लखनऊ /प्रयागराज , 18 जुलाई , उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं इलाहाबाद संग्रहालय समिति की अध्यक्ष श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने 17 जुलाई को प्रयागराज स्थित इलाहाबाद संग्रहालय में हिंदी साहित्य एवं साहित्यकारों पर केंद्रित ’’सुमित्रानंदन पंत साहित्यिक वीथिका’’ का उद्घाटन किया।
इस अवसर पर राज्यपाल जी ने वीथिका का भ्रमण कर वहां संरक्षित साहित्यिक धरोहरों के बारे में जानकारी प्राप्त की व वीथिका में प्रदर्शित हिंदी साहित्य से संबंधित दुर्लभ कृतियों, पत्रों एवं स्मृति चिह्नों का अवलोकन किया। उन्होंने खड़ी बोली एवं अवधी भाषा के स्वरूपों के अंतर पर चर्चा करते हुए कविवर सुमित्रानंदन पंत से संबंधित ज्ञानपीठ सम्मान, स्मृति चिह्न एवं वाग्देवी प्रतिमा का अवलोकन किया।

राज्यपाल जी ने पंडित सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की ऐतिहासिक कलम, परिधानों एवं उनकी कृति ‘आराधना’ के तृतीय अध्याय का भी अवलोकन किया। पंत जी को समर्पित प्रदर्श पटल के समक्ष उन्होंने उनकी प्रसिद्ध पंक्तियों ’“न जाने नक्षत्रों से कौन, निमंत्रण देता मुझको मौन”’ का पाठ करते हुए उसका भावार्थ भी जाना। उन्होंने साहित्यिक वीथिका के पूर्ण डिजिटलीकरण के निर्देश दिए, ताकि हिंदी साहित्य की यह अमूल्य धरोहर अधिकाधिक लोगों तक प्रभावी रूप से पहुँच सके।
सुमित्रानंदन पंत साहित्यिक वीथिका हिंदी साहित्य के छायावादी युग की समृद्ध विरासत को समर्पित है। इसमें सुमित्रानंदन पंत, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’, महादेवी वर्मा, बालकृष्ण भट्ट, श्रीधर पाठक, मुंशी प्रेमचंद, मैथिलीशरण गुप्त, नरेश मेहता, हरिवंश राय बच्चन एवं प्रो. रामकुमार वर्मा से संबंधित दुर्लभ साहित्यिक सामग्री संरक्षित की गई है। यह वीथिका हिंदी कविता, पत्रकारिता, उपन्यास एवं कहानी साहित्य के विकास क्रम को सजीव रूप में प्रस्तुत करती है।

राज्यपाल जी ने संग्रहालय में दिव्यांगजनों के लिए विकसित ’‘अनुभव वीथिका’’ का भी अवलोकन किया और वहां उपस्थित दिव्यांग बच्चों से संवाद किया। उन्होंने ऐतिहासिक स्मारकों, मंदिरों एवं वन्यजीवों के स्पर्श आधारित मॉडलों के संबंध में बच्चों के अनुभव जाने। उन्होंने दिव्यांग बच्चों के लिए वाइल्डलाइफ सेंचुरी एवं अयोध्या राम मंदिर भ्रमण की व्यवस्था कराने का निर्देश दिया।
संवाद के दौरान एक बालिका द्वारा ‘विकलांग’ के स्थान पर ‘दिव्यांग’ शब्द से मिलने वाले सम्मानजनक भाव को व्यक्त किए जाने पर राज्यपाल भावुक हो गईं। उन्होंने बच्चों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें अपने हाथों से चॉकलेट वितरित की।
तत्पश्चात संग्रहालय सभागार में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल ने ’‘सुमित्रानंदन पंत साहित्यिक वीथिका’’ पर आधारित कैटलॉग का विमोचन किया। उन्होंने विभिन्न दिव्यांग विद्यालयों से आए विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को बैग तथा आम के पौधों का वितरण किया।

राज्यपाल जी ने कहा कि “साझा करना ही संवेदनशीलता का वास्तविक परिचायक है।” उन्होंने कहा कि समाज में उपलब्ध संसाधनों एवं अवसरों को साझा करने की भावना सामाजिक समरसता को मजबूत करती है। उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति को आत्मनिरीक्षण एवं आत्ममूल्यांकन करते हुए समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने का आह्वान किया।
राज्यपाल जी ने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए शिक्षकों से विद्यार्थियों को इसके भाव एवं अर्थ से परिचित कराने की अपील की। उन्होंने गुजरात की ‘सुजलाम् सुफलाम्’ नहर का उदाहरण देते हुए जल संरक्षण एवं जनकल्याण की भावना पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम में बचपन डे केयर सेंटर प्रयागराज के 40, जीवन ज्योति इंस्टीट्यूट सारनाथ वाराणसी के 23, दिव्य ज्योति निकेतन नाजरेथ हॉस्पिटल के 10 तथा उत्तर प्रदेश मूकबधिर विद्यालय जॉर्ज टाउन प्रयागराज के लगभग 30 श्रवण, बौद्धिक एवं दृष्टि दिव्यांग बच्चों तथा उनके शिक्षकों ने प्रतिभाग किया
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