लखनऊ | उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ( UPESSC ) द्वारा सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्य पदों के लिए मांगे जा रहे आवेदनों में आवेदकों से नियुक्ति , अनुभव ,बैंक में वेतन आने संबंधी कई महत्वपूर्ण प्रमाण पत्र संलग्न करने की निर्देश दिए जा चुके है | अब ऐसे आवेदकों को ना तो उनके प्रधानाचार्य नियुक्ति पत्र, न ही अनुभव , न बैंक खातों में वेतन अंतरण करने की संबंधी प्रमाणपत्र दे रहे हैं | इसके अलावा भी मांगे जा रहे कई अन्य प्रमाण पत्र व सूचनाओं से संबंधित दस्तावेज वित्त विहीन विद्यालयों के प्रबंधकों और प्रधानाचार्य द्वारा नहीं दिए जा रहे हैं और आवेदक आवेदन नहीं कर पा रहे हैं |
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!UPESSC News : ऐसी स्थिति में विधान परिषद के लिए हाल ही में वाराणसी से सदस्य निर्वाचित हुए लाल बिहारी यादव और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र गोरखपुर से चुनाव जीते ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने विभागीय अधिकारियों को पत्र लिखकर जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ही प्रमाणपत्र देकर आवेदन करने वालों को आवेदन करने की अनुमति देने का आग्रह किया है |
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन विद्यालयों के प्रबंधकों को प्रधानाचार्यों ने हाल ही में संपन्न हुए चुनाव में अपने विद्यालय के शिक्षकों को नियुक्ति संबंधी अन्य दस्तावेजों के सहारे मतदाता बनाया था | उन्हें अब नियुक्ति पत्र तथा अन्य दस्तावेजी प्रमाणपत्र देने में क्या दिक्कत आ रही है | सबसे बड़ा सवाल यही है और वित्त विहीन विद्यालयों में पढ़ा रहे शिक्षकों- प्रधानाचार्य की यही सबसे बड़ी दुखती रग है|
इसे आसानी से यूं समझ जा सकता है कि वित्तविहीन विद्यालयों के प्रबंधकों ने विभिन्न राजनीतिक दलों से मिलकर अपने शिक्षकों को मतदाता बनाकर दलों के उम्मीदवारों की वोट तो दिलवा दिया / जितवा तो दिया लेकिन अब मतदाताओं के वास्तविक अधिकारों को दिलाने में ही खुद प्रबंधक प्रधानाचार्य पीछे हट गए हैं | मतदाता बनाते समय इन प्रबंधकों ने इन्हें शिक्षक के रूप में मान्यता दी, दस्तावेज दिए और उन्हें दस्तावेजों के आधार पर निर्वाचन आयोग ने शिक्षकों को शिक्षक मतदाता के रूप में दर्ज किया| शिक्षक मतदाता सूची में उनके नाम आए और फिर शिक्षक मतदाताओं ने हाल ही में संपन्न हुए चुनाव में वोट दिया |

चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों ने भी इन विद्यालयों के शिक्षकों की समस्याओं के समाधान के लिए ठोस प्रयास करने का आश्वासन दिया था | उनकी वेतन विसंगति और सरकार द्वारा समय-समय पर जारी शासनादेशों के अनुरूप सुविधाएं और हक दिलाने की बात भी कही थी, लेकिन मुश्किल से एक हफ्ते पहले चुनाव परिणाम आए हैं लेकिन अब ऐसे विद्यालयों के प्रबंधकों से शिक्षकों के वेतन, नियुक्ति संबंधी प्रमाण पत्र देने के बजाय शिक्षा विभाग के अधिकारियों से आग्रह किया जा रहा है कि वह अपने कार्यालय में उपलब्ध दस्तावेजों के सहारे आवेदन के लिए वांछित प्रमाण पत्र प्रदान करें ताकि आवेदक नियमानुसार आवेदन कर सके|
इतना ही नहीं शिक्षा विभाग के अधिकारियों जिला विद्यालय निरीक्षक, मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक भी इन विद्यालयों के शिक्षकों के अधिकारों को दिलाने , उनका वेतन , सुविधा प्रदान करने के मामले में की उदासीन हैं | गिने-चुने विद्यालयों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश विद्यालयों में सीमित संसाधनों का हवाला देकर प्रबंधक और संस्थापक शिक्षकों को उनके काम के अनुसार वेतन नहीं दे रहे हैं| सुविधा नहीं मिल रही है | अवकाश मिल रहे हैं और न ही राज्य सरकारों द्वारा समय-समय पर जारी किए गए आदेशों के रूप उनकी सेवा सुरक्षा ही सुनिश्चित की जा रही है|
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन शिक्षक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में है और उन्हें दस्तावेज देकर शिक्षक मतदाता बनाया गया है | अब बैंक खातों में उनका वेतन हस्तांतरित करने , राज्य सरकारों द्वारा समय-समय पर जारी किए गए उनकी सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ और साथ ही उनके कार्य कार्यस्थल के माहौल को और बेहतर बनाने में मदद करनी चाहिए | ऐसा करने से ही वित्त विहीन शिक्षकों की समस्याओं की दूर करने की दिशा में न केवल बड़ा कदम होगा बल्कि आने वाले दिनों में शिक्षा व्यवस्था में अधिक सुधार और गुण कारक शिक्षक के रूप में वे अपनी उपस्थिति भी दर्ज कर सकेंगे|
