लुआक्टा सरकार से मांग करती है कि अपने निर्णय पर पुनर्विचार करे एवं प्रधानमन्त्री जी के सपनों को चकनाचूर न होने दे ।
लखनऊ , 8 अगस्त । campussamachar.com, लखनऊ विश्वविद्यालय सहयुक्त महाविद्यालय शिक्षक संघ (लुआक्टा ) ने उच्च शिक्षा निदेशक द्वारा आज 8 अगस्त 2023 को जारी उसे परिपत्र पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है जिसमें शासकीय/ सहायता प्राप्त महाविद्यालय में काद्यापको, कर्मचारियों, तथा छात्र-छात्राओं की उपस्थिति बायोमेट्रिक सिस्टम द्वारा दर्ज करना सुनिश्चित करने एवं कृत कार्यवाही से उच्च शिक्षा निदेशक को अवगत कराने की बात कही गई है। लुआक्टा ने इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है ।
uttar pradesh news : दरअसल उच्च शिक्षा निरीक्षक प्रयागराज की ओर से आज 8 अगस्त 2023 को प्रबंधक /सचिव /प्राचार्य सभी सहायता प्राप्त अशासकीय महाविद्यालय को यह दिशा निर्देश भेजे गए हैं । बायोमेट्रिक उपस्थिति के अनिवार्यता के संबंध में भेजे गए इस परिपत्र में यह दिशा निर्देश उस बैठक के कार्य वृत का हिस्सा है , जो प्रमुख सचिव ने ली थी। इस बैठक से पहले राज्यपाल उत्तर प्रदेश ने शासकीय /अनुदानित महाविद्यालय के प्राचार्य एवं प्रबंधन के साथ हुई बैठक आयोजित की गयी थी । इस बैठक क दौरान प्रकाश में आई कई पर समस्याओं के संबंध में प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में आयोजित वर्चुअल बैठक हुई। इसमें कई प्रबंधक / सचिव द्वारा महाविद्यालय में शिक्षकों एवं छात्र-छात्राओं की उपस्थिति सुनिश्चित करने हेतु बायोमेट्रिक उपस्थिति का प्रावधान लागू किए जाने हेतु अनुरोध किया गया है , इस संबंध में निर्देशित किया जाता है कि शासन के निर्देशानुसार अपने विद्यालय में तत्काल प्रभाव से स्वयं की एवं समस्त प्राध्यापकों, कर्मचारियों तथा विद्यार्थियों की उपस्थित बायोमेट्रिक सिस्टम द्वारा दर्ज करना सुनिश्चित करें।
up news in hindi : लुआक्टा के नेताओं के मुताबिक अशासकीय अनुदानित महाविद्यालय के कतिपय प्रबंधको एवं प्राचार्यो की गहरी साजिश का परिणाम है। उत्तरप्रदेश के अशासकीय अनुदानित महाविद्यालय पहले से ही प्रवेश की समस्या से जूझ रहे हैं उक्त शासनादेश इन महाविद्यालयों को ही ख़त्म करने की साजिश है एवं बचे खुचे सार्वजनिक व्यवस्था को निजीकरण की भेंट चढ़ाने का कदम हैं । इतना ही नहीं प्रबंधक भी अपनी सम्पत्तियों का प्रयोग अन्य व्यावसायिक उपयोग में करने के लिए लालायित रहते हैं । लुआक्टा सरकार से मांग करती है कि अपने निर्णय पर पुनर्विचार करे एवं प्रधानमन्त्री जी के सपनों को चकनाचूर न होने दे । इन पुराने अशासकीय अनुदानित महाविद्यालयों द्वारा गरीब छात्रों का जो शिक्षा प्राप्ति का सपना था उसे बना रहने दे, जिससे मानव विकास एवं राष्ट्र का उत्थान सम्भव हो सके । लुआक्टा के अध्यक्ष डॉ मनोज पांडेय और महामंत्री डॉ अंशु केडिया ने बायोमैट्रिक का विरोध करते हुए वापस लेने की मांग की है ।
