेशिक अध्यक्ष डॉ जितेंद्र सिंह पटेल एवं संगठन प्रवक्ता ओम प्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि जब आयोग अध्यक्ष महोदया ने पिछले साल एक सितंबर को बड़े खुशनुमा माहौल में कुर्सी संभाली थी, एक साल बाद यानी बाईस सितम्बर 2025 को कौन सी परिस्थितिया पैदा हो गयी कि उन्होंने कुर्सी छोड़ने तक का फैसला ले लिया। गौरतलब हो कि अभी तक नव गठित आयोग ने कोई भर्ती प्रक्रिया को अमलीकरण तक नही किया गया जिससे कोई आरोप प्रत्यारोप के कारण ऐसी स्थिति का उन्हें सामना करना पड़ा हो।

शिक्षक नेताओ ने समग्र रूप से एक शिक्षा सेवा आयोग के गठन और उसके व्यापक कार्य क्षेत्र के संबंध में उत्पन्न होने वाले व्यावहरिक कठिनाईयों की ओर शासन एवं सरकार का ध्यान आकर्षित किया गया था। जाहिर सी बात है कि हर स्तर पर अलग अलग अधिनियमों की व्यवस्था रही है वह कार्य करने मे एक बडी समस्या उत्पन्न कर रहा है। अधियाचन प्रारूप को जारी करने का काम तो दो साल बाद पिछले कुछ दिनों पहले पूरा हो सका है। जिसके आधार पर भर्ती के लिए आयोग को सूचित किया जा ने का कार्य किया जाता है।
शिक्षक नेताओ ने कहा कि इतने वर्षो से आयोग द्वारा भर्ती प्रक्रिया को छोड़कर अन्य प्रकार के शिक्षकों के कार्यो के लिए आयोग नियमावली तक न बनाया जाना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने इस मामले की ओर शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों के साथ साथ सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी का व्यक्तिगत ध्यान आकृष्ट कर मामले में हस्तक्षेप किये जाने की मांग की है। जिससे भर्ती के साथ अन्य सभी कार्यो को धरातल पर प्रदान किया जा सके और शिक्षकों की सेवा सुरक्षा अधिनियमित व्यवस्था के तहत मिल सके।
