नई दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज 27 अक्तूबर को संस्कृत सुभाषित (श्लोक) को अपने सोशल मीडिया हैंडल पर साझा किया है।
यह संस्कृत श्लोक है “न संशयमनारुह्य नरो भद्राणि पश्यति। संशयं पुनरारुह्य यदि जीवति पश्यति॥”
जानिये इस श्लोक का अर्थ- मनुष्य बिना किसी संशय या जोखिम (अनिश्चितता) को पार किए कभी भी कल्याण या सफलता नहीं देखता है। यदि वह जोखिम भरे संशय से बचकर या उसे पार करके जीवित रहता है, तभी वह शुभ फल या सफलता को प्राप्त करता है। इसके माध्यम से जीवन में चुनौतियों, संशय और अनिश्चितताओं से ऊपर उठकर साहस और धैर्य के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी गई है।
