लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधान परिषद सदस्य के लिए शिक्षक एवं स्नातक चुनाव ( UP MLC Election ) की मतगणना आज 27 अक्टूबर को सुबह आठ बजे से शुरू हो गयी है| विधान परिषद की इन 11 सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान हुआ था । इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी , माध्यमिक शिक्षक संघ शर्मा गुट ,पांडे गुट समेत कुल 152 प्रत्याशी मैदान में हैं। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सीसीटीवी कैमरे व वीडियोग्राफी की निगरानी में मतगणना कराई जा रही है। इन 11 सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान हुआ था।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!इन सभी उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला आज 27 अक्टूबर को हो रही मतगणना में होगा। इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की कोशिश जहां अपनी सीटों को बचाते हुए समाजवादी पार्टी की सीटों को जीतने की है , वहीं समाजवादी पार्टी की भी यही रणनीति दिखाई दी कि अपनी सीटों को बचाते हुए अन्य सीटों पर कब्जा किया जाए। इसकी वजह है अगले वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव हैं, क्योंकि इन 11 सीटों के लिए हुए चुनाव में प्रदेश के 72 जिलों में शिक्षकों और स्नातक मतदाताओं ने मत डाले थे । इसके परिणाम से राजनीति पर तो बहुत असर नहीं पड़ेगा लेकिन फिर भी एक बानगी के तौर पर यह देखा जा सकता है कि भारतीय जनता पार्टी सरकार के प्रति मतदाताओं का सामान्य रूख क्या है और समाजवादी पार्टी की स्थिति कैसी है ?
UP MLC Election : इस चुनाव में सबसे महत्वपूर्ण बात गोरखपुर और वाराणसी शिक्षक स्नातक क्षेत्र की है । इन दोनों जगह पर भारतीय जनता पार्टी ने शर्मा गुट के नेताओं को भाजपा में शामिल करते हुए उन्हें उम्मीदवार घोषित किया था। गोरखपुर में भारतीय जनता पार्टी के संजयन त्रिपाठी भारतीय जनता पार्टी से टिकट मांग रहे थे लेकिन जब भाजपा ने शर्मा गुट के नेता ध्रुव कुमार त्रिपाठी को संगठन को उम्मीदवार घोषित किया तो संजयन त्रिपाठी बागी हो गए और समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए । समाजवादी पार्टी ने उन्हें गोरखपुर से टिकट भी दे दिया जबकि अपने कैंडिडेट कमलेश यादव को बैठा दिया ।
campussamachar : इसी प्रकार वाराणसी क्षेत्र में भी भारतीय जनता पार्टी ने शर्मा गुट के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष प्रमोद मिश्रा को शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का उम्मीदवार बनाया । यहां पर भी महत्वपूर्ण बात यह है कि भारतीय जनता पार्टी के भी कई उम्मीदवार टिकट की लालसा में थे, लेकिन पार्टी ने ऐन वक्त पर प्रमोद मिश्रा को चुनाव मैदान में उतार दिया। इन दोनों सीटों पर सबकी नजरें लगी हुईं हैं |
इसके अलावा 23 अक्टूबर को मतदान में व्यापक स्तर पर धांधली, जबरन कब्जा, मतदाता सूची में गड़बड़ी की शिकायतें भी प्रकाश में आई । शिकायतों के बाद इनमें आगरा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में तीन बूथ पर पुन: मतदान 26 अक्टूबर को कराया गया । इन सीटों पर चुनाव के दिन बूथों पर पर कब्जा, मारपीट और मतदाता सूची में गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगाए गए थे । कुल मिलाकर 27 अक्टूबर को शिक्षक स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की मतगणना पर प्रदेश के सभी लोगों की नजर लगी हुई है ।
पांडे गुट -शर्मा गुट की ताकत का चलेगा पता
UP Politics : इस चुनाव में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उत्तर प्रदेश की शिक्षक राजनीति में सबसे अधिक वर्चस्व वाले दो संगठनों माध्यमिक शिक्षक संघ शर्मा गुट और माध्यमिक शिक्षक संघ पांडे गुट की वास्तविक ताकत का भी पता चलेगा, क्योंकि पिछले चुनाव में शर्मा गुट के एकमात्र उम्मीदवार ध्रुव कुमार त्रिपाठी विधान परिषद पहुंचे थे और अब ध्रुव कुमार त्रिपाठी भारतीय जनता पार्टी में शामिल होकर विधान परिषद पहुंचने का सपना देख रहे हैं। ऐसे में अगर शर्मा गुट किसी भी सीट पर जीत दर्ज नहीं कर पाता है तो यह पहला मौका होगा जब विधान परिषद में शर्मा गुट की स्थिति शून्य हो जाएगी ।
Lucknow News : वहीं दूसरी ओर पांडे गुट ने भी बड़ी मजबूती से चुनाव लड़ा । संगठन के प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र सिंह पटेल खुद मिर्जापुर से चुनाव लड़े जबकि लखनऊ से संगठन के महामंत्री आशीष कुमार सिंह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से मैदान में थे।पांडे गुट ने पश्चिम उत्तर प्रदेश में कुछ सीटों पर अपना समर्थन दिया था | अब यह देखना है महत्वपूर्ण होगा कि पांडे गुट के कौन उम्मीदवार विधान परिषद में पहुंचते हैं ।
कुल मिलाकर वर्तमान हालात ऐसे नजर आ रहे हैं कि अगर इन दोनों संगठनों के उम्मीदवार चुनाव नहीं जीत पाते हैं तो उत्तर प्रदेश के शिक्षक और स्नातक राजनीति में दलीय राजनीति पूरी तरह हावी हो जाएगी । इनमें कुछ सीटों पर भारतीय जनता पार्टी का कब्जा होगा तो वहीं कुछ सीटों पर समाजवादी पार्टी का कब्जा होगा। ऐसे में सवाल यह महत्वपूर्ण है कि राजनीतिक दलों के जीतने के बाद प्रदेश के शिक्षकों की समस्याओं की लड़ाई कैसे और कौन लड़ेगा |
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