- शिक्षा विभाग को चाहिए कि इन शिक्षकों की जाँच करे और देखे वेतन – भत्ते तथा समय -समय पर सरकार द्वारा जारी किए गए आदेशों के अनुरूप सुविधाएँ मिल रहीं है या नहीं ?
लखनऊ | उत्तर प्रदेश विधान परिषद के लिए स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव संपन्न ( UP MLC Election) हो गए हैं | अब सभी प्रत्याशियों को चुनाव परिणाम का इंतजार है कि उन पर शिक्षक और स्नातक मतदाताओं ने अपना भरोसा जताया है या नहीं ? लेकिन चुनाव परिणाम और मतदान के बाद एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि शिक्षक निर्वाचन चुनाव 2026 में कई ऐसे शिक्षकों ने भी मतदान किया है, जो वास्तव में शिक्षक नहीं है | प्रदेश के अलग-अलग जनपदों से ऐसी शिकायतें मिली है और अधिकारियों ने भी अप्रत्यक्ष रूप से स्वीकार भी किया है कि ऐसे शिक्षकों के नाम बिना सत्यापन किये ही न केवल मतदाता सूची में नाम दर्ज कर लिये गए बल्कि उन्हें मत देने दिया गया |
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!ऐसे ही शिक्षकों ने प्रमाणित प्रभावित किया ?
ऐसे में सवाल है क्या चुनाव परिणाम को ऐसे ही शिक्षकों ने प्रभावित किया है ? इसके अलावा महत्वपूर्ण बात यह है कि ऐसे शिक्षकों को विद्यालय का शिक्षक प्रमाणित करने के लिए संबंधित विद्यालयों के प्रधानाचायों और प्रबंधनों ने एक लिखित दस्तावेज दिया| इसके आधार पर इन शिक्षकों को शिक्षक माना गया | अब शिक्षा विभाग को वित्त विहीन विद्यालयों के शिक्षकों के नाम उपलब्ध हो गए हैं और सहायता प्राप्त शिक्षकों विद्यालयों के शिक्षकों के भी | ऐसे में शिक्षा विभाग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इन शिक्षकों की जाँच करे और देखे वेतन भत्ते तथा समय समय पर सरकार द्वारा जारी किए गए आदेशों के अनुरूप वेतन मिल रहा है या नहीं ? उनका वेतन बैंक के किन खातों में जा रहा है और उनके सेवा शर्तों से जुड़ी महत्वपूर्ण नीतियों का पालन विद्यालयों में हो रहा है या नहीं ? साथ यह भी सुनिश्चित करें कि इन विद्यालय के शिक्षकों की शैक्षिक अहर्ता क्या है ? क्या वे एक शिक्षक की शैक्षिक अहर्ता पूरी करते हैं ? जाँच से वास्तविक स्थिति पता चलेगी|
फर्जी शिक्षकों के खिलाफ कार्यवाही सुनिश्चित की जाए|
शिक्षक चुनाव की मतदाता सूची में कई ऐसे शिक्षक हैं, जिनका मत सत्यापित नहीं किया गया लेकिन उन्होंने वोट दिए हैं | अब संबंधित विद्यालय , शिक्षा विभाग और निर्वाचन आयोग की सहज जिम्मेदारी बनती है कि वह ऐसे शिक्षकों की खोजबीन करें| मतदाता सूची में ऐसे विद्यालयों के शिक्षकों के नाम स्पष्ट रूप से दर्ज हैं , तो चुनाव आयोग को एक अभियान के रूप में यह जांच सुनिश्चित करनी चाहिए कि मत देने वाले शिक्षकों में से वास्तविक शिक्षक कौन है और किन शिक्षकों ने कूट रचित दस्तावेज के आधार पर अपना मतदाता सूची में नाम दर्ज कराया है| अगर सभी नाम सही और तथ्य से पूरे हैं तो फर्जी मतदान और मतदाता की बातें नहीं की होनी चाहिए |
राजनीतिक दलों की भूमिका भी संभव
इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है इस काम में कई राजनीतिक दलों और निर्दलीय प्रत्याशियों की भूमिका महत्वपूर्ण रही होगी | इसकी वजह यह है कि अधिक से अधिक वोट पाने के चक्कर में न केवल कुछ राजनीतिक दल बल्कि कुछ निर्दलीय उम्मीदवार भी इस तरह से कूट रचित दस्तावेज के आधार पर अपने अधिक से अधिक मतदाता तैयार करते हैं | इस बात की भी आशंका है कि शिक्षक निर्वाचन 2026 में भी ऐसी ही गलतियां और त्रुटियां प्रकाश में आई है | हाल ही में शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी का वीडियो वायरल हुआ है, ( हम ऐसे किसी वीडियो की पुष्टि नहीं करते हैं ) जिसमें वे बता रहे हैं कि बिना सत्यापन के ही शिक्षकों के वोट डाले गए हैं और संभव है कि इसमें शिक्षक कूट रचित दस्तावेजों के हिसाब से मतदाता सूची में दर्ज हो गए हो | उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग इस मामले की जांच करे लेकिन सवाल यह है कि शिक्षकों ने फर्जी वोट डाले हैं और कौन से व्यक्ति फर्जी शिक्षकों के रूप में मतदाता सूची में दर्ज हुए हैं|
फर्जी शिक्षक का स्वरूप बेहद गंभीर है
फर्जी शिक्षक का यह स्वरूप बेहद गंभीर है और इसको यूं ही आरोप प्रत्यारोप के आधार पर नहीं टाला जा सकता | इसकी वजह यह है कि शिक्षक समाज के निर्माता है और अगर शिक्षकों में ही कूट रचित दस्तावेज से कोई शिक्षक के रूप में मतदाता सूची में दर्ज करता है तो अपराध है | इसलिए न केवल ऐसे शिक्षकों को दंडित किया जाना चाहिए बल्कि भविष्य में भी उन्हें मत देने से भी वंचित करने की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए | चुनाव आयोग लगातार निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव का प्रयास करता रहा है| इसके बावजूद कई जगहों पर ऐसी घटनाएं हुई हैं , जो चुनाव की निष्पक्षता और पारदर्शिता को प्रभावित करती हैं | आयोग ने पीलीभीत जैसे प्रकरण में कार्रवाई की भी है, लेकिन यह कार्रवाई सीमित स्थान पर ही होती है , जहां के मामले सुर्खियों में आते हैं लेकिन सामान्य तौर पर कूट रचित दस्तावेजों के आधार पर कुछ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में दर्ज होने की बातें दब जाती हैं और इसे किसी एक राजनीतिक दल द्वारा किया गया विरोध मानकर ठंडे बसते में डाल दिया जाता है| यह महत्वपूर्ण समय है कि चुनाव आयोग तत्काल एक अभियान चलाकर फर्जी शिक्षकों और वास्तविक शिक्षकों की पहचान करके जांच पूरी करे और वास्तविक शिक्षकों को उनका वेतन सुनिश्चित कराया जाए जबकि फर्जी शिक्षकों को उन्हें उचित कानूनी दंड दिया जाना चाहिए|
वित्त विहीन विद्यालयों के शिक्षकों को मिले वास्तविक वेतन
चुनाव आयोग की मतदाता सूची में दर्ज वित्त विहीन विद्यालयों के शिक्षकों को पूरा वेतन दिलाया जाय | ऐसा इसलिए जरूरी है कि राज्य सरकार समय-समय पर शिक्षकों की न्यूनतम वेतनमान की बात करती है और श्रम विभाग भी कुशल और अकुशल श्रेणी की न्यूनतम मजदूरी भी तय करता है, लेकिन यह सर्वविदित है कि प्रदेश के तमाम ऐसे vit विहीन विद्यालय हैं, जिनमें शिक्षकों को न्यूनतम वेतन या न्यूनतम मजदूरी भी नहीं मिल पा रही है | उनका अधिक से अधिक शोषण किया जाता है | उनके काम के घंटे का निर्धारण नहीं है और न ही उनके अवकाश और चिकित्सा सुविधाओं से भी जुड़ी चीज मिल पा रही हैं जबकि इस चुनाव में ऐसे विद्यालयों ने इन्हें अपना शिक्षक माना है और उन्हें चुनाव आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने का अधिकार भी दिया है |
इसलिए अब इन शिक्षकों इन विद्यालयों की जिम्मेदारी है कि वे ऐसे शिक्षकों को समय से वेतन भुगतान, काम की अवधि तय करते समय राज्य सरकार श्रम विभाग शिक्षा विभाग द्वारा जारी समय-समय पर निर्देशों का पालन सुनिश्चित करें |
