

लखनऊ. उत्तर प्रदेश सरकार की संस्था उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान लखनऊ के द्वारा प्रोफेसर विजय कुमार कर्ण को उनकी पुस्तक कविकर्णाभरणम् के लेखन के लिए मिला है। पुरस्कार स्वरूप रुपए 11000 की धनराशि , अंगवस्त्र तथा प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया है। प्रोफेसर कर्ण ने इस पुस्तक में देशभक्ति, संस्कृत भक्ति तथा प्रकृति से सम्बंधित गीतों को संस्कृत भाषा में लिखा है। उन्होंने बताया कि इस पुस्तक को उन हुतात्माओं को समर्पित किया है, जो अज्ञात रह गये। जिन्हें समाज न जान पाये न उनके बलिदान को याद कर रहे हैं।
इस पुस्तक का शीर्षक कवि कर्ण के रचना संसार में आभूषण की तरह है। दूसरे रूप में इस पुस्तक में प्रोफेसर कर्ण द्वारा लिखित ऐसे गीतों का संग्रह है, जो श्रोताओं के कानों को अत्यंत प्रिय लगते हैं। इस पुस्तक की शुभाशंसा प्रो इच्छाराम द्विवेदी ने लिखी है और इसका प्रकाशन रैपिड बुक सर्विस, लखनऊ से हुआ है। पुस्तक की प्राप्ति के लिए प्रोफेसर विजय कुमार कर्ण से संपर्क किया जा सकता है।
पुस्तक के नाम की सार्थकता को इस तरह समझा जा सकता है। उल्लेखनीय है कि वर्तमान में प्रोफेसर विजय कुमार कर्ण संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के बिहार स्थित विश्वविद्यालय नव नालंदा महाविहार जो विश्व का प्राचीनतम विश्वविद्यालय है, में संस्कृत विभागाध्यक्ष के रूप में अपने ज्ञान का प्रकाश फैला रहे हैं। वे विभिन्न विश्वविद्यालयों की शैक्षिक गतिविधियों में सक्रिय रहते हैं। कई महत्वपूर्ण समितियों में सदस्य के रूप में भी शामिल हैं।
शिक्षाविदों ने दी बधाई
प्रोफेसर कर्ण को उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान का प्रतिष्ठित पुरस्कार मिलने से शैक्षिक जगत के कई विद्वानों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बधाई दी है। इनमें गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय हरिद्वार के प्रोफेसर धर्मेंद्र कुमार, आसाम यूनिवर्सिटी गोहाटी के प्रोफेसर कमलेश्वर शुक्ला,लखनऊ विश्वविद्यालय के डॉ.शैलेंद्र श्रीवास्तव, लखनऊ के डॉ.ब्रजेंद्र पांडेय, डॉ.मनीष हिंदवी, एमवीवी यूनिवर्सिटी त्रिपुरा के कुलपति प्रोफेसर सत्यदेव पोद्दार, आगरा विश्वविद्यालय के प्रोफेसर लवकुश मिश्रा, केंद्र सरकार में भूवैज्ञानिक डॉ निलय खरे और लखनऊ विश्वविद्यालय के डॉ.पीएन पाठक आदि मुख्य रूप से शामिल हैं।
