लखनऊ, 21 अप्रेल। विद्यान हिंदू पीजी कॉलेज ( Vidyant Hindu PG College ) के वाणिज्य संकाय एवं अर्थशास्त्र विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आज ‘ट्रांजैक्शनल एनालिसिस (Transactional Analysis): संगठनात्मक व्यवहार के लिए एक उत्प्रेरक’ विषय पर एक दिवसीय विशेष व्याख्यान एवं संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय ( Vidyant Hindu PG College ) की प्राचार्या डॉ. धरम कौर ने की, जिन्होंने अपने संबोधन में वर्तमान समय में व्यवहारिक मनोविज्ञान और संगठनात्मक कौशल की महत्ता पर बल दिया। कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ प्रो. शुक्ला के स्वागत संबोधन से हुआ, जिसमें उन्होंने अतिथियों का परिचय कराते हुए विषय की प्रासंगिकता स्पष्ट की।

संगोष्ठी की मुख्य वक्ता नेशनल पीजी कॉलेज, लखनऊ के वाणिज्य विभाग की प्रो. ज्योति भार्गव रहीं। उन्होंने अपने व्याख्यान में ‘ट्रांजैक्शनल एनालिसिस’ शब्द की ऐतिहासिक उत्पत्ति और इसके विकास पर विस्तृत चर्चा की। प्रो. भार्गव ने बताया कि इस सिद्धांत का प्रतिपादन प्रख्यात मनोवैज्ञानिक एरिक बर्न द्वारा किया गया था। उन्होंने समझाया कि किसी भी संस्था या संगठन की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वहां का संचार (Communication) कितना स्पष्ट और सटीक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रभावी कार्यप्रणाली के लिए संवाद में किसी भी प्रकार का अवरोध नहीं होना चाहिए और अपनी बात को ‘टू द पॉइंट’ कहना ही संगठन के हित में होता है।
व्याख्यान के दौरान प्रो. भार्गव ने ‘सेल्फ अवेयरनेस’ यानी आत्म-जागरूकता को व्यक्तित्व विकास का पहला चरण बताया। उन्होंने ‘ओपन पर्सनालिटी’ और ‘ब्लाइंड पर्सनालिटी’ के बीच के सूक्ष्म अंतर को समझाते हुए बताया कि दूसरों के व्यवहार को समझकर और स्वयं के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाकर ही किसी भी कार्य को कुशलतापूर्वक संपन्न कराया जा सकता है। उन्होंने व्यक्तित्व के तीन प्रमुख आयामों—चाइल्ड ईगो, एडल्ट ईगो और पेरेंट ईगो—की व्याख्या की। उन्होंने कहा कि Child Ego में थोड़ा सा डर होना स्वाभाविक और जरूरी है, जबकि Parent Ego हमें सुरक्षा प्रदान करने और कभी-कभी कड़े फैसले लेने के लिए प्रेरित करता है। जीवन के प्रति दृष्टिकोण साझा करते हुए उन्होंने ‘I am OK, You are OK’ की स्थिति को श्रेष्ठ बताया।

कार्यक्रम का सफल संचालन और समन्वय संयोजक प्रो. दीप किशोर श्रीवास्तव एवं सह-संयोजक प्रो. ममता भटनागर के द्वारा किया गया। संगोष्ठी के समापन पर सह-संयोजक प्रो. ममता भटनागर ने मुख्य वक्ता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की और उपस्थित सभी शिक्षकों, कार्यालय कर्मचारियों एवं भारी संख्या में मौजूद छात्र-छात्राओं को उनके सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया। यह संगोष्ठी विद्यार्थियों के लिए व्यावहारिक ज्ञान और व्यक्तित्व निर्माण की दृष्टि से अत्यंत ज्ञानवर्धक रही।
