
- पच्चीस वर्षों से भी अधिक समय से सेवा रत तेईस सौ तदर्थ शिक्षकों ने लगायी मुख्यमंत्री से गुहार : डॉ जितेंद्र सिंह पटेल
- शिक्षा अधिका रियों की गलतियों का खामिया जा भुगत रहे तदर्थ शिक्षक : ओम प्रकाश त्रिपाठी
लखनऊ , 05 नवंबर। सहायता प्राप्त गैर सरकारी माध्य मिक शिक्षण संस्थानों में विगत 30 दिसंबर २००० के पहले से नियुक्त लगभग 2300 तदर्थ शिक्षकों को गत दस महीने से वेतन भुगतान नही हो रहा है। इस तरह से वे और उनसे जुड़े हजारो लोग भुखमरी के कगार पर पहुँच चुके हैं। इस मामले में गहरी चिंता व्यक्त करते हुए उ प्र माध्यमिक शिक्षक संघ पांडेय गुट ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी एवं अपर मुख्य सचिव मा शिक्षा पार्थ सारथीसेन शर्मा जी का व्यक्तिगत ध्यान आकृष्ट करते हुए तत्काल हस्तक्षेप किये जाने की मांग की है।

शिक्षक नेताओं ने कहा कि शिक्षा विभाग के सक्षम अधिका रियों द्वारा सरकार को गुमराह कर शिक्षकों का उत्पीड़न किया जा रहा है। गौरतलब हो कि ये सभी शिक्षक शिक्षिकाएं तत् समय लागू नियुक्ति प्रक्रिया के अंतर्गत कठि नाई निवारण अधि नियमित व्यवस्था में नियुक्त किये गए थे। वे अट्ठा इस से तीस वर्ष तक सेवा करने मे अपना योगदा न किया। अब उन्हें सेवा से हटाया जाना जहाँ एक ओर अधिनियम के प्रावधानों के सर्वथा विपरीत तो है ही मानवी य संवेदनाओं की भी पराकाष्ठा है।
सूबे की योगी आदित्यनाथ जी की सरकार जहाँ एक ओर प्रदेश में नये नये रोजगार की दिशा में प्रयासरत है और रोजगार मेले तक आयोजित कार्यक्रम कर लोगो को रोजगार देने मै जुटी है वही पर माध्य मिक शिक्षा विभाग द्वारा एक लंबी उम्र में इतनी लंबी सेवा करने के बाद भी सेवा से हटाये जाने की बात सोचना भी सरकार के खिलाफ छवि धूमिल करने की साजिस सी प्रतीत होती है। यह आज शिक्षा जगत के सामने सबसे बड़ी चुनौती है।
शिक्षक नेताओ ने आज इस मामले मे फिर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी का ध्यान आकृष्ट किया है और उनसे सभी विगत ढाई दशक वर्षो से सेवा र् त तदर्थ शिक्षकों को उ प्र माध्य मिक शिक्षा सेवा आयोग अधिनि यम की धारा 33- छ के अंतर्गत निर्धरित समय सीम तीस दिसंबर 2000 तक की सेवा को विनियमि त कर उनके छ महीने से रोके गए वेतन तत्काल भुगतान किये जाने की पुरजोर मांग की है। ऐसा किये जाने से प्रदेश की माध्य मिक शिक्षा जगत से हमेशा के लिए तदर्थ वाद समाप्त भी हो सकेगा।
