लखनऊ | उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 स्नातक व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की मतगणना के बाद चुनाव परिणाम घोषित कर दिए गए हैं | घोषित परिणामों के अनुसार भारतीय जनता पार्टी ने 6 सीटें जीती हैं जबकि 5 सीटें समाजवादी पार्टी के खाते में आई हैं | सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन 11 सीटों के चुनाव में माध्यमिक शिक्षक संघ के किसी भी गुट का कोई उम्मीदवार चुनाव नहीं जीत पाया है| ऐसे में विधान परिषद में शिक्षक संगठनों का प्रतिनिधि शून्य हो गया है | राजनीतिक स्तर पर इस चुनाव परिणाम की समीक्षा करें तो माध्यमिक शिक्षक संघ ( शर्मा गुट ) के ओम प्रकाश शर्मा का यह कथन कि उनके संगठन ने शिक्षकों को वेतन और सुविधाएं देकर शून्य से शिखर तक पहुंचाया है तो आज इसी संगठन के नेताओं ने अपनी अदूरदर्शिता के कारण शर्मा गुट को शिखर से शून्य पर पहुंचा दिया है| इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि आने वाले दिनों में शर्मा गुट में और अधिक गुटबाजी और पदाधिकारियों में तोड़फोड़ हो, क्योंकि इस चुनाव से पहले शर्मा गुट के एकमात्र विधान परिषद सदस्य ध्रुव कुमार त्रिपाठी थे , लेकिन उन्होंने भी इस बार भारतीय जनता पार्टी के बैनर तले चुनाव लड़ा और मामूली मतों से जीत दर्ज की है |
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!माध्यमिक शिक्षक संघ शर्मा गुट , पांडे गुट , ठाकुरई गुट , एकजुट सहित विभिन्न गुटों में विभक्त शिक्षक राजनीति ने खुद को पूरी तरीके से धूल-धूसरित कर दिया है | इस अवसर का राजनीतिक दलों ने लाभ उठाया , जिनमें भारतीय जनता पार्टी सबसे आगे रही | शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी ने आगरा स्नातक , मेरठ शिक्षक व स्नातक , बरेली, गोरखपुर, लखनऊ शिक्षक की 6 सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि सपा ने 5 सीटें जीती हैं। शिक्षक नेता बताते हैं कि वर्ष 2008 से पहले तक विधान परिषद में शिक्षक संघ से जुड़े विधान परिषद सदस्यों का बोलबाला रहता था | शर्मा गुट के ही लगभग दर्जन भर नेता स्नातक -शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से चुनकर आते थे | सदस्य शिक्षक समस्याओं को लेकर सदन में अपनी बातें रखते थे | यही कारण है कि शिक्षकों की वेतन वृद्धि से लेकर सेवा शर्तों की सुरक्षा का ख्याल रखा गया, लेकिन वित्तविहीन शिक्षकों के मतदाता बनने के बाद शिक्षक राजनीति में काफी उतार चढ़ाव आया और धीरे-धीरे शिक्षक संघ के उम्मीदवार चुनाव हारते गए | संघ भी अपने कामकाज में बदलाव नहीं लाया और वित्त विहीन मतदाताओं के हितों से दूरी बनाये रखी | वर्तमान में राज बहादुर सिंह विधान परिषद में हैं वे भी कभी शर्मा गुट के ही नेता हुआ करते थे लेकिन अब स्वतंत्र हैं |
पिछला चुनाव खुद माध्यमिक शिक्षक संघ प्रदेश अध्यक्ष ओम प्रकाश शर्मा मेरठ से हार गए थे| भारतीय जनता पार्टी के श्रीशचंद शर्मा ने चुनाव हराया था| उनकी हार के बाद संगठन के अन्य उम्मीदवार भी चुनाव हार गए और धीरे-धीरे यह सिलसिला बढ़ता गया और संगठन भी कमजोर होता गया| इस चुनाव में प्रदेश अध्यक्ष से लेकर बड़े नेता राजनीतिक दलों में अपना भविष्य देखने लगे और दो बड़े नेता तो चले भी गए | वर्तमान में हालत यह है कि संगठन के पदाधिकारी में भी अविश्वास जैसी स्थिति बन गई है क्योंकि कई ऐसे उम्मीदवारों को इस चुनाव में उम्मीदवार बना दिया गया, जिन्हें स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ता पसंद ही नहीं करते थे लेकिन वरिष्ठ नेताओं के दबाव में उन्हें उम्मीदवार बनाया गया | इसके बावजूद चुनाव नहीं जीत पाए| पाण्डेय गुट के अध्यक्ष जितेंद्र पटेल और महामंत्री आशीष कुमार सिंह भी चुनाव हार गए|
आने वाले दिनों में शिक्षक संघ की राजनीति में काफी बदलाव देखने को मिलेगा | इसकी वजह है कि वर्तमान समय में माध्यमिक शिक्षक संघ के किसी धड़े के पास इतने अधिक समर्थक नहीं है कि वे शिक्षा विभाग या शिक्षकों से जुड़े मुद्दों पर सरकार पर दबाव की राजनीति कर सकें क्योंकि सदन में अब शिक्षक संघ का कोई प्रतिनिधि नहीं है और जमीनी स्तर पर उनके साथ शिक्षकों का बड़ा समर्थन नहीं है | ऐसे में किसी प्रकार का आंदोलन खड़ा करना दूर की कौड़ी होगी | इसलिए शिक्षक संगठनों को अपनी राजनीति को नए सिरे से सोचना और समझना होगा।
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